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स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है : महापौर संयुक्ता भाटिया

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लखनऊ। देवा रोड स्थित श्री रामस्वरूप मेमोरियल यूनिवर्सिटी में डॉक टेल हेल्थकेयर द्वारा वेलनेस सेन्टर की स्थापना की गयी। जिसका उद्घाटन महापौर संयुक्ता भाटिया ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस मौके पर अपने संबोधन में महापौर ने कहा कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है। भारतीय संस्कृति में जीवन शैली व्यवस्थित एवं वैज्ञानिक रही है। लेकिन पाश्चात्य संस्कृति ने हमारे युवाओं की जीवन शैली को अव्यवस्थित एवं अवसादग्रस्त बना दिया। आज पुनः इस बात की बहुत ज्यादा आवश्यकता है कि देश का युवा भारतीय संस्कृति के मूल्यों को समझे और देश निर्माण में अपना योगदान दे।
सेंटर के डॉ मनोहर ने बताया कि वेलनेस सेन्टर में यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राओं, शिक्षक-शिक्षिकाओं, कमर्चारियों को उनके शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए प्रशिक्षित डॉक्टर्स हर समय उपलब्ध रहेंगे। इस अवसर पर महापौर ने अपने स्वास्थ्य का परीक्षण भी कराया। कार्यक्रम में यूनिवर्सिटी के चांसलर पंकज अग्रवाल, प्रो. चांसलर पूजा अग्रवाल, वाइस चांसलर डॉ कर्नल एके सिंह समेत अन्य विशिष्टजन उपस्थित रहे।http://www.satyodaya.com

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संदिग्ध हालात में घर में फांसी के फंदे पर लटका मिला बच्चे का शव

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लखनऊ। आशियाना थाना क्षेत्र में अपने परिवार के साथ रहे 10 साल के एक बच्चे का शव सोमवार को संदिग्ध हालात में फांसी के फंदे पर लटकता मिला। घटना की सूचना पाकर मौके पर पहंुची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। बच्चे की मौत के कारणों का पता लगाने में पुलिस जुटी हुई है। आशियाना थाना प्रभारी विश्वजीत सिंह ने बताया कि थाना क्षेत्र स्थित ई/4- 692 में 10 वर्ष का मासूम शिवा पुत्र मुकेश कुमार अपनी मां चंद्रावती, बहन करिश्मा के साथ गुड्डू नामक व्यक्ति के संग रहता था। शिवा की मां लोगों के घरों में चौका बर्तन कर अपना जीवन यापन कर रही थी। वहीं गुड्डू मजदूरी का काम करता है।

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रविवार को शिवा की मां और बहन काम पर गए हुए थे। मुंहबोला पिता गुड्डू भी अपने काम पर चला गया। देर शाम गुड्डू अपने काम से लौटा तो दरवाजा अंदर से बंद था। उसके कई बार आवाज देने के बाद भी जब दरवाजा नहीं खुला तो गुड्डू ने खिड़की से झांक कर देखा तो मासूम शिवा का शव सीढ़ी के डंडे में दुपट्टे से लटका हुआ था। गुड्डू ने घटना की सूचना तत्काल कन्ट्रोल रूम पर पुलिस को दी। सूचना पाकर मौके पर पहुंची स्थानीय पुलिस ने बरामदे का दरवाजा तोड़कर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। वहीं पुलिस मौत के कारणों की जांच में जुटी है।http://www.satyodaya.com

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प्रदेश

भव्य राम मंदिर परिसर में वाल्मीकि, तुलसीदास और निषादराज को भी मिले स्थान

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भारतीय बौद्ध संघ ने प्रेसवार्ता कर उठाई मांग

लखनऊ। भारतीय बौद्ध संघ ने अयोध्या में प्रस्तावित भव्य राम मंदिर परिसर में महर्षि वाल्मीकि, तुलसीदास, केवटराज निषाद और हनुमान जी की प्रतिमाओं को भी स्थान देने की मांग की है। सोमवार को संघ के राष्ट्रीय और प्रदेश पदाधिकारियों व सदस्यों ने हजरतगंज स्थित उत्तर प्रदेश प्रेस क्लब सभागार में एक प्रेसवार्ता की। पदाधिकारियों ने पीएम मोदी और सीएम योगी से अपील की कि सर्वजन कल्याण और जनसामान्य की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए भव्य राम मंदिर का निर्माण किया जाए।

संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष भंते संघप्रिय राहुल ने कहा कि राममंदिर परिसर में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की प्रतिमा के साथ महर्षि वाल्मीकि, तुलसीदास, निषादराज और हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित की जाए। क्योंकि विभिन्न कालों में इन महामनीषियों के सामूहिक प्रयास से ही समाज की कल्याणकारी अवधारणा बनी। समाज के मौजूदा परिवेश में इन्हीं देवता और महामनीषियों के विचारों के साथ ही सर्व समाज की अवधारणा को पूरा किया जा सकता है। भंते संघप्रिय राहुल ने कहा कि भारतीय बौद्ध संघ सामाजिक समरसता के लिए कार्य कर रहा है। इन महामनीषियों ने भगवान राम के चरित्र एवं मर्यादाओं को अपने जीवन में चरितार्थ किया है।

