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संस्कृति

क्रिसमस के बॉक्सिंग डे का टिन के डिब्बे से है सम्बन्ध, आखिर बॉक्सिंग डे पर क्यों खेला जाता है क्रिकेट…

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क्रिकेट के बॉक्सिंग टेस्ट मैच का मुक्केबाजी से है सम्बन्ध…

‘बॉक्सिंग डे’, सुनकर ऐसा प्रतीत होता मानो लोग इसे मुक्केबाजी की शुरुआत के तौर पर मनाते हैं।पर इस ‘बॉक्सिंग’ का लेना-देना मुक्केबाजी से नहीं हैं बल्कि इस उत्पत्ति हुई है बॉक्स यानी कि डिब्बा। रोमन काल से शुरू हुई इस परम्परा का उद्देश्य लोगों में खुशियां बांटना है।सार्वजानिक अवकाश  वाला ये त्यौहार ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैण्ड, कनाडा, ब्रिटेन तथा कुछ अन्य राष्ट्रमंडल देशों में मनाया जाता है। क्रिसमस के दुसरे दिन मनाए जाने वाले इस त्यौहार को लोग कई अलग-अलग नामों से जानते हैं। आयरलैंड में इसे सेंट स्टीफन डे या रेन डे आयरिश के रूप में मनाया जाता है। वहीं दक्षिण अफ्रीका में इसे 1994 में सद्भावना दिवस का नाम दिया गया था।

गरीबों में अन्न व धन बांटने का रिवाज हमेशा से ही रहा है।इंग्लैंड में व्यापारी वर्ग बड़े दिन के बाद पहले कार्यडे पर पैसों या भेंटों से भरे क्रिसमस डिब्बे इकट्ठे करते हैं। ये डिब्बे सारे साल में किये गए अच्छे कामों का प्रतीक होता हैं। धनाड्य जमींदारों अपने नौकरों को 26 दिसम्बर का पूरा अवकाश देते थे ताकि वे (नौकर) अपने परिवारों से मिल आयें। इसके साथ ही वो अपने यह काम करने वाले लोगों को जाते वक्त एक डिब्बा भेंट के रूप में दिया करते थे। इन डिब्बों में वस्त्र,पैसे और कभी-कभार बचा हुआ खाना होता था।

मॉडर्न जमाने के ‘थैंक्सगिविंग डे’ को ‘बॉक्सिंग दिवस’ का प्रारूप माना जा सकता है।’बॉक्सिंग दिवस’ एक धर्मनिरपेक्ष अवकाश है जो 26 दिसम्बर को मनाया जाता है, अर्थात बड़े दिन के अगले दिन जो कि सेंट स्टीफेन डे भी है। सेंट स्टीफेंस की दावत के लिए चर्च के बाहर बड़े टिन के डब्बे रखे जाते थें, जिनका उद्देश्य गरीब लोगों का पेट भर कर उनके चेहरे पर मुस्कान लाई जा सके।वहीं दूसरी ओर ‘बॉक्सिंग डे’ के एक हफ्ते पूर्व से ही बाजार सजने लगते हैं। लोग भेंट देने के लिए वस्तुओं की खरीददारी में लग जाते हैं।’बॉक्सिंग डे के मौके पर व्यापार में भारी उछाल देखने को मिलता है।

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बॉक्सिंग डे से जुड़ी एक और दिलचस्प बात हैं कि यदि बॉक्सिंग डे शनिवार को पड़ जाये तो उसके बदले में आने वाले सोमवार को अवकाश दिया जाता है। परन्तु यदि बॉक्सिंग डे रविवार को पड़ जाए – अर्थात पूर्व शनिवार को बड़े दिन का अवकाश हो तो क्रिसमस की सुनिश्चित छुट्टी सोमवार 27 दिसम्बर को होती है और बॉक्सिंग डे का सुनिश्चित अवकाश मंगलवार 28 दिसम्बर को होता है।

‘बॉक्सिंग डे’ का आखिर कैसे है क्रिकेट से लेना-देना 

प्राचीन ग्रामीण समारोहों में बॉक्सिंग डे का संबंध खेल से होने के कारण यह जनधारणा बनी कि यह डे बॉक्सिंग के खेल से संबद्ध है हालांकि ये सच नहीं था। कॉमनवेल्थ देशों जैसे कि घाना, यूगांडा, मलावी, जैम्बिय, तंजानिया आदि में इस दिन पुरस्कार वाली लड़ाई प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं। यही प्रथा गयाना (वेस्टइंडीज) व इटली में भी प्रचलित है।

