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संस्कृति

‘गामा पहलवान’ जो हिंदू परिवारों और दंगाइयों के बीच खड़ा हो गया था पहाड़ बन कर…

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गामा ने कुश्ती के मुकाबलों के साथ साथ अपने इस कारनामे से लोगों के दिल भी जीते

“गम्मा हाउए का रे?”

“हई लईका त गम्मा बा।”

उक्त पंक्तियां बचपन में बहुत बार सुनी हैं। पहली का मतलब है “गम्मा है क्या रे?” दूसरी का मतलब है “ये बच्चा तो गम्मा है।” गम्मा उसे कहा जाता था जिसमें खूब ताकत होती या जो किसी बात का गम नहीं करता। मगर शायद ही उनमें से किसी को पता रहा होगा कि ये गम्मा आखिर है या था कौन। हां सब इतना जरूर जानते थे कि गम्मा एक पहलवान है, जिसकी ताकत बजरंगबली से थोड़ी ही कम है। कई लोग तो ये मानते थे कि गम्मा एक हिन्दू पहलवान है, जिसे बजरंगबली का आशीर्वाद प्राप्त है।

किसी व्यक्ति के लिए इससे बड़ी उपलब्धि भला और क्या हो सकती है कि उसके बारे में ना जानने वाले भी उसकी चर्चा करते रहते हैं। गम्मा यानी गामा एक शक्तिशाली पहलवान थे इससे ज्यादा भी बहुत कुछ है जो उनके बारे में बताना और जानना जरूरी है। तो आइये आज बात करते हैं उस अजय पहलवान गामा की :

ज्यादा दिनों नहीं मिल सका पिता का साथ

गामा पहलवान जिसे आज भी गांव देहातों में अधिकांश लोग एक हिन्दू पहलवान मानते हैं उनका नाम था गुलाम मोहम्मद। 22 मई 1878 के दिन अमृतसर की पाक पवित्र धरती पर जन्मा था एक ऐसा बच्चा जिसने इतिहास के पन्नों पर अपना नाम कुछ इस तरह लिखा कि वो नाम हमेशा के लिए अमर हो गया। वो बच्चा था गामा पहलवान। गामा बचपन से ही अपने पिता के दांव पेंच को बारीकी से देखते आये थे। उनके पिता मोहम्मद अजीज बक्श स्वयं एक जाने माने पहलवान थे। अब जिस बच्चे का लालन पालन ही अखाड़े में हुआ हो, जो बड़ा ही अखाड़े की मिट्टी फांक कर हुआ हो उसके लिए अखाडा जैसे माँ की गोद ही होगा। नन्हा गामा अपने पहलवान पिता से बहुत कुछ सीख सकता था लेकिन दुर्भाग्यवश छोटी उम्र में ही उसने अपने पिता को खो दिया। उनके पिता के जाते ही नियति को ये डर सताने लगा कि कहीं ये योद्धा किसी अच्छी क्षत्रछाया के आभाव में उस ख्याति को पाने से वंचित ना रह जाए जिसके लिए इसका जन्म हुआ है। तभी नियति ने भेजा दतिया के महाराजा को जिन्होंने गामा के संरक्षण का जिम्मा उठाया और मन में ये ठान लिया कि वो उसे पहलवान बना कर ही रहेंगे।

छोटी सी उम्र में ही दिखने लगा था दम

जिस उम्र में कोई भी माँ अपने बच्चे को अपनी आंचल की छांव में इसलिए छुपा कर रखती है कि कहीं निर्दयी सूरज की धधकती किरणें उसके लाल की कोमल त्वचा ना जला दे, उस उम्र में छोटे मियां गामा अपना पहला दंगल लड़ने अखाड़े में कूद गए थे। फिर इसके दो साल बाद समय आया वो दंगल लड़ने का जिसने गामा को लोगों के लिए एक अचंभा बना दिया। वो सन था 1890, उम्र थी वही कोई 12 वर्ष, आयोजन था जोधपुर के राजा द्वारा करवाए गए दंगल का। एक बारह वर्ष के लड़के ने अपनी कसरत और चुस्ती फुर्ती से राजा का ध्यान सभी पहलवानों पर से हटा कर अपनी तरफ खींच लिया। गामा ने कुछ मुकाबले भी लड़े, मुकाबलों का परिणाम सबकी सोच से कहीं ज्यादा था। गामा को पहले 15 पहलवानों में चुना गया। जोधपुर के राजा ने उन्हें विजेता घोषित कर दिया।

