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संस्कृति

महावीर ट्रस्ट ने मंदिर निर्माण के लिए राम मंदिर ट्रस्ट को सौंपी दान की पहली किस्त

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लखनऊ। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट गठन के बाद पहली बार ट्रस्ट के बैंक खाते रामनवमी के पर्व पर सार्वजनिक कर दिया गए। ट्रस्ट के दो खाते हैं, पहला बचत खाता और दूसरा चालू खाता। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कारसेवकपुरम में खातों की जानकारी सार्वजनिक की। उन्होंने बताया कि बचत खाते का नंबर-39161495808 और चालू खाते का नंबर-39161498809 है।

उन्होंने बताया कि यह खाता भारतीय स्टेट बैंक की अयोध्या शाखा में है, जिसका आईएफएससी कोड-एसबीआईएन 0002510 है। इसी तरह से ट्रस्ट का पैन नंबर- एएजेडटीएस 6197बी है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि दानदाता यदि अंग्रेजी में ट्रस्ट का नाम लिखेंगे तो श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र लिखेंगे और क्षेत्र की स्पेलिंग केएसएचईटीआरए (Kshetra) लिखेंगे। उन्होंने बताया कि महावीर ट्रस्ट, पटना की ओर से दो करोड़ रुपये का चेक श्री राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को प्राप्त हो गया है। इस चेक को ट्रस्ट के खाते में जमा कर दिया गया है।

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उन्होंने कहा कि विषम परिस्थिति में मंदिर निर्माण प्रारंभ हुआ है। कोरोना के कारण मंदिर निर्माण के कार्य में बाधा आ रही है। श्री राय ने कहा कि अभी कोरोना का डर काफी समय तक रहेगा। देश में संकट का समय चल रहा है। संकट समाप्त होते ही मंदिर निर्माण प्रारंभ हो जाएगा। देश और जीवन की रक्षा हमारा पहला उद्देश्य है। इस दौरान ट्रस्ट के सदस्य और आरएसएस के प्रांत कार्यवाह अनिल मिश्र भी उपस्थित थे। उन्होंने बताया कि कोरोना की महामारी और लॉकडाउन को देखते हुए ट्रस्ट के बोर्ड आफ ट्रस्टीज की बैठक को स्थगित कर दिया गया है और इसकी सूचना भी सभी ट्रस्टियों को भेज दी गयी है। अगली तिथि महामारी के दौर की समाप्ति के बाद घोषित की जाएगी। http://www.satyodaya.com

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Ashadha Gupt Navratri: आज से शुरू गुप्त नवरात्रि, जानें शुभ मुहूर्त व पूजन विधि…

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नई दिल्ली: माघ और आषाढ़ में मनाई जाने वाली नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। इस साल आषाढ़ माह में पड़ने वाली गुप्त नवरात्रि 22 जून को से शुरू होकर 30 जून को समाप्त होगी। इन नौ दिनों में देवी मां दुर्गा के नौ गुप्त रूपों की पूजा-उपासना की जाती है। 22 जून को घटस्थापना है। यह नवरात्रि तंत्र विद्या सीखने वाले और मां दुर्गा से मुंहमांगी मनोकामना करने वाले के लिए विशेष महत्व रखता है। हिंदी पंचांग के अनुसार, साल में चार नवरात्रि मनाई जाती है। पहली नवरात्रि माघ महीने में, दूसरी नवरात्रि चैत्र महीने में, तीसरी नवरात्रि आषाढ़ महीने में मनाई जाती है। जबकि चौथी और अंतिम नवरात्रि अश्विन माह में मनाई जाती है, जिसे शारदीय नवरात्रि कहा जाता है।आइए, गुप्त नवरात्रि के बारे में विस्तार से जानते हैं-

मां दुर्गा के नौ रूप

मां दुर्गा के नौ रूप शैल पुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री माता हैं, जिनकी नवरात्रि में पूजा की जाती है। साथ ही दस महाविद्या देवियां तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुनेश्वरी, छिन्नमस्ता, काली, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी हैं, जिनकी गुप्त नवरात्रि में गुप्त तरीके से पूजा-उपासना की जाती है।

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गुप्त नवरात्रि का महत्व

यह नवरात्रि तंत्र साधना, जादू-टोना, वशीकरण आदि चीज़ों के लिए विशेष महत्व रखता है। गुप्त नवरात्रि के नौ दिनों तक साधक मां दुर्गा की कठिन भक्ति और तपस्या करते हैं। खासकर निशा पूजा की रात्रि में तंत्र सिद्धि की जाती है। इस भक्ति और सेवा से मां प्रसन्न होकर साधकों को दुर्लभ और अतुल्य शक्ति देती हैं। साथ ही सभी मनोरथ सिद्ध करती हैं।

गुप्त नवरात्रि में क्या करें

1.नौ दिनों तक ब्रह्मचर्य नियम का जरूर पालन करें।

2.तामसी भोजन का त्याग करेंकुश की चटाई पर शैया करनी चाहिए।

3.निर्जला अथवा फलाहार उपवास रखें।

4.मां की पूजा-उपासना करेंलहसुन-प्याज का उपयोग न करें।

5.माता-पिता की सेवा और आदर सत्कार करें।http://satodaya.com

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भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथयात्रा के अवरोधों को दूर किया जाए- विहिप

