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शहर सियासत

LOKSABHA ELECTION LIVE: बच्चे, बूढ़े और जवान सब निकले करने मतदान, देखें तस्वीरें…

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वोट देने के लिए लगी मतदाताओं की भीड़

लखनऊ। नवाबों के शहर में आज लोकतंत्र का महापर्व मनाया जा रहा है। मतदान के पर्व को लेकर युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। चिलचिलाती धुप के बावजूद भी शहरवासी अपने घरों से बाहर निकल कर मतदान केंद्र पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं।

पहली बार वोट दे रहे 18 साल के युवा से लेकर योगानंद बालिका इंटर कॉलेज पोलिंग स्टेशन पर अपना वोट डालने वाली 92 साल की 92 वर्षीय कलारानी के मन में एक ही भाव है और वो है देशप्रेम का भाव।

कई वोटरों ने मतदान केन्द्रों पर अव्यवस्थाओं की शिकायत की, इसके बावजूद भी बेहतर राष्ट्र निर्माण की जिद्द के कारण सभी लोग अपना मत डाल रहे हैं।किसी मतदान केंद्र पर शादी के पहले पहुंचा दूल्हा आकर्षण का केंद्र बना तो कहीं पहली बार वोट कर फुले न समा रहे युवा।

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बताते चलें कि बताते चलें कि लखनऊ में सर्वाधिक 20,38,725 मतदाता हैं। वहीं धौरहरा में सबसे कम 16,44,156 मतदाता हैं। इसके साथ ही कुल 182 प्रत्याशियों में सर्वाधिक अमेठी में 27 और सबसे कम बाँदा में 8 प्रत्याशी मैदान में हैं। साल 2014 में इन सीटों पर 56.92% मतदान रहा था। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 1361 डिजिटल कैमरे, 1521 वीडियो कैमरे, 2778 वेब कास्टिंग लगाए गए हैं।http://www.satyodaya.com

लखनऊ लाइव

भाजपा एक साल पूरा होने पर 30 मई को वाहवाही लूटेगी: अखिलेश यादव

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अखिलेश यादव

कोरोना महामारी से मौतों के बीच मनेगा जश्न

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि भाजपा 30 मई को केन्द्र सरकार का एक साल पूरा होने पर अपनी उपलब्धियों का प्रचार कर वाहवाही लूटने की तैयारी में जुट गई है। देश-प्रदेश में इसके लिए भव्य आयोजन होंगे। उन्होंने कहा कि यह असमय जश्न तब मनेगा जब एक ओर कोरोना महामारी से मौतें हो रही हैं और भूखे प्यासे श्रमिक भटक रहे हैं।

अखिलेश ने बताया कि भाजपा सरकार अपने झूठ और थोथे वादों से जनता को कब तक भटकाएगी? खुद 10 पैकेट बांटते हुए फोटों छपवाने वाले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बताया कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने 24 करोड़ से ज्यादा लोगों को राशन दिया तो केन्द्रीय वित्तमंत्री ने 80 करोड़ परिवारों को मदद का दावा कर दिया। अब ये आंकड़े सच्चे हैं तो झूठा कौन? क्या भूख से बेहाल श्रमिक, नंगे पैर तपती धरती पर दौड़ती महिलाएं और बच्चे?

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उन्होंने कहा कि पूरा देश बीमारी से त्रस्त है। हर तरफ मौत का मंजर दिख रहा है। सड़क पर, ट्रेन में, शहर में, गांव में हर जगह हालात एक जैसे हैं। समाज का हर तबका परेशान है, निराश है। गरीब भुखमरी का शिकार हो चुका है। मजदूर बेरोजगार हो गया है। देश पूरी तरह से ठप पड़ा है। अर्थव्यवस्था का तो पता ही नहीं है कहां है?

पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश में अपराधियों का जंगलराज चल रहा है। सत्ता की हनक में निर्दोषों का उत्पीडन हो रहा है। रोटी-रोजगार के धंधे बंद हैं। किसान, नौजवान और व्यापारी सब हताशा में है। उनकी परेशानियों पर भाजपा को जश्न मनाते कोई लोकलाज नहीं है। अखिलेश ने कहा कि उन्हें जनता के सुख दुख से मतलब नहीं है भाजपा को तो बस सत्ता के सिंहासन से ही वास्ता है। देश को आगे ले जाने वाले और विकास करने वाले तमाम संस्थान बर्बाद हो चुके हैं अब सवाल यह उठता है, क्या भाजपा देश की बर्बादी का जश्न मना रही हैं? देश की जनता ऐसे लोगों को कभी माफ नहीं करेगी और समय आने पर इनका हिसाब किताब लेगी। http://www.satyodaya.com

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किसानों की बदहाल स्थिति के लिए भाजपा की डबल इंजन सरकारें जिम्मेदार- अखिलेश

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किसानों को वास्तविक राहत देने की जगह हवाई रोजगार पैदा करने पर जोर दे रही सरकार

लखनऊ। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है, कि वो समझते है कि कोरोना की महामारी की आड़ में अन्य बुनियादी गम्भीर समस्याओं की अनदेखी की जा सकती है। जहां एक तरफ विस्थापित श्रमिकों और बेरोजगार नौजवानों के सामने भविष्य की चिंता है। वहीं किसानों की बदहाली ने खेती के सामने संकट पैदा कर दिया है। इस संकट के लिए भाजपा की डबल इंजन की सरकारें जिम्मेदार है। कोरोना संकट और लॉकडाउन की मार सर्वाधिक किसानों पर पड़ी है। टीम इलेवन और भाजपा मंत्रिमण्डल की बैठकों में किसानों को वास्तविक राहत देने के उपायों पर सोच विचार की जगह हवाई रोजगार पैदा करने पर ही जोर दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री किसानों की समस्याओं पर गौर करना नहीं चाहते हैं। कारण स्पष्ट है कि भाजपा का किसानों के हितों से कभी कोई लेना-देना नहीं रहा है। सपा ने किसानों की परेशानियों से सम्बन्धित मुद्दों को कई बार उठाया लेकिन भाजपा सरकार तो अपने कानों पर हाथ धरे बैठी है। सपा किसान का अन्नदाता के रूप में सम्मान करती है और इसीलिए सपा सरकार में बजट का 75 प्रतिशत भाग खेती-गांव के लिए रखा गया था।

भाजपा ने नीति निर्माण में कृषि को उपेक्षित रखा है जबकि कृषि क्षेत्र 50 प्रतिशत आबादी को रोजगार देता है। कोरोना की महामारी के दौर में हुए व्यापक पलायन के शिकार लोगों को रोटी-रोजी की गांवों में ही उपलब्धता है। विडम्बना है कि लाकडाउन उस समय हुआ जब रबी की फसल तैयार थी। बे-मौसम बरसात ने किसानों को तबाह किया लेकिन बाजार बंदी से उसकी फल-सब्जियों की मांग ही नहीं रही। दूध, मछली, आम और फूल का व्यवसाय चौपट हो गया। किसानों ने मजबूरी में खेतों से कई फसलें उजाड़ दीं।

सरकारी दावों के बावजूद गेहूं खरीद के क्रय केन्द्रों का कोई अता-पता नहीं चला, जिससे किसान को रूपया 1925 प्रति क्वींटल न्यूनतम समर्थन मूल्य भी नसीब नहीं हुआ। किसान का माल औने-पौने दाम पर बिचैलिए लूट ले गए। उत्तर प्रदेश में अभी तक 20 हजार करोड़ रूपए से ज्यादा गन्ना किसानों का भुगतान बकाया है। चीनी मिलें बंद हो रही है यद्यपि गन्ना खेतों में खड़ा है। भाजपा सरकार गन्ना किसानों को राहत देने के बजाय मिल मालिकों के कथित घाटे को लेकर ज्यादा चिन्तित है।

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सरकार ने भुगतान कराने के बजाय किसानों को तीन बोरी चीनी खरीदने की सलाह दी है। चीनी की बोरी 3150 रूपए की होगी जिस पर 157 रूपए जीएसटी भी अदा करना होगा। किसानों के प्रति यह घोर अन्याय है। इन दिनों खरीफ की बुवाई का समय है। धान रोपने की तैयारी किसानों ने शुरू कर दी हैं। लेकिन भाजपा सरकार की तरफ से कोई राहत-सुविधा नहीं मिल रही है। गुणवत्ता वाला धान का बीज उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। हाईब्रीड धान का बीज 300 रूपया प्रति किलों से ज्यादा में बिक रहा है। मंडियों में किसानों की लूट का बाजार गर्म है। सम्बन्धित अफसर जानकर भी अनजान बने हुए है। ऐसे समय में आवश्यकता इस बात की है कि किसानों को आर्थिक आजादी मिले। सपा की मांग है कि सरकार किसानों की गरिमा को गिरवी न होने दे।