5 फुट 7 इंच का गामा 6 फुट 9 इंच के पहलवान के सामने घंटों तक अड़ा रहा

इसके बाद गामा रुकने वाले कहाँ थे। वो बढ़ते रहे। फिर आया वो दंगल जिसने लोगों का भ्रम तो तोड़ा ही साथ ही साथ गामा पहलवान के नाम और उनके हौंसले को असमान की बुलंदियों तक पहुंचा दिया। 1895 में उनका मुकाबला हुआ उस समय के रुस्तम ए हिन्द और देश के सबसे बड़े पहलवान रहीम बक्श सुल्तानीवाला से। कहते हैं उस दिन इन दोनों का मुकाबला देखने पूरा लाहौर उमड़ आया था। दंगल में जब 6 फुट 9 इंच के सुल्तानिवाला के सामने 5 फुट 7 इंच के गामा लड़ने के लिए खड़े हुए तो लगभग हर किसी ने मन ही मन सुल्तानिवाला को विजेता करार करते हुए गामा की होने वाली हालत पर तरस खाया। दर्शक भले ही गामा को ले कर डरे हों लेकिन गामा के चेहरे पर रत्ती भर भी भय नहीं था। गामा ने रुस्तम ए हिन्द रहीम का डट कर मुकाबला किया और घंटों चले मुकाबले में हारे नहीं। इस तरह से मैच ड्रा हो गया। लेकिन इस मुकाबले के बाद गामा का नाम पूरे देश में जाना जाने लगा।

गामा ने 1898 से लेकर 1907 के बीच दतिया के गुलाम मोहिउद्दीन, भोपाल के प्रताब सिंह, इंदौर के अली बाबा सेन और मुल्तान के हसन बक्श जैसे नामी पहलवानों को लगातार हराया। 1910 में एक बार फिर गामा का सामना रुस्तम-ए-हिंद रहीम बक्श सुल्तानीवाला से हुआ। एक बार फिर मैच ड्रॉ रहा। अब गामा देश के अकेले ऐसे पहलवान बन चुके थे, जिसे कोई हरा नहीं पाया था।

विश्व के सबसे बड़े पहलवान को दी थी मात

वैसे तो गामा पहलवान कई देशों में अपनी कुश्ती का झंडा गाड़ चुके थे, लेकिन 1910 में वो अपने रेसलर भाई इमाम बख्श के साथ लंदन पहुंचे, जहां उन्हें इंटरनेशनल चैंपियनशिप में भाग लेने से मना कर दिया गया। लेकिन गामा ने ओपन चैलेंज दिया कि वो किसी भी पहलवान को पराजित कर सकते हैं और फिर उन्होंने अमेरिकी चैंपियन बेंजामिन रोलर को सिर्फ 1 मिनट, 40 सेकंड में ही चित्त कर दिया। बस फिर क्या था ना चाहते हुए भी आयोजक उन्हें चैंपियनशिप में हिस्सा लेने से रोक नहीं पाए। यहां उनका मुकाबला पोलैंड के स्टैनिसलॉस जबिश्को से हुआ। जबिश्को उस समय का चैम्पियन था, उसका नाम विश्व के सबसे बड़े पहलवानों में लिया जाता था। 10 सितंबर 1910 को फाइट हुई। गामा ने ज़बिश्को को पहले ही मिनट में जमीन पर पटक दिया। 2 घंटे 35 मिनट तक मैच चला, लेकिन उसे ड्रॉ करार दे दिया गया। मैच दोबारा 19 सितंबर को हुआ और ज़बिश्को मैच में आने की हिम्मत ही नहीं जुटा पाया। इस तरह, गामा वर्ल्ड हैवीवेट चैंपियन बनने वाले भारत के पहले पहलवान बन गए। यह खिताब रुस्तम-ए-जहां के बराबर था।

1911 में गामा का सामना फिर रहीम बक्श से हुआ। इस बार रहीम को गामा ने चित कर दिया। इसके बाद, 1927 में गामा ने आखिरी फाइट लड़ी। उन्होंने स्वीडन के पहलवान जेस पीटरसन को हराकर खामोशी से इस खेल को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया।