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लखनऊ। जगन्नाथ मंदिर धाम का पौराणिक और ऐतिहासिक गाथा बहुत ही रोचक रही है। यही कारण है कि कोरोना जैसा महामारी के संक्रमण की मौजूदा स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस बार श्रीजगन्नाथपुरी की ऐतिहासिक रथयात्रा के आयोजन पर रोक लगा दी है। जानकारी के अनुसार यात्रा की परंपरा शुरू होने के ये 32वां मौका है जब रथयात्रा को स्थगित किया गया।

जिस का विरोध करते हुए विश्व हिन्दू परिषद् (विहिप) के केन्द्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे ने कहा है कि गत सैकड़ों वर्षों से अनवरत रूप से पुरी में निकाली जाने वाली भगवान जगन्नाथ की परम्परागत रथ यात्रा इस वर्ष भी निकाली जानी चाहिए। कोरोना महामारी के संकटकाल में भी सभी नियमों तथा जन स्वास्थ्य सम्बन्धी उपायों के साथ यात्रा निकाली जा सकती है। उन्होंने कहा कि यात्रा की अखण्डता सुनिश्चित करने के लिए कोई मार्ग अवश्य ढूंढना चाहिए। आज की परिस्थितियों में यह अपेक्षा कदापि नहीं है, कि यात्रा में दस लाख भक्त एकत्रित हों।

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विहिप महा मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का दायित्व है कि कोरोना महामारी के संकट काल में भी, जन-स्वास्थ्य की रक्षा करते हुए, प्राचीन परम्परा की अखण्डता सुनिश्चित करने हेतु, उचित मार्ग निकाला जाए। राज्य सरकार अपने इस दायित्व के पालन में पूरी तरह विफल रही है। वास्तव में ओड़िसा सरकार माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष इस सम्बन्ध में सभी पहलू ठीक से नहीं रख पाई।

परांडे ने कहा कि इस सम्बन्ध में निर्णय लेने से पूर्व सभी सम्बन्धित पक्षों यानी की पुरी के शंकराचार्य गोवर्धन पीठाधीश्वर स्वामी निश्चलानंद सरस्वती के साथ मंदिर के ट्रस्टियों तथा यात्रा प्रबंधन समिति के साथ एक बार बातचीत कर के उनकी बातों को भी सुनन चाहिए था। भगवान के रथ को प्रतीकात्मक रूप से हाथियों, यांत्रिक सहायता या कोविड परीक्षित पूरी तरह से स्वस्थ व सक्षम सीमित सेवाइतों के माध्यम से भी खींचा जा सकता है। यात्रा की इस पुरातन महान परम्परा के टूटने पर मंदिर के धार्मिक विधि विधानों में व्यवधान उपस्थित होने की सम्भावना अनेक भक्तों ने व्यक्त की है। http://www.satyodaya.com

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अयोध्या विवाद के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में काशी-मथुरा विवाद पर भी याचिका

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प्लेसेज ऑफ वर्शिप (स्पेशल प्रोविजन) एक्ट 1991, को दी गई चुनौती

लखनऊ। कई महीनों से चल रही अयोध्या विवाद के बाद सुप्रीम कोर्ट में काशी-मथुरा विवाद को लेकर भी याचिका दाखिल की गई है। याचिका में काशी और मथुरा विवाद को लेकर कानूनी कार्रवाई को फिर से शुरू करने की मांग की गई है। प्लेसेज ऑफ वर्शिप (स्पेशल प्रोविजन) एक्टएक्ट 1991 यानि पूजा स्थल अधिनियम, 1991 को चुनौती दी गई है। हिंदू पुजारियों के संगठन विश्व भद्र पुजारी पुरोहित महासंघ ने इस एक्ट के प्रावधान को चुनौती दी है। इस एक्ट में कहा गया है कि 15 अगस्त, 1947 को जो धार्मिक स्थल जिस संप्रदाय का था वो आज, और भविष्य में भी उसी का रहेगा।

बताया जाता है कि नरसिम्हा राव की सरकार ने साल 1991 में प्लेसेज ऑफ वर्शिप (स्पेशल प्रोविजन) एक्ट, 1991 बनाया था। जिससे धार्मिक विवाद के चलते किया तरह से धार्मिक स्थल पर पाबंदियां ना लगाई जाए। यह एक्ट 1991 यानि पूजा स्थल अधिनियम बाबरी विध्वंस से एक साल पहले बनाया गया था। इस एक्ट में कहा गया है कि धार्मिक स्थल जिस संप्रदाय का था भविष्य में भी उसी का रहेगा। हालाकिं अयोध्या विवाद को बाहर रखा गया था, लेकिन इस एक्ट से काशी और मथुरा जैसे कई धार्मिक स्थल के विवाद को खत्म भी किया है।

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वहीं, 9 नवंबर 2019 में राम मंदिर पर फैसला देते समय सुप्रीम कोर्ट की बेंच में तत्कालीन चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एस.ए. बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस. अब्दुल नजीर की पीठ ने अपने फैसले में देश के सेक्युलर चरित्र की बात की थी। इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने अपने 1,045 पेज के फैसले में 11 जुलाई, 1991 को लागू हुए प्लेसेज ऑफ वर्शिप (स्पेशल प्रोविज़न) एक्ट, 1991 का जिक्र किया है। इस मतलब ये हुआ कि काशी और मथुरा में जो मौजूदा स्थिति है वही बनी रहेगी। उनको लेकर किसी तरह का दावा नहीं किया जा सकेगा। http://www.satyodaya.com

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