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सर्वसमाज में पैदा हुए सभी संतों एवं महापुरुषों को केंद्र एवं राज्य सरकार को पूरा आदर और सम्मान देना चाहिए। इसी धारणा के लिए भारतीय बौद्ध संघ निरंतर प्रयासरत है। भगवान बुद्ध के शांति, मैत्री और भाईचारे का संदेश जनमानस तक पहुंचाने के लिए बौद्ध संघ लगातार प्रयासरत है। प्रेसवार्ता में संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष भंते संघप्रिय राहुल, प्रधान राष्ट्रीय महासचिव एडवोकेट टीएस वरूण, प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट मीना भारती, राष्ट्रीय सचिव अरुणराज कोरी, प्रदेश महासचिव राजनाथ सिंह, अनुराग चैधरी सहित कई पदाधिकारी व सदस्य मौजूद रहे।

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अंतरराष्ट्रीय पाइल्स दिवस के मौके पर जन जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन करेगा KGMU

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लखनऊ। पाइल्स के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए शल्य चिकित्सा विभाग किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी आने वाले 20 नवम्बर को अंतरराष्ट्रीय पाइल्स दिवस के अवसर पर जन जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन करेगा। इस कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए एसिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मनीष कुमार अग्रवाल ने कहा कि इस मौके पर एक पोस्टर प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जाएगा। जिसमें मेडिकल व पैरामेडिकल व नर्सिंग के छात्र भाग लेंगे। सभी पोस्टरों में से उत्तम पोस्टरों को पुरस्कृत किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि पाइल्स एक साधारण रोग है। लगभग 50% लोगों को जीवनकाल में इस बीमारी से पीड़ित होने की संभावना होती है। जिसे स्वस्थ्य जीवनशैली अपना कर कम किया जा सकता है। सही समय पर सटीक इलाज कराने से इसका निवारण संभव है। इस जागरूकता अभियान से लोगों को पाइल्स से बचने व स्वस्थ्य जीवनशैली के लिए प्रोत्साहित करना और भ्रामक जानकारी से दूर रहना है। पाइल्स शरीर का नार्मल अंग है। जो कॉटिनैंस की प्राकृतिक परिक्रिया में अपना योगदान देता है। यह गुदा जैसा वैस्कुलर कुशन के रूप में होता है। कभी-कभी इसमें खून का अधिक भराव या अपने स्थान से नीचे खिसकने के कारण मरीज में लक्षण आते हैं। पाइल्स के मुख्य लक्षण खून आना गुदा द्वारा सूजन होना दर्द होना है। आमतौर पर यह लक्षण स्वत: ही ठीक हो जाते हैं या कभी-कभी इसके इलाज की जरूरत पड़ती है। 80% तक मरीजों में बिना ऑपरेशन के सफल इलाज हो जाता है।

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वहीं सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. अरशद अहमद ने कहा कि कभी-कभी यह लक्षण बढ़ जाते हैं, जहां गंभीर परेशानियां भी हो सकती है। जैसे (एनीमिया) शरीर में खून की कमी होना। बवासीर में खून का थक्का जमना। ऐसी स्थिति में मरीज को तुरंत भर्ती करके सघन इलाज की जरूरत पड़ती है। उन्होंने कहा कि आमतौर से लोग इस बीमारी के लिए योग्य चिकित्सक को दिखाने के बजाय देसी इलाज नीम, हकीम झाड़ूफूक इत्यादि के चक्कर में पड़ जाते हैं। जिससे यह बीमारी का स्वरूप जटिल हो जाता है। वह कभी-कभी गंभीर दुष्परिणाम जैसे कि इनकांटीनेंस या एनल स्टेनोसिस हो सकती है।

डॉ. अरशद अहमद ने कहा कि कभी-कभी मरीज को अन्य गंभीर बीमारियों जैसे कि अल्सरेटिव कोलाइटिस रेक्टल कैंसर होने पर शुरुआती लक्षण ऐसे होते हैं। जैसे बवासीर में होते हैं। मरीज का परीक्षण करके आसानी से इन बीमारियों का पता चल सकता है, उपयुक्त इलाज भी हो सकता है। अगर मरीज बिना योग चिकित्सक से परीक्षण कराए पाइल्स समझकर इसका इलाज करवाता है, तो असल बीमारी का पता चलने में काफी समय लग जाता है और इलाज मुश्किल हो जाता है। इसलिए जरूरी है कि जब भी इस प्रकार के लक्षण हो तो किसी योग चिकित्सक से परामर्श लिया जाए और दुष्प्रचारों से बचा जाए। उन्होंने कहा कि सर्जरी विभाग द्वारा पहल करके पाइस जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य इसी विषय में जागरूकता पैदा करना हेल्थी लाइफस्टाइल प्रमोट करना है। जिससे पाइल्स की समस्या से बचा जा सके। लक्षण आने पर बजाएं देशी इलाज या इंटरनेट से इलाज करने से किसी योग चिकित्सक से परामर्श किया जाए। इस कार्यक्रम में जनसाधारण से कोई भी व्यक्त सम्मिलित होकर पाइल्स से बचाव व इलाज के बारे में पूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकता है। http://www.satyodaya.com

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