किसान अन्नदाता है, भिखारी नहीं। लाकडाउन पीरियड में फसलों के दाम गिरने से किसानों की बदहाली में बहुत इजाफा हुआ है। भाजपा सरकार अब उस पर रहम करे और बीज, खाद, उपकरण, कीटनाशक आदि सस्ते दाम पर उपलब्ध कराएं। भण्डारण, संरक्षण की उचित व्यवस्था हो। वेयर हाउस अपर्याप्त हैं उससे किसान की काफी फसल बर्बाद हो जाती है। ब्याज पर कर्ज की व्यवस्था समाप्त हो। किसानों को तत्काल कार्यपूंजी देने का इंतजाम हो। 5 एकड़ से कम जोत वाले किसानों पर भारी कर्ज हो गया है उन्हें और कर्ज नहीं नगद आर्थिक मदद की जाए। इस समय खेतों में सब्जियों, फलों और फूलों की फसल सड़ गयी है।

मण्डियों में लगभग बंदी है। किसानों की जेबें खाली है। उन्हें हजार दो हजार रूपया महीना देना मजाक है। कृषि का निर्यात 2.6 लाख करोड़ ही है। अगर खेत पर सरकार द्वारा आर्थिक मदद नहीं की गई तो, न सिर्फ किसान आत्महत्या के लिए मजबूर होगा बल्कि भारत में अन्न संकट के कारण भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो जायेगी। इस स्थिति की जिम्मेदारी भाजपा सरकार की किसान विरोधी नीतियों को ही होगी।http://www.satyodaya.com

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कोटा में जब बच्चे परेशान थे तो उनकी याद क्यों नहीं आई- डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में दूसरे राज्यों से आ रहे प्रवासी मजदूरों को बस मुहैया कराने को लेकर यूपी सरकार और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर बुधवार को भी जारी है। उपमुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा ने कहा कि पंजाब और राजस्थान में प्रवासियों को बसें क्यों नहीं उपलब्ध कराई जा रही हैं। शर्मा ने कांग्रेस पर मजदूरों की वापसी को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इसके अतिरिक्त कोटा में जब बच्चे परेशान हो रहे थे तब राजस्थान सरकार को उनकी याद क्यों नहीं आयी। उस समय 630 बसें योगी सरकार ने राजस्थान भेजकर बच्चों को मंगवाने का काम किया था।

डॉ दिनेश शर्मा ने लोकभवन में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान यह बातें कही। डिप्टी सीएम ने कहा- कांग्रेस की महासचिव ने एक बसों की सूची प्रस्तुत की थी। कांग्रेस की सूची में 460 बसें फर्जी निकली जिनका फ़िटनेस भी नहीं था। इसके अलावा 98 एम्बुलेंस, ऑटो, बाइक 68 वाहनों के कागज ही नहीं था। कांग्रेस ने जो सूची दी थी उसमें 460 बसे फर्जी हैं और उसमें भी 297 कबाड़ की हालत में हैं। 297 बसों की कोई फिटनेस नहीं है। इनमें 98 थ्री व्हीलर कार और एंबुलेंस हैं जिनके डिटेल दिए गए हैं।

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उत्तर प्रदेश में श्रमिक ट्रेनों के पहुंचने का आंकड़ा 1000 पार कर गया है। देश में सबसे ज़्यादा ट्रेनें मंगाने वाला राज्य यूपी बन गया है। अब तक इन एक हज़ार ट्रेनों से 16 लाख प्रवासी कामगार श्रमिक पहुंचे उत्तर प्रदेश 27 हज़ार बसों के साथ यूपी सरकार पहले ही दिन से जुटी है। लोगों की सेवा में प्रवासी कामगारों व श्रमिक भाइयों की सकुशल वापसी के लिए यूपी सरकार अब तक 1000 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से लगभग 16 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित तरीके से वापस ला चुकी है।

राज्य परिवहन की 12 बसों से भी छह लाख से ज्यादा प्रवासी श्रमिक व कामगार घरों तक सुरक्षित व सम्मानजनक तरीके से पहुंचाए जा चुके हैं। प्रदेश में हर जिलाधिकारी को भी अलग से दो दो सौ बसें यानी कुल 15,000 बसें दी गई हैं।http://www.satyodaya.com

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June 2, 2020, 5:45 pm
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