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संस्कृति

Chaitra Navratri 2020: चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन, मां चंद्रघण्टा की पूजा विधि

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चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन माना जाता है। नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघण्टा की पूजा की जाती है। मां दुर्गा के 9 स्वरूपों में से मां चंद्रघण्टा उनकी तीसरी स्वरूप हैं। मां पार्वती के सुहागन स्वरूप को देवी चंद्रघण्टा के नाम से जाना जाता है। आज के दिन मां चंद्रघण्टा की पूजा करने से व्यक्ति के अंदर साहस, वीरता और विनम्रता जैसे गुणों का विकास होता है। आज हम आपको बताते हैं कि चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघण्टा की पूजा विधि क्या है, पूजा का मुहूर्त, मंत्र और महत्व क्या है?

मां चंद्रघण्टा पूजा मुहूर्त

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि का प्रारंभ 26 मार्च दिन गुरुवार की शाम 07 बजकर 53 मिनट से हो रहा है, जो 27 मार्च दिन शुक्रवार की रात 10 बजकर 12 मिनट तक है। ऐसे में मां चंद्रघण्टा की पूजा शुक्रवार की सुबह होगी।स्तुति मंत्र

या देवी सर्वभू‍तेषु मां चन्द्रघण्टा रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

प्रार्थना

पिण्डज प्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।

प्रसादं तनुते मह्यम् चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥

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मंत्र

  1. ओम देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥
  2. आह्लादकरिनी चन्द्रभूषणा हस्ते पद्मधारिणी।

घण्टा शूल हलानी देवी दुष्ट भाव विनाशिनी।।

चन्द्रघण्टा बीज मंत्र

ऐं श्रीं शक्तयै नम:।

कौन हैं मां चंद्रघण्टा

असुरों का दमन कर उनके प्रभाव को खत्म करने के लिए मां दुर्गा ने चंद्रघण्टा स्वरूप धारण किया था। असुरों का दमन कर उन्होंने देवताओं को उनके अत्याचार से मुक्ति दिलाई थी। मां चंद्रघण्टा देवी पार्वती की सुहागन अवतार मानी जाती हैं। महादेव से विवाह के पश्चात देवी पार्वती ने अपने ललाट पर आधा चंद्रमा धारण कर लिया, जिसके कारण उनको चंद्रघण्टा कहा जाता है। वह सिंह पर सवार होकर युद्ध मुद्रा में होती हैं। वे अपनी 10 भुजाओं में कमल, कमंडल और अनके अस्त्र-शस्त्र धारण करती हैं।http://www.satyodaya.com

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चैत्र नवरात्रि: आठवें दिन होती है महागौरी की पूजा,लॉकडाउन में न करें कन्या पूजन

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दुर्गाष्टमी बुधवार को है। इस दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। कई जगह दुर्गाष्टमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व है। कन्‍या पूजन पर गुलाबी रंग के वस्‍त्र पहनना शुभ माना जाता है। मां को हलवा-पूरी और चने का भोग लगाया जाता है। इसके अलावा रामनवमी पर भी कई जगह कन्या पूजन किया जाता है।  मां की कृपा से आलौकिक सिद्धियों की प्राप्ति होती है। लेकिन भारत में कोरोना वायरस महामारी और लॉकडाउन के चलते कन्या पूजन सही नहीं है। ज्योतिषियों का कहना है कि सुबह 9 से 10 बजे तक का समय कन्या पूजन के लिए अच्छा है, लेकिन इस समय कन्या पूजन न करना ही सही है। ऐसे में आप घर में ही पूजा कर मां को हलवा पूरी का भोग लगा लें।

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कन्याओं की जगह मां के नौ रुपों की प्रार्थना कर उन्ही को कन्या पूजन कर लें। देवी महागौरी अमोघ फलदायिनी हैं और इनकी पूजा से भक्तों के पूर्वसंचित पाप भी नष्ट हो जाते हैं। महागौरी का पूजन-अर्चन, उपासना-आराधना कल्याणकारी है। इनकी कृपा से भक्तों को अलौकिक सिद्धियां भी प्राप्त होती हैं। कहते हैं कि जो स्त्री मां की पूजा भक्ति भाव सहित करती है उसके सुहाग की रक्षा स्वयं देवी महागौरी करती हैं।

महागौरी को लगाएं नारियल का भोग : माता महागौरी को नारियल का भोग अत्यधिक प्रिय है। यही वजह है कि माता रानी को नारियल का भोग लगाया जाता है। नारियल का भोग लगाने से घर में सुख एवं समृद्धि का आगमन होता है।

व्रत कथा : पौराणिक कथाओं के अनुसार महागौरी ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसी कारण से इनका शरीर काला पड़ गया लेकिन तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने इनके शरीर को गंगा के पवित्र जल से धोकर कांतिमय बना दिया। उनका रूप गौर वर्ण का हो गया, इसीलिए यह महागौरी कहलाईं।

सिंह को बनाया अपना वाहन : एक और मान्यता के अनुसार एक भूखा सिंह भोजन की तलाश में वहां पहुंचा जहां देवी उमा तपस्या कर रहीं थीं। देवी को देखकर सिंह की भूख बढ़ गई, लेकिन वह देवी के तपस्या से उठने की प्रतीक्षा करते हुए वहीं बैठ गया। इस प्रतीक्षा में वह काफी कमजोर हो गया। देवी जब तप से उठीं तो सिंह की दशा देखकर उन्हें उस पर बहुत दया आ गई। उन्होंने उसे भी अपना वाहन बना लिया क्योंकि वह उनकी तपस्या पूरी होने की प्रतीक्षा में स्वयं भी तप कर बैठा।http://www.satyodaya.com