ये था गामा की ताकत का राज

गामा पहलवान की ताकत का सबसे बड़ा नमूना था उनके द्वारा 1200 किलो वजनी पत्थर उठाना। 24 साल की उम्र में द ग्रेट गामा ने 1200 किलो का पत्थर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया था। इसी पत्थर को उठाने में 25 लोग लगे थे। गामा पहलवान की खुराक भी कोई कम नहीं थी। कहा जाता है कि 6 देसी मुर्गे, 10 लीटर से उबाल कर 7.5 लीटर हुए दूध, आधा किलो देसी घी ये सब वो आराम से चट कर जाया करते थे। उन्होंने अपना डाईट चार्ट खुद तैयार किया था। इसी की देन थी कि वो एक बार में तीन तीन हजार दंड (पुश अप) और पांच पांच हजार बैठक (सिट अप) लगा देता थे।

इस तरह गामा ने जीत लिए थे कितने दिल

ये सब पहलवानी की बात थी लेकिन गामा के बारे में कुछ बातें ऐसी भी हैं जो पहलवानी से अलग हैं लेकिन सबके लिए जाननी बहुत जरूरी है। भारत पाकिस्तान बंटवारा हुआ, गामा को लाहौर जाना पड़ा। लेकिन जिस तरह वह यहाँ हिन्दू परिवारों के बीच रहे थे वैसे ही अब लाहौर में भी वो हिन्दू परिवारों के बीच जा बसे। बंटवारे की आग कुछ लोगों की आत्मा तक जला चुकी थी और वो अब इंसान ना रह कर हिन्दू मुस्लिम हो गए थे और एक दूसरे को खत्म कर देना चाहते थे। लेकिन गामा पहलवान ने ये कसम खायी कि वो एक भी हिंदू का बाल भी बांका नहीं होने देंगे। कहते हैं जब दंगाई हिन्दू परिवारों को मरने उनके मोहल्ले की तरफ आये तो गामा अपने कुछ पहलवान साथियों के साथ उनके सामने खड़े हो गए। इधर गामा का एक हाथ एक दंगाई पर पड़ा कि उधर बाकी बचे दंगाई भाग खड़े हुए।

गामा पहलवान ने ना केवल हिन्दू परिवारों की रक्षा की बल्कि उनके रहने खाने और आने जाने का खर्चा भी उठाया। गामा ने जब तक हिन्दू परिवारों को सही सलामत सरहद पार नहीं भेजा तब तक वो शांत नहीं बैठे। आज जिनके दिलों में नफरत की आग धधक रही है उन्हें गामा के इस कारनामे को याद करते हुए शर्मिंदा होने की जरूरत है।

गामा को पाकिस्तान से ज्यादा प्यार हिंदुस्तान से मिला

शायद यही वो कारण है कि आज भी पाकिस्तान से ज्यादा गामा भारत में याद किये जाते हैं। लाहौर में पैदा हुए और इंग्लैंड में रह रहे त्वचा विशेषज्ञ डॉ आमिर बट्ट पाकिस्तानी हो कर भी ये लिखते हैं कि जितना सम्मान गामा को हिंदुस्तान में मिला उतना पाकिस्तान नहीं दे पाया। इतिहास में काफी रुचि रखने वाले डॉ बट्ट ने चिंता जाहिर करते हुए पाकिस्तानी अख़बार नेशन में ये लिखा महाराष्ट्र के कोल्हापुर में कुछ साल पहले जब गामा पहलवान के नाती कुछ अन्य पहलवानों के साथ लाहौर से किसी कुश्ती दंगल में भाग लेने पहुंचा तो पूरे इलाके में चर्चा हो गई कि गामा पहलवान का नाती आया है। आस पास के जिलों के करीब 2 लाख गांव वाले उसकी कुश्ती में गामा पहलवान की एक झलक पाने के लिए 14 घंटे पानी में भीगते रहे। उनके मुताबिक भारत मे इतना सम्मान तो क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर को भी नहीं मिलता। आज भारत के लोग उसके नाती के सम्मान में भी 14 घंटे बारिश में खड़े होकर इंतजार करते हैं और दूसरी तरफ पाकिस्तान के युवा हैं, जो उसे पहचानते भी नहीं। डॉ बट के मुताबिक नवाज शरीफ की बीवी कलसुम शरीफ गामा पहलवान की ही नातिन हैं।