बदलते समय के साथ दुनिया भर में क्रिकेट प्रेमियों की तादाद बढ़ गयी। जिसके बाद 26 दिसम्बर को मुख्य तौर पर टेस्ट मैच खेला जाने लगा, और इसे ‘बॉक्सिंग टेस्ट मैच’ कहा जाता है। साल 1975 में ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न स्टेडियम में मैच खेला जा रहा था। उस दिन 85,596 लोग शामिल हुए थें। माना जाता है कि इस मैच के बाद से लोग क्रिकेट को व्यवसाय के रूप देखने लगे। ये मैच ‘बॉक्सिंग डे’ और क्रिकेट मैच की संयुक्त सफलता का सबसे पहला और बड़ा उदहारण था।इससे ही प्रेरणा लेते हुए विश्व भर में ‘बॉक्सिंग’ टेस्ट मैच की शुरुआत हुई।वहीं आज भी ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में हर वर्ष 26 दिसम्बर को ‘बॉक्सिंग टेस्ट मैच’ खेला जाता है।

बताते चलें कि बॉक्सिंग डे के इंटरनेट प्रारूप को “साइबर बॉक्सिंग दिवस” पुकारा जाता है। सन 2008 में इंग्लैंड में यह डे सबसे बड़े इंटरनेट शॉपिंग डे के रूप में उभरा था। ‘बॉक्सिंग डे’ अपने प्रयासों के जरिए दूसरों के चेहरों पर खुशियां लाने का मौका है। http://www.satyodaya.com

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अयोध्या विवाद मामले में आया नया मोड़, रामजन्मभूमि पर बौधिष्ठों ने ठोंका दावा

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प्राचीन मूर्तियों, प्रतीक चिन्हों को सार्वजनिक करने की मांग

लखनऊ। अयोध्या विवाद मामले में नया मोड़ आया है। रामजन्मभूमि परिसर पर बौद्धों ने ठोका है। बिहार से आए दो वृद्ध बौधिष्ठों ने राममंदिर के समतलीकरण के दौरान मिले प्रतीक चिन्हों को सावर्जनिक करने की मांग करते हुए रामजन्मभूमि पर अपना दावा ठोका है। जिसके लिए बिहार से अयोध्या पहुंचे अखिल भारतीय आजाद बौद्घ धम्म सेना संगठन के भंते बुद्घशरण केसरिया ने सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर में आमरण अनशन शुरू कर दिया। दोनों बौद्धों की मांग है कि प्राचीन मूर्तियों, प्रतीक चिन्हों को सार्वजनिक करे।

प्राचीन मूर्तियों को सार्वजनिक करने की मांग

उनका कहना है कि अयोध्या में बन रहे राममंदिर निर्माण हेतु चल रहे। समतलीकरण के दौरान बुद्घ संस्कृति से जुड़ी बहुत सारी बुद्घ मूर्तियां, अशोक धम्म चक्र, कमल का फूल एवं अन्य अवशेष मिलने से यह स्पष्ट हो गया है कि वर्तमान अयोध्या बोधिसत्व लोमश ऋषि की बुद्घ नगरी साकेत है। उन्होंने कहा कि अयोध्या मुद्दे पर हिंदू-मुस्लिम एवं बौद्घ तीनों पक्षों ने सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की थी। लेकिन सारे सबूतों को दरकिनार कर एक तरफा फैसला हिंदुओं के पक्ष में राममंदिर के लिए दे दिया गया।

इसके लिए उनके द्वारा राष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट, अध्यक्ष राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग, मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सहित जिले के डीएम सहित अन्य अधिकारियों को पत्र भेजकर अपनी मांग मुखर की है।रामजन्मभूमि पर इससे पूर्व भी बौद्घ समाज दावा करता रहा है।

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2018 में बौद्ध समुदाय की तरफ से SC में याचिका