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देश

चैत्र नवरात्रि 2020: चौथे दिन होगी कूष्मांडा देवी की पूजा,शुभ मुहूर्त

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लखनऊ। मां दुर्गा के चौथे स्वरूप का नाम कूष्माण्डा है। अपनी मंद मुस्कान द्वारा अंड अर्थात ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इन्हें कूष्माण्डा देवी के नाम से अभिहित किया गया है। अत: यही सृष्टि की आदि स्वरूपा और आदि शक्ति हैं। इनका निवास सूर्यलोक में है। इन्हीं के तेज और प्रकाश से दसों दिशाएं प्रकाशित हो रही हैं।

ये अष्टभुजा देवी के नाम से भी विख्यात हैं। संस्कृत भाषा में कूष्माण्ड कुम्हडे़ को कहते हैं। बलियों में कुम्हड़े की बलि इन्हें सर्वाधिक प्रिय है। मां कूष्माण्डा की उपासना से भक्तों के समस्त रोग-शोक विनष्ट हो जाते हैं। मां कूष्माण्डा अत्यल्प सेवा और भक्ति से प्रसन्न होने वाली हैं। नवरात्र पूजन की चौथे दिन कूष्माण्डा देवी के स्वरूप की उपासना की जाती है। इस दिन साधक का मन अनाहत चक्र में स्थित होता है।

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मां कूष्मांडा पूजा मंत्र-
करोतु सा नः शुभहेतुरीश्वरी
शुभानि भद्राण्यभिहन्दु चापदः।

लॉकडाउन में ऐसे हो रही पूजाः
चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन आज यानी शनिवार को है। नवरात्र के चतुर्थी तिथि को मां दुर्गा के कूष्मांडा स्वरूप की पूजा होती है। माता कूष्मांडा भक्तों को रोग, शोक और विनाश से मुक्त कर आयु, यश, बल और बुद्धि प्रदान करती हैं। चैत नवरात्र पर बंद मंदिरों के अंदर मां की उपासना हो रही है। कुछ भक्त आने घरों में कलश स्थापित कर मां की अराधना कर रहे हैं। शहर के शक्ति मंदिर, खड़ेश्वरी मंदिर सहित प्रत्येक मुहल्ले के देवी मंदिरों में घट स्थापित की गई है। लेकिल लॉकडाउन के कारण भक्तों को प्रवेश बंद रखा गया है। अंदर पुरोहित मां के स्वरूपों की पूजा आरती और भोग अर्पण कर रहे हैं। शुक्रवार को मां के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा की गई।

शक्ति मंदिर जरूरतमंदों को कराएगा भोजन
कारोना से आई विपदा को देखते हुए धनबाद (झारखंड) में शक्ति मंदिर कमेटी ने निर्णय लिया है कि शनिवार से प्रत्येक दिन जब तक लॉकडाउन है जरूरतमंदों के लिये एक सौ पैकेट भोजन की व्यवस्था की जाएगी। यह जानकारी देते हुए मंदिर कमेटी के सुरेंद्र अरोड़ा ने कहा कि बैंक मोड़ थाने के सहयोग से जरूरतमंद लोगों तक वो पैकट पहुंचाये जाएंगे। पैकेट में एक दिन खिचड़ी आचार और एक दिन पूड़ी व आलू की सब्जी होगी। इस कार्य के लिए मंदिर कमेटी के अध्यक्ष एसपी सोंधी, उपाध्यक्ष राजीव सचदेव, सचिव अरुण भंडारी, संयुक्त सचिव सुरेंद्र अरोड़ा, कोषाध्यक्ष विपिन अरोड़ा, साकेत साहनी, सुरेन्द्र ठक्कर, अशोक भसीन, ब्रजेश मिश्रा, जेडी, गौरव अरोड़ा सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।http://www.satyodaya.com

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संस्कृति

धरती से निकली थीं पटना नगर की रक्षिका पटन देवी, आज भी है निशान

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लखनऊ। देश के प्रमुख शक्ति उपासना केंद्रों में शामिल पटना के पटन देवी मंदिर में विद्यमान मां भगवती को पटना की नगर रक्षिका माना जाता है।

पटना की नगर रक्षिका भगवती पटनेश्वरी हैं जो छोटी पटन देवी के नाम से भी जानी जाती हैं। यहां मंदिर परिसर में मां महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की स्वणार्भूषणों, छत्र एवं चंवर के साथ विद्यमान हैं। मंदिर के पीछे एक बहुत बड़ा गड्ढा है, जिसे ‘पटनदेवी खंदा’ कहा जाता है। मान्यता के अनुसार इस स्थान से मूर्तियां अवतरित हुई थीं।

बिहार ही नहीं बल्कि पूरे देश में प्रसिद्ध इस शक्तिपीठ की मूर्तियां सतयुग की मानी जाती हैं। मंदिर परिसर में ही योनिकुंड है, जिसके संबंध में कहा जाता है कि इसमें डाली जाने वाली हवन सामग्री भूगर्भ में चली जाती है।

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देवी को प्रतिदिन दिन में कच्ची और रात में पक्की भोज्य सामग्री का भोग लगता है। मान्यता है कि जो भक्त सच्चे दिल से यहां आकर मां की अराधना करते हैं, उनकी मनोकामना जरूर पूरी होती है।
मंदिर में वैदिक और तांत्रिक विधि से पूजा होती है। वैदिक पूजा सार्वजनिक होती है, जबकि तांत्रिक पूजा चंद मिनट की होती है। तांत्रिक पूजा के दौरान भगवती का पट बंद रहता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह मंदिर कालिक मंत्र की सिद्धि के लिए प्रसिद्ध है।http://www,satyodaya.com

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