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संस्कृति

होली स्पेशल: वैदिक ही नहीं वैज्ञानिक कारणों से भी शुभ है होलिका दहन…

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जानें क्यों खास है इस बार होलिका दहन…

पुरे देश में होलिका दहन की धूम मची हुई है।प्रेम और भाईचारे का पर्व होलिका दहन के साथ ही शुरू हो जाता है।इस बार पड़ होलिका दहन बेहद ही ख़ास है।आज फाल्गुन शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि सुबह 10:45 तक ही रहेगी। उसके बाद पूर्णिमा तिथि लग जायेगी। शास्त्रों में फाल्गुन मास की पूर्णिमा बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है।

होलिका की पवित्र आग में नए अन्न के साथ अपने जीवन की अलाओं-बालाओं का भी दहन करते हैं।होलिका की आग में गेहू, चना और जौ की बाली , सरसों का उबटन, गुझिया, फल, मीठा, गुलाल अर्पित करने के बाद ही लोग रंगों के पर्व की शुरुआत करते हैं।वेदों ने होलिका दहन के पर्व को नवान्नेष्टि के नाम से जाना जाता है।

मान्यता है कि आज ही के दिन राजा हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रहलाद को मारने के लिए बहन होलिका से मदद मांगी थी। जिसके बाद ब्रह्माजी से कभी न जलने का वरदान पाने वाली होलिका प्रहलाद को गोद में लेकर आग में बैठ गयी थी।भगवान विष्णु के भक्त प्रहलाद को मारने की मंशा से आग में बैठी होलिका खुद ही जलकर भस्म हो गयी।ये भगवान की लीला ही थी जिसकी वजह से अच्छाई की बुराई पर जीत हुई।तब से ही लोग हर वर्ष होलिका दहन का पर्व मनाते आए हैं।

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वहीं बात अगर वैज्ञानिक कारणों की करें तो होलिका दहन के दौरान पवित्र अग्नि में डाले जाने वाली सामग्री जैसे की कपूर, लौंग और इलायची वातावरण में मौजूद वातावरण को शुद्ध करने के साथ स्वाइन फ्लू जैसी खतरनाक बीमारियों के बैक्टीरिया को भी नष्ट करता है।बात अगर इस बार के मुहरत करें तो आज रात्रि: 8:58 बजे से 12:13 बजे तक होलिका दहन का शुभ मुहरत हैं। इस बीच होलिका दहन करने पर शुभ फल की प्राप्ति होगी।http://www.satyodaya.com

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कजरी तीज के मौके पर इस तरह करें पूजा, जानें शुभ-मुहूर्त

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कजरी तीज का व्रत इस बार 18 अगस्त को पड़ रहा है। मुख्य रूप सुहागिन महिलाओं का यह व्रत हर साल भाद्र मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। महिलाएं इस दिन देवी पार्वती के स्वरूप कजरी माता की पूजा करती हैं और पति के लंबी उम्र की कामना करती हैं। अविवाहित लड़कियां भी अच्छे वर की कामना लिए इस पर्व को करती हैं।

यह त्योहार मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान में मनाया जाता है। कजरी तीज के मौके पर महिलाएं दिन भर उपवास करती हैं और फिर शाम को चंद्रमा के उदय के बाद उन्हें अर्घ्य देती हैं। कई क्षेत्रों में इसे कजली तीज भी कहा जाता है।

कजरी तीज के मौके पर जौ, गेहूं, चने और चावल के सत्तू में घी और मेवा को मिलाकर कई तरह के पकवान बनाए जाते हैं।

कजरी तीज का शुभ मुहूर्त 17 अगस्त के रात 10 बजकर 48 मिनट से शुरू हो जाएगा। इसके बाद 18 अगस्त तक रहेगा। इस दिन नीमड़ी माता की पूजा-अर्चना की जाती है। महिलाएं पूजन से पहले मिट्टी और गोबर की दीवार के सहारे एक तालाब जैसी आकृति बनाते हैं। इसके बाद नीम की टहनी को लगाकर दूध और जल डालते हैं। वहीं दिया भी जलाती हैं।

कजरी व्रत के दिन पूजा का विशेष महत्व है। पूजन के लिए सर्वप्रथम नीमड़ी माता को जल चढ़ाएं। इसके बाद रोली और चावल चढ़ाएं। नीमड़ी माता के पीछे दीवार पर मेहंदी, रोली और काजल की 13-13 बिंदिया ऊंगली से लगाएं। मेंहदी, रोली की बिंदी अनामिका अंगुली से लगाएं और काजल की बिंदी तर्जनी अंगुली से लगानी चाहिए। इसके बाद फल भी चढ़ाएं।

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शक्ति क्लब ने मनाई हरियाली तीज, नीता गोयल के सिर सजा तीज क्वीन का ताज

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लखनऊ। शक्ति क्लब (इंदिरा नगर) ने शुक्रवार को धूमधाम से हरियाली तीज मनाई। इस मौके पर शक्ति क्लब की महिलाओं ने रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में डांस और सिंगिंग की प्रतियोगिताएं हुईं। जिसमें कविता शुक्ला, जयभट्ट, सुधा कटियार, भावना श्रीवास्तव ने बेहतरीन डांस प्रस्तुत किया।