आपको बता दें, साल 6 मार्च 2018 अयोध्या के ही रहने वाले बौद्ध विनीत मौर्य ने बौद्ध समुदाय की तरफ से सुप्रीस कोर्ट में याचिका दायर की थी। बौद्ध विनीत ने अपनी याचिका में कहा था कि बाबरी मस्जिद बनाए जाने से पहले वहां बौद्ध समुदाय का स्मारक था। बौद्ध समुदाय ने दलील दी थी कि भारतीय पुरातत्व विभाग ने विवादित भूमि पर चार बार खुदाई करवाई है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच के आदेश के बाद 2002-2003 में वहां अंतिम बार खुदाई हुई थी। भारतीय पुरातत्व विभाग ने उस जगह पर खुदाई में बौद्ध धर्म से जुड़े स्तूप, दीवारें और खंभे भी पाए थे। उनका दावा था कि विवादित भूमि पर बौद्ध विहार था। आगे उन्होंने कहा वह बौद्ध समुदाय के सदस्य हैं। वह अयोध्या में बौद्ध धर्म के अनुसार जीवन यापन कर रहे हैं। बौद्ध धर्म के लोगों के साथ न्याय हो, इसलिए उन्होंने याचिका दायर की है। http://www.satyodaya.com

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पहले श्रावण सोमवार को ऊँ नम: शिवाय से गूंजी मनकामेश्‍वर मंदिर, भक्तों की लगी कतार

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लखनऊ। बाबा भोले को प्रिय मास सावन का आज सोमवार से आरंभ हो गया। सावन की पहली सोमवारी आज है। कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए इस बार श्रावणी मेले का आयोजन नहीं किया गया है। भक्त घर बैठे बाबा भोलेनाथ का वर्चुअल दर्शन कर रहे हैं। लेकिन इस अद्भुत संयोग के साथ भोलेनाथ के सबसे प्रिय दिन सावन माह के पहले सोमवार को लेकर मंदिरों में शिवजी की आराधना शुरू हो गई। डालीगंज के मनकामेश्वर मंदिर में सुबह तीन बजे ही बाबा के श्रृंगार के बाद भक्तों के ल‌िए कपाट खोल द‌िए गए।

इस बार कोरोना संक्रमण के चलते श्रद्धालु उचित शारीरिक दूरी का ध्यान रखते हुए ही भगवान के दरबार में प्रवेश और दर्शन कर पाएंगे। उत्तर प्रदेश सरकार ने मंदिरों को खोलने को लेकर कोई गाइड लाइन के अनुसार मंदिर के प्रवेश द्वार पर श्रद्धालुओं को थर्मल स्कैनर उपलब्ध होंगे, साथ ही सैनिटाइजर की भी व्यवस्था की गई है । इसके बाद ही मंदिरों में शिव पूजा व अभिषेक होंगे, जिन्हें पुजारी ही संपन्न करेंगे। सामूहिक शिवलिंग निर्माण नहीं होंगे, भक्त अपने घरों में शिवलिंग बना कर पूजा कर रहे है। लखनऊ के इस मंद‌िर की काफी मान्यता है।

आरती में ह‌िस्सा लेने के ल‌िए मंद‌िर के बाहर भोर से ही भक्तों की लाइन लगनी शुरू हो गई थी। सुबह आने वाले भक्तों को मुफ्त में गंगाजल भी बांटा गया। साध्वी देव्यागिर‌ि ने भोले बाबा की आरती की साथ ही भक्तों ने भी बोल बम के जयकारे लगयाए। फल, पुष्प, बिल्व पत्र, गंगाजल, शहद, घृत, दूध, मिष्ठान्न, भांग, धतूरा हाथों में लिए भक्तों की कतारें सुबह से ही मंदिर में उमड़ीं।

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इस मंदिर का नाम मनकामेश्वर क्यों पड़ा

माना जाता है क‌ि लखनऊ के इस मंदिर में जो भी मुराद मांगी जाती है, भोलेबाबा उसे पूरा करते हैं इसल‌िए इसका नाम मनकामेश्वर पड़ा। डालीगंज में गोमती के किनारे बना ये मंदिर लखनऊ के सबसे प्राचीन और चर्चित शिवालयों में से है। बताते हैं कि लखनऊ में गोमती नदी के तट पर बने मनकामेश्वर मंदिर में तो महादेव अपने भक्‍तों की सभी इच्‍छाएं पूरी कर देते हैं। डालीगंज में गोमती नदी के बाएं तट पर शिव-पार्वती का ये मंदिर बहुत सिद्ध माना जाता है। मंदिर के महंत केशवगिरी के ब्रह्मलीन होने के बाद देव्यागिरी को यहां का महंत बनाया गया।