गामा को टाटा भेजते थे हर महीने रुपये

गामा पहलवान ने अपनी पहलवानी के 50 साल के करियर में एक भी मुकाबला ना हार कर एक नया इतिहास रचा था। उन दिनों जब ना इतने संसाधन थे ना लोगों के पास इतना धन था कि वो अपने शौक को आगे तक ले जा सकें, उस समय में गामा ने अपना सब कुछ पहलवानी को दे दिया था। कहा जाता है कि जे आर डी टाटा की तरफ से हर महीने 2000 रुपये गामा पहलवान को खर्च के लिए भेजे जाते थे।

एक दिन खुशी तो अगले दिन गम

अपनी ताकत से बड़े-बड़े पहलवानों को चित कर देने वाला ‘दुनिया का सबसे बड़ा पहलवान’ दिल की बीमारी के कारण अपनी सांसें रोकने पर मजबूर हो गया। एक तरफ जहां 22 मई को गामा पहलवान के जन्म की खुशी मनाई जाती है वहीँ उसके अगले दिन मन शोक में दूब जाता है क्योंकि गामा अपने 82वें जन्मदिन के ठीक एक दिन बाद 23 मई, 1960 को इस दुनिया को अलविदा कह गए थे। http://www.satyodaya.com

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3 Comments

3 Comments

  1. gonam gupta

    May 23, 2018 at 2:53 pm

    बहुत बेहतरीन

  2. विनोद कुमार

    May 24, 2018 at 9:42 am

    बहुत बढ़िया जानकारी….
    इतिहास के पन्नों में से प्रस्तुत रोचक जानकारी…
    अब तो ये किदवंती ही लगता है..…

  3. Pingback: गामा पहलवान: कद कम बता कर जिसे किया टूर्नामेंट से बाहर, उसी ने जीता 'रुस्तम-ए-जहाँ' का ख़िताब! - The Be

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शताब्दी में पहली बार आएगा नववर्ष 2020 का ऐसा कैलेंडर

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लखनऊ: हमारे सुंदर सपनों एवं भावी संकल्पों को संजोये हुए नववर्ष हमेशा एक नए कलेवर के कैलेंडर के रूप में हमारे सम्मुख आता है। तारीखों एवं दिनों के नवीन संयोगो को समाहित किए हुआ यह नया बहुप्रतीक्षित कैलेंडर अपने आप में कई विशेषताओं से युक्त होता है। इसकी यही विशेषताएं हमारी जिज्ञासा को बढ़ाती हैं कि किस तारीख को कौन सा दिन पड़ेगा। यूं तो कैलेंडर वर्ष दर वर्ष आते-जाते रहते हैं। लेकिन कैलेंडर के आने-जाने का अपना एक नियम भी होता है। नववर्ष 2020 एक लीप वर्ष है, जिससे इस नववर्ष के कैलेंडर की विशेषताएं और भी बढ़ गई हैं।

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अपनी इन्हीं विशेषताओं को संजोये हुए नववर्ष 2020 का कैलेंडर इस शताब्दी में पहली बार आया है। इससे पूर्व यह कैलेंडर 28 वर्ष पहले पिछली शताब्दी में वर्ष 1992 में आया था। इस शताब्दी में भी यह कैलेंडर पुनः 28 वर्षों बाद 2048 व 2076 में फिर से आएगा। इस तरह इस शताब्दी में इस कैलेंडर के दोहराने की प्रक्रिया कुल तीन बार ही आएगी। विगत शताब्दी में यह कैलेंडर वर्ष 1908, 1936, 1964 व 1992 में भी कुल चार बार आया था। एक शताब्दी में किसी सामान्य वर्ष के कैलेंडर के दोहराने की प्रक्रिया अधिकतम ग्यारह बार ही आती है। जबकि एक लिपि वर्ष के कैलेंडर के दोहराने की यह प्रक्रिया एक शताब्दी में तीन या चार बार ही आती है। किन्तु, लीप वर्ष के कैलेंडर की दोहराने की प्रक्रिया एक शताब्दी में 28 वर्षों बाद ही आती है। किसी कैलेंडर के दोहराने की प्रक्रिया पूर्णतया गणितीय नियमो पर आधारित होती है।