जबकि सरिता कुमार, पूजा सिंह, सुधा त्रिपाठी, सुनीता श्रीवास्तव ने सावन पर अपने सुरीले गीतों से सभी को झूमने पर मजबूर कर दिया। कार्यक्रम में तीज क्वीन प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें 80 महिलाओं ने प्रतिभाग किया। यह प्रतियोगिता पांच चरणों में संपन्न हुई। तीज क्वीन का ताज नीता गोयल के सिर पर सजा जबकि सुधा त्रिपाठी फर्स्ट रनर अप और आभा शर्मा सेकंड रनर अप रहीं।

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कार्यक्रम का संचालन महासचिव मंजू शंकर ने किया। अध्यक्ष विजय लक्ष्मी रस्तोगी ने विजेताओं को पुरस्कार वितरित किए। इस रंगारंग कार्यक्रम में विद्या वर्मा, नीता गोयल, सुधा सेंगर, सुईता, रीता, भवन, गीता, वीणा अग्रवाल, सरिता कुमार, सुनीता श्रीवास्तव की सहभागिता रही। हरियाली तीज सुहाग का पर्व है, इसलिए सभी सुहागनों को सुहाग की पिटारी बांटी गई। प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में मंजू शंकर, कविता शुक्ला, विजय लक्ष्मी, जयश्री उपस्थित रहीं। http://www.satyoday.com

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सावन की शिवरात्रि कल, जानिए क्या है शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

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लखलऊ। सावन की शिवरात्रि का हिन्‍दू धर्म में विशेष महत्‍व है। सावन महीने में आने वाली शिवरात्रि को विशेष फलदायी माना जाता है। मान्‍यता है कि फाल्‍गुन महीने में पड़ने वाली महाशिवरात्रि की तरह ही सावन शिवरात्रि में भी अक्षय पुण्‍य मिलता है। हिन्‍दू मान्‍यताओं के अनुसार भगवान भोलेनाथ का दिन सोमवार है और सावन उनकी पूजा का सर्वश्रेष्‍ठ महीना माना जाता है। मान्‍यता है कि सावन के महीने में स्वयं भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश, कार्तिकेय, नंदी और अपने शिवगणों सहित पूरे महीने पृथ्वी पर विराजते हैं। यही वजह है कि सावन शिवरात्रि के दिन भगवान भोलेनाथ की विशेष पूजा का विधान है।

हिन्‍दू कैलेंडर के अनुसार सावन शिवरात्रि हर साल सावन के महीने की कृष्‍ण पक्ष चतुर्दशी को आती है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार हर साल अगस्‍त-सितंबर माह में सावन शिवरात्रि मनाई जाती है। इस बार सावन शिवरात्रि 30 जुलाई को है।

शुभ मुहूर्त

चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 30 जुलाई 2019 को दोपहर 02 बजकर 49 मिनट से निशिथ काल पूजा: 31 जुलाई 2019 को दोपहर 12 बजर 06 मिनट से 12 बजकर 49 मिनट तकपारण का समय: 31 जुलाई 2019 को सुबह 05 बजकर 46 मिनट से सुबह 11 बजकर 57 मिनट तक

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महत्‍व

शिव भक्‍तों के लिए सावन शिवरात्रि का महत्‍व बहुत ज्‍यादा है शिवभक्‍त पूरे साल सावन शिवरात्रि की प्रतीक्षा करते हैं। सावन का महीना आते ही शिव भक्‍त बोल बम के नारों के साथ पैदल ही कांवड़ लेने के लिए हरिद्वार और गौमुख निकल पड़ते हैं।

फिर कई किलोमीटर की पैदल यात्रा कर सावन शिवरात्रि के दिन अपने आराध्‍य भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। सावन शिवरात्रि के दिन शिवलिंग का जलाभिषेक करना बेहद पुण्‍यकारी और कल्‍याणकारी माना जाता है। मान्‍यता है कि सावन शिवरात्रि के दिन जो भक्‍त सच्‍चे मन से शिव शंकर की पूजा करते हैं भगवान उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण कर देते हैं।

सावन शिवरात्रि की पूजन विधि

 शिवरात्रि के दिन सुबह जल्‍दी उठकर स्‍नान कर स्‍वच्‍छ वस्‍त्र धारण करें। इसके बाद व्रत का संकल्‍प लें। अब घर के मंदिर या शिवालय जाकर शिवलिंग पर पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी और गन्‍ने का रस या चीनी का मिश्रण) चढ़ाएं। अब ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करते हुए शिवलिंग पर एक-एक कर बेल पत्र, फल और फूल चढ़ाएं।  मान्‍यता है कि सावन शिवरात्रि पर भोलेनाथ को तिल चढ़ाने से पापों का नाश होता है। मनचाहा वर पाने के लिए चने की दाल का भोग लगाने का विधान है। घर में सुख-शांति के लिए धतूरे के पुष्‍प या फल का भोग लगाया जाता है।  शत्रुओं पर विजय पाने या कोर्ट केस जीतने के लिए शिवलिंग पर भांग भी चढ़ाई जाती है।http://www.satyodaya.com

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August 20, 2019, 6:01 pm
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