कहा जाता है कि माता सीता को वनवास छोड़ने के बाद लखनपुर के राजा लक्ष्मण ने यहीं रुककर भगवान शंकर की अराधना की थी, जिससे उनके मन को बहुत शांति मिली थी। उसके बाद कालांतर में मनकामेश्वर मंदिर की स्थापना कर दी गई। सावन के हर सोमवार को यहां भक्तों की भारी भीड़ रहती है। लेकिन इस साल भक्तों का कतार कम देखने को मिला।मंदिर में काले रंग का शिवलिंग है जिस पर चांदी का छत्र है। मंदिर के पूरे फर्श में चांदी के सिक्के लगे होने से यह और भी आकर्षक लगता है। http://www.satyodaya.com
 

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सावन का पवित्र महीना आज से शुरू, जानिये व्रत की पूजा विधि, मुहूर्त और मंत्र

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आज से 6 जुलाई भगवान शिव के प्रिय मास सावन का प्रारंभ हो गया है। इसमें सबसे अच्छी बात ये है कि आज सावन के पहले दिन ही सावन का पहला सोमवार व्रत है। सावन मास में पांच सोमवार पड़ रहे हैं। सावन मास में पांच सावन सोमवार व्रत का विशेष महत्व माना गया है। सावन सोमवार का व्रत रखने वालों के लिए यह उत्तम है। संतान प्राप्ति, उत्तम स्वास्थ्य और मनोवांछित जीवन साथी के लिए यह व्रत किया जाता है। भगवान शिव की आराधना से वैवाहिक जीवन के दोषों तथा अकाल मृत्यु से मुक्ति मिलती है। आइए जानते हैं कि इस सावन के सोमवार किस तिथि को हैं, इस दिन भगवान शिव की पूजा कैसे करें, किन मंत्रों का जाप करें और व्रत की विधि क्या है?

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सावन सोमवार का व्रत रखने वाले इस मुहूर्त में करें पूजा

सावन के महीने की शुरुआत कृष्ण पक्ष प्रतिपदा कल यानी 5 जुलाई दिन रविवार को ही सुबह 10.15 से प्रारंभ हो गई थी. लेकिन उदया तिथि के कारण 6 जुलाई, आज सोमवार को पहला दिन माना गया है और ऐसे में सोमवार का व्रत रखने वाले सुबह 9.25 तक अपनी पूजा प्रारम्भ कर दें.

इस विधि से करें पूरे सावन पूजा

– रोज सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद शिवलिंग पर जल चढ़ाएं. पंचामृत से अभिषेक करें.

– मंत्र ऊँ नम: शिवाय, ऊँ महेश्वराय नम:, ऊँ सांब सदाशिवाय नम:, ऊँ रुद्राय नम: आदि मंत्रों का जाप करें.

– चंदन, फूल, प्रसाद चढ़ाएं. धूप और दीप जलाएं. शिवजी को बिल्वपत्र, धतूरा, चावल अर्पित करें.

– भगवान को प्रसाद के रूप में फल या दूध से बनी मिठाई अर्पित करें. धूप, दीप, कर्पूर जलाकर आरती करें. शिवजी का ध्यान करते हुए आधी परिक्रमा करें. भक्तों को प्रसाद वितरित करें.

पूजा के बाद पढे़ं ये मंत्र

भगवान शिव से क्षमा याचना मंत्र है। पूजा के बाद भगवान शिव के सामने ये मंत्र पढ़ कर क्षमा मांग लें यदि पूजा में कोई भूल हुई हो तो क्षमायाचना जरुर करे।

आवाहनं न जानामि, न जानामि तवार्चनम।

पूजाश्चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वर।।

घर पर ही कर सकते हैं शिवजी का अभिषेक

कोरोना वायरस को लेकर भिड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से मनाही है। जो लोग शिवालय नहीं जा सकते हैं। वे अपने घर में ही शिवलिंग का अभिषेक और पूजन कर सकते हैं। जिसके घर पर शिवलिंग न हो। वह आंगन में लगे किसी पौधे को शिवलिंग मानकर या मिट्टी का शिवलिंग बनाकर उसका पूजन कर सकते हैं। मिट्टी से शिवलिंग बनाकर पूजन करने को ही पार्थिव शिवपूजन कहा जाता है। ये पूजा शुभ फल देने वाली मानी जाती है।http://satyodaya.com

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