नववर्ष 2020 के कैलेंडर पर आधारित ऐसे ज्ञानवर्धक व रोचक तथ्यों को लखनऊ पब्लिक स्कूल, लखीमपुर खीरी के गणित अध्यापक श्री अतुल सक्सेना ने अपनी स्वनिर्मित सैकड़ों वर्षों के लिए अंक-कोड कैलेंडर की तालिका के विश्लेषण के आधार पर प्रस्तुत किया है। किसी भी वर्ष के कैलेंडर को मुँह- जुबानी भी याद रखा जा सकता है। नववर्ष 2020 के लिए अंक-कोड 256240251361 है। यह अंक क्रमशः जनवरी से दिसंबर तक के सभी बारह महीनों के लिए बारह कोड हैं। किसी तारीख में उसके माह का कोड जोड़कर 7 से भाग करने पर जो अंक आता है, वही अंक उस दिन कोड होता है। शून्य से छः तक के अंक क्रमशः दिन रविवार से शनिवार तक को दर्शाते है। जैसे 26 जनवरी 2020 का दिन जानने के लिए 26 में जनवरी के माह अंक कोड 2 को जोड़ने पर आए योगफल 28 को 7 से भाग करते हैं, तो भागफल 4 और शेषफल ‘शून्य’ आता है। शेषफल ‘शून्य’ का अंक ‘रविवार’ का दिन होने का बोध कराता है। इसी प्रकार 2 जून 2020 का दिन ज्ञात करने के लिए 2 अंक में जून का माह-कोड 0 जोड़ने पर प्राप्त योगफल 2 को 7 से भाग करने पर भागफल 0 और शेषफल 2 आएगा। शेषफल 2 का अंक दिन ‘मंगलवार’ का होना बताता है।http://www.satyodaya.com

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आपका दिन शुभ हो

सूर्य ग्रहण: जानिए किन राशियों के लिए खास है आज का दिन

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आज चंद्रमा का संचार दिन रात धनु राशि में हो रहा है। वहीं आज सुबह 8 बजे से 1 बजकर 36 मिनट तक ग्रहण भी लग रहा है। ग्रहण के दौरान 6 ग्रह धनु राशि में होंगे। इसका आपकी राशि पर क्या असर होगा, देखें क्या कहते हैं आपके सितारे…

मेष: आज आपकी धार्मिक प्रवृत्ति बढ़ेगी। समाज में मान-प्रतिष्ठा बढ़ेगी। विरोधी परास्त होंगे, यात्रा लाभकारी रहेगी। परिजनों तथा मित्रों के साथ समारोह में उपस्थित रह सकते हैं। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। नए कार्य करने की प्रेरणा मिलेगी और आप उन्हें प्रारंभ कर पाएंगे। मित्रों की तरफ से शुभ समाचार मिलेंगे। भाग्य 70% साथ देगा।

वृषभ: आज का दिन मिश्रित फलदायी होगा। आज परिश्रम अधिक और लाभ कम रहेगा। कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं। यात्रा न करें और वाहन सावधानी पूर्वक चलाएं। कार्यक्षेत्र में वाद-विवाद के कारण तनाव हो सकता है। परिजनों के साथ बैठकर महत्वपूर्ण चर्चा करेंगे। विद्यार्थियों को लाभ प्राप्त होगा। भाग्य 60% साथ देगा।

मिथुन: अगर कोई नया रोजगार शुरू करने की सोच रहे हैं तो अवश्य करें, सफलता मिलेगी। अविवाहितों के विवाह की बात आगे बढ़ेगी। पराक्रम में वृद्धि होगी। नए मित्र भी बनेंगे। व्यापार-व्यवसाय और कार्यक्षेत्र में लाभ के योग बन रहे हैं। उच्चस्तरीय एवं सहयोगी व्यक्तियों से मुलाकात लाभकारी रहेगी। भाग्य 72% साथ देगा।

यह भी पढ़ें: 26 दिसंबर को लगेगा साल का आखिरी सूर्य ग्रहण, जानें सूतक का समय

कर्क: आज संघर्ष के बाद सफलता अवश्य मिलेगी। कोई नया ऑर्डर अथवा कॉन्ट्रैक्ट मिलने की संभावना है। शत्रु बलहीन रहेंगे। उच्च अधिकारियों की शुभ दृष्टि आपका उत्साह बढ़ाएगी। नौकरीपेशा लोगों को पदाधिकारियों तथा सरकार की तरफ से सहयोग मिलेगा। भाई-बहनों के साथ आनंदपूर्वक समय व्यतीत होगा। भाग्य 80% साथ देगा।

सिंह: कारोबार सामान्य रहेगा। मनोरंजन कार्य पर खर्च हो सकता है। आज आपको अपनी प्रतिभा का लाभ मिलेगा और आपकी पहचान बनेगी। नई योजनाएं लाभ देंगी। बिगड़े कार्य बनने लगेंगे और धर्म-कर्म में रुचि बढ़ेगी। मान-प्रतिष्ठा का लाभ मिलेगा। मित्रों के साथ आप खुशहाल रहेंगे। भाई-बंधुओं से मेलजोल बना रहेगा। भाग्य 72% साथ देगा।

कन्या: आज का दिन मध्यम फलदायी होगा। आज कोई नया कार्य न करें। जोखिमपूर्ण निवेश करने से बचें। पूरे दिन किसी से वाद-विवाद में न पड़ें। क्रोध पर नियंत्रण रखें। किसी रमणीय स्थल पर पर्यटन का आयोजन होगा। परिजनों के लिए खर्च करने का प्रसंग उपस्थित हो सकता है। भाग्य 65% साथ देगा।

तुला: आज पराक्रम में वृद्धि होगी। आपका मनोबल बढ़ेगा और कारोबार में बेहतरी आएगी। नए संपर्क बनेंगे और लाभकारी रहेंगे। भाइयों के बीच प्रेम और सहयोग बढ़ेगा। नए कार्यों में सफलता प्राप्त होने की संभावना है। पारिवारिक जीवन के विषयों को लेकर चिंतित हो सकते हैं। कहीं से धन लाभ हो सकता है। भाग्य 75% साथ देगा।

वृश्चिक: आज का दिन मिश्रित फलदायी होगा। लेन-देन के कार्यों में सावधान रहें। धन निवेश करते समय विशेष सावधानी बरतें। आज किसी को उधार न दें, क्योंकि आज दिए हुए धन के वापस आने की आशंका कम है। महत्‍वपूर्ण दस्तावेजों को आज बाहर निकालने से बचना चाहिए। भाग्य 59% साथ देगा।

धनु: आज प्रयास अथवा स्वयं कोशिश करने से प्रत्येक कार्य में सफलता मिलेगी। व्यापार-व्यवसाय में उन्नति के अवसर दिखाई दे रहे हैं। सभी का सहयोग मिलेगा। कार्यों में सफलता आज अवश्य प्राप्त होगी। कलाकार एवं कारीगरों को उनकी कला का प्रदर्शन करने का अवसर मिलेगा। भाग्य 81% साथ देगा।

मकर: आज का दिन मध्यम फलदायी होगा। खर्च की अधिकता रहेगी। किसी न किसी कारण से अनावश्यक खर्च हो सकता है। व्यर्थ की यात्रा भी हो सकती है। दैनिक कार्य में विघ्न आ सकते हैं। स्त्री मित्रों के पीछे धन खर्च हो सकता है। विद्यार्थियों के लिए दिन अच्छा रहेगा। भाग्य 60% साथ देगा।

कुंभ: आज आपकी आमदनी में बढ़ोतरी होगी। धन लाभ होगा। जोखिमपूर्ण निवेश करें तो लाभ अवश्य मिलेगा। ईश्वर की प्रार्थना तथा जप करने से राहत महसूस होगी। साथियों से सुख एवं आनंद की प्राप्ति होगी। मित्रों व स्वजनों से मुलाकात हो सकती है। किसी महत्वपूर्ण काम में सफलता मिलेगी। आर्थिक लाभ एवं भाग्यवृद्धि के योग हैं। भाग्य 78% साथ देगा।

मीन: आज आपका सितारा अनुकूल है। लाभ होगा और सफलता प्राप्त होगी। कामकाज में आ रहीं बाधाएं दूर होंगी। गृहस्थ जीवन में मधुरता बनी रहेगी। कार्यालय तथा व्यावसायिक स्थल पर आपकी प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। प्रमोशन के योग हैं। गृहस्थ जीवन में आनंद प्राप्त होगा। मित्रों के साथ मुलाकात होगी। भाग्य 70% साथ देगा।– (ज्योतिषाचार्यः आशुतोष वाष्डेय)http://www.satyodaya.com

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संस्कृति

26 दिसंबर को लगेगा साल का आखिरी सूर्य ग्रहण, जानें सूतक का समय

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साल का तीसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण 26 दिसंबर 2019 को लगेगा। जब भी ग्रहण की बात होती है। तो पूछा जाता है कि ग्रहण कब है, तो आपको बता दें कि साल 2019 का अंतिम सूर्य ग्