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संस्कृति

दुख, दरिद्रता और पापों से मुक्ति देकर ज्ञान, ऊर्जा और सुख-समृद्धि की ओर ले जाती है बुद्ध पूर्णिमा…

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बुद्ध पूर्णिमा एक बड़ा त्योहार है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वैशाख माह को पवित्र माह माना जाता है। वैशाख शुक्ल पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा या पीपल पूर्णिमा कहा जाता है जिसे हिन्दू और बौद्ध दोनों धर्म के अनुयायी बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं। कहते हैं कि इसी दिन बौद्ध धर्म के संस्थापक महात्मा बुद्ध ने जन्म लिया था। वहीं बुद्ध को श्री हरि विष्णु का 9वां अवतार माना जाता है, इसलिए हिन्दुओं के लिए भी इस पूर्णिमा का विशेष महत्व है। गौतम बुद्ध के जन्मोत्सव के कारण बुद्ध पूर्णिमा को बुद्ध जयंती और ‘वेसाक’ उत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन उनको बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई थी और यही उनका निर्वाण दिवस भी है। माना जाता है कि इस तिथि पर जल और वातावरण में विशेष ऊर्जा आ जाती है। इस दिन चंद्रमा पूर्णिमा तिथि पर पृथ्वी और जल तत्व को पूर्ण रूप से प्रभावित करता है। चन्द्रमा इस तिथि के स्वामी होते हैं, अतः इस दिन हर तरह की मानसिक समस्याओं से मुक्ति मिल सकती है।

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कैसे मनाते हैं बौद्ध धर्म के लोग बुद्ध पूर्णिमा?

भगवान बुद्ध ही बौद्ध धर्म के संस्थापक हैं। यह बुद्ध अनुयायियों के लिए बहुत बड़ा त्यौहार है। इस दिन अनेक प्रकार के समारोह आयोजित किए गए हैं। अलग-अलग देशों में वहां के रीति- रिवाजों और संस्कृति के अनुसार कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। श्रीलंका के लोग इस दिन को ‘वेसाक’ उत्सव के रूप में मनाते हैं इस दिन बौद्ध घरों में दीपक जलाए जाते हैं और फूलों से घरों को सजाया जाता है। दुनियाभर से बौद्ध धर्म के अनुयायी बोधगया आते हैं और प्रार्थनाएं करते हैं। इस दिन बौद्ध धर्म के धर्मग्रंथों का निरंतर पाठ किया जाता है। बोधिवृक्ष की पूजा की जाती है। उसकी शाखाओं पर हार और रंगीन पताकाएं सजाई जाती हैं। जड़ों में दूध और सुगंधित पानी डाला जाता है। वृक्ष के आसपास दीपक जलाए जाते हैं।


बुद्ध पूर्णिमा का विशेष महत्व –

इस दिन को दैवीयता का दिन माना जाता है।  इसी दिन भगवान बुद्ध का जन्म भी हुआ था।  इस दिन ध्यान दान और स्नान विशेष लाभकारी होता है। इस दिन ब्रह्म देव ने काले और सफ़ेद तिलों का निर्माण भी किया था। अतः इस दिन तिलों का प्रयोग जरूर करना चाहिए।

बुद्ध पूर्णिमा से जुड़ी मान्यताएं

1- माना जाता है कि वैशाख की पूर्णिमा को ही भगवान विष्णु ने अपने 9वे अवतार के रूप में जन्म लिया था।

2- मान्यता है कि भगवान कृष्ण के बचपन के दोस्त सुदामा वैशाख पूर्णिमा के दिन ही उनसे मिलने पहुंचे थे।

 3- इसी दौरान जब दोनों दोस्त साथ बैठे तब कृष्ण ने सुदामा को सत्यविनायक व्रत का विधान बताया था। सुदामा ने इस व्रत को विधिवत किया और उनकी गरीबी नष्ट हो गई।

 4- इस दिन धर्मराज की पूजा करने की भी मान्यता है। कहते हैं कि सत्यविनायक व्रत से धर्मराज खुश होते हैं. माना जाता है कि धर्मराज मृत्यु के देवता हैं इसलिए उनके प्रसन्न् होने से अकाल मौत का डर कम हो जाता है।

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सुखी जीवन के लिए बुद्ध के सूत्र

वैशाख पूर्णिमा भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़ी तीन अहम बातों – बुद्ध का जन्म,  बुद्ध को ज्ञान प्राप्ति एवं बुद्ध का निर्वाण के कारण भी विशेष तिथि मानी जाती है। गौतम बुद्ध ने चार सूत्र दिए उन्हें ‘चार आर्य सत्य’ के नाम से जाना जाता है। पहला दुःख है, दूसरा दुःख का कारण, तीसरा दुःख का निदान और चौथा मार्ग वह है, जिससे दुःख का निवारण होता है। भगवान बुद्ध का अष्टांगिक मार्ग वह माध्यम है, जो दुःख के निदान का मार्ग बताता है। उनका यह अष्टांगिक मार्ग ज्ञान, संकल्प, वचन, कर्म, आजीव, व्यायाम, स्मृति और समाधि के सन्दर्भ में सम्यकता से साक्षात्कार कराता है।

दु:खों के कारण बुद्ध ने बताया ये वजह

गौतम बुद्ध ने मनुष्य के बहुत से दु:खों का कारण उसके स्वयं का अज्ञान और मिथ्या दृष्टि बताया है। महात्मा बुद्ध ने पहली बार सारनाथ में प्रवचन दिया था। उनका प्रथम उपदेश ‘धर्मचक्र प्रवर्तन’ के नाम से जाना जाता है, जो उन्होंने आषाढ़ पूर्णिमा के दिन पांच भिक्षुओं को दिया था।

भेदभाव रहित होकर हर वर्ग के लोगों ने महात्मा बुद्ध की शरण ली और उनके उपदेशों का अनुसरण किया। कुछ ही दिनों में पूरे भारत में ‘बुद्धं शरणं गच्छामि, धम्मं शरणं गच्छामि, संघ शरणम् गच्छामि’ का जयघोष गूंजने लगा। उन्होंने कहा कि केवल मांस खाने वाला ही अपवित्र नहीं होता बल्कि क्रोध, व्यभिचार, छल, कपट, ईर्ष्या और दूसरों की निंदा भी इंसान को अपवित्र बनाती है। मन की शुद्धता के लिए पवित्र जीवन बिताना जरूरी है।

-बुद्ध पूर्णिमा के दिन ना करे ये काम

बुद्ध पूर्णिमा के दिन मांस का सेवन ना करें।

 इस दिन घर में कलह करने से बचना चाहिए।

इस दिन किसी को अपशब्द कहने से बचें।

 इस दिन झूठ नहीं बोलना चाहिए।

बुद्ध पूर्णिमा के दिन कुशीनगर में लगता है विशाल मेला

बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर कुशीनगर के महापरिनिर्वाण मंदिर में एक महीने तक चलने वाले विशाल मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें देश विदेश के लाखों बौद्ध अनुयायी यहां पहुंचते हैं। वहीं आज के दिन बोधगया में जिस बोधिवृक्ष के नीचे भगवान बुद्ध को बुद्धत्व की प्राप्ति हुई थी इस वृक्ष की जड़ों में दूध और सुगंधित पानी का सिंचन करके पूजा की जाती है। इसी दिन भगवान बुद्ध की जयंती और निर्वाण दिवस भी बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है।

स्नान का विशेष महत्व

बुद्ध पूर्णिमा के दिन मंदिर में जाकर पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। आज के दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि आज के दिन गंगा स्नान करने से सभी पापो से मुक्ति मिल जाती है। http://www.satyodaya.com  

लाइफ स्टाइल

जानें कुछ ऐसे शब्दों का फुलफार्म जिसके वजह से आपको डेली ना होना पड़े शर्मिंदा

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प्रतीकात्मक चित्र

लखनऊ । हम लोग अक्सर अपने डेली लाइफ में बहुत सारे ऐसे शब्दों का प्रयोग करते है जिसका फुलफार्म हमको पता नही होता है । जैसे Wi-Fi, gsm, cdma, jpeg, ok, pnr इन सब शब्दों को हम अकसर बोलचाल में इस्तेमाल करते हैं । लेकिन बहुत लोगों को इसका पूरा मतलब नहीं पता होता है । जिससे कई बार हम सबको शर्मिंदगी भी उठानी पड़ सकती है । इसलिए हम आपको बता रहे हैं कुछ ऐसे कॉमन Abbreviations की फुलफॉर्म के बारे में ।

ifsc
indian financial system code- (इंडियन फाइनैंशल सिस्टम कोड)

gsm
Global system for mobile communication – (ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल कम्यूनिकेशन)

i.q.
intelligence quotient – (इंटेलिजेंस कोशंट)

jpeg
joint photographic expert group- (जॉइंट फटॉग्रफिक एक्सपर्ट ग्रुप)

wi-Fi
इस का फुल फॉर्म wi-Fi – (वायरलेस फिडलिटी)

led
light emitting diode- (लाइट एमिटिंग डायोड)

trp
television rating point – (टेलिविजन रेटिंग पॉइंट)

ufo
unidentifiable flying object – (अनआइडेंटिफिएबल फ्लाइंग ऑब्जेक्ट)

Lcd
liquid crystal display- (लिक्विड क्रिस्टल डिस्पले)

rip
rest in peace- (रेस्ट इन पीस)

PNR
passenger name record- (पैसेंजर नेम रिकॉर्ड)

gif
graphic interchange format- (ग्राफिक इंटरचेंज फॉर्मेट)

pdf
portable document format- (पोर्टेबल डॉक्युमेंट फॉर्मेट)

Ok
oll korrect- (ऑल करेक्ट)

cdma
code division multiple access- (कोड डिविज मल्टीपल एक्सेस)

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लखनऊ लाइव

देश से जैसे अंग्रेजों को भगाया वैसे ही सब मिलकर फिरकापरस्त ताकतों को भगाएंगे: हाजी आरिफ

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लखनऊ। बरकतों और रहमतों का महीना रमजान मुस्लिम समुदाय में बड़ी हर्षो उल्लास के साथ मनाया जाता है इस माह में मुसलमान सुबह फज्र की नमाज से लेकर शाम मगरिब के नमाज तक बिना कुछ खाए पिए ही रोजे से रहतें हैं ।अगर बात घंटों का किया जाए तो लगभग 17 घंटों के अंतराल पर बिना कुछ खान पान के रोजेदार अल्लाह की इबादत में लगे रहतें है। वहीं बीते  बृहस्पतिवार को आल इंडिया फलाहे मनिहार मूवमेंट संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष हाजी आरिफ शरीफ ने अमीना बाद स्थित आरके पैलेस में रोजे अफ्तार का इंतजाम किया। जहां सैकड़ों की संख्या में लोगों ने अफ्तार किया वहीं इस मौके पर संस्था के तमाम पदाधिकारी मौजूद रहे ।

आपको बता दें कि राष्ट्रीय अध्यक्ष हाजी आरिफ ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि रमजान के पवित्र महीना मुसलमानो के लिए रहमत और बरकत का महीना होता है। रमजान में ही कुरआन शरीफ हमारे बीच आया । ये रमजान का महीना सभी के लिए हिदायत का महीना है।

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आगे बताया कि मेरी संस्था सभी को जोड़ने का काम करती है । जिस तरह हमने अंग्रेजों को भारत से खदेड़ा है वैसे ही इस देश से जातिवाद को खड़ेंगे हमारा देश गंगा जमुनी तहजीब का मरकज है । इस देश के सभी समुदाय के लोग भाई चारे के साथ रहते है। लेकिन कुछ जातिवाद ताकते इस देश के लोगो को बांटने का काम कर रही है लेकिन ऐसा हम होने नही देंगे। http://www.satyodaya.com

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संस्कृति

जाने कैसे बंगाल की राजनीति में मुद्दा बन गए समाज सुधारक ईश्वरचंद्र विद्यासागर

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फाइल फोटो

लखनऊ । जाने- माने शिक्षाशास्त्री व समाज सुधारक ईश्वरचंद्र विद्यासागर ने कभी कल्पना नही की होगी की उनके दुनिया से जाने के 128 साल बाद वे अपने ही राज्य में चुनावी मुद्दा बन जाएंगे । पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में सातवें यानी अंतिम चरण के चुनाव से पहले बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो क दौरान हुए हंगामे और तोड़ फोड़ के बाद विद्यासागर रातों रात सबसे बड़ा मुद्दा बन जाएगा । इस हंगामे में कुछ लोगों ने कॉलेज स्ट्रीट इलाके में स्थित विद्यासागर कॉलेज में घुस कर न सिर्फ तोड़ फोड़ करते हैं बल्कि वहां रखी विद्यासागर की एक मूर्ति भी तोड़ देते हैं ।

कौन थे विद्यासागर


26 सितंबर 1820 को पश्चिम बंगाल के मेदनीपुर में एक ब्राह्मण परिवार में जन्में ईश्वरचंद्र आगे चलकर एक महान समाज सुधार, शिक्षा शास्त्री व स्वाधीनता सेनानी के तौर पर मशहूर हुए । उन्होंने स्त्री शिक्षा को बढ़ावा देने के साथ विधवा विवाह के खिलाफ भी आवाज उठाई थी । उनका मानना था की अंग्रेजी उर संस्कृत भाषा के ज्ञान के समंवय से ही भारतीय पाश्चात्य पारा,परम्पराओं का श्रेष्ठ ज्ञान हासिल किया जा सकता है । गांव के प्रारंभिक शिक्षा के बाद वे अपने पिता के साथ कलकत्ता आ गए थे । मेधावी होने की वजह से उनको विद्यासागर की उपाधि दी गई थी । अपने समाज सुधार अभियान के तहत ईश्वरचंद्र विद्यासागर ने स्थानीय भाषा और लड़कियों की शिक्षा के लिए स्कूलों की एक श्रृंखला के साथ कलकत्ता में मेट्रोपोलिटन कॉलेज की स्थापना की । इनको चलाने के लिए वे स्कूली बच्चों के लिए पुस्तकों की बिक्री से पैसा जुटाते थे ।


सभी के लिए थे समान


संस्कृत कॉलेज का प्रिंसिपल बनने के बाद उन्होंने सभी जाति के बच्चों के लिए कॉलेज के दरवाजे खोल दिए । जो उस दौर में बहुत बड़ी बात थी । उनके अथक प्रयासों की वजह से ही विधवा पुनर्विवाह कानून 1856 में पारित हुआ । वो कथनी के बजाय करनी पर विश्वाश करते थे । यही वजह थी की उन्होंने अपने बेटे की शादी एक विधवा से की थी । बहुपत्नी प्रथा और बाल विवाह के खिलाफ भी आवाज उठाई थी । उनका निधन 1891 में हुआ था । लेकिन अब वे अचानक राजनीति का मुद्दा बन गए हैं ।

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इस मुद्दे पर सत्योदय मीडिया ने लखनऊ के शिया कॉलेज के मीडिया डिपार्टमेंट के प्रोफेसर योगेन्द्र पांडे से बात की तो उन्होंने ने कहा कि यह एक समाज सुधारक व संघर्ष शील महापुरुष के साथ नहीं होना चाहिए ऐसा करने वालों को सजा मिलना चाहिए ।


लखनऊ विश्विद्यालय के लॉ डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डी. एन .एन. एस. यादव ने कहा की अगर ऐसे महान पुरषों का अपमान होगा जो अपने आप में एक इतिहास था । उन्होंने भारतीय समाज में व्याप्त भेदभाव तथा गैरबराबरी का जमकर विरोध किया अगर ऐसे लोगों का अपमान होगा तो देश बर्बादी के रास्ते पर जाएगा देश सुधरेगा नहीं क्योंकि लोगो में गलत मैसेज जाएगा। http://WWW.SATYODAYA.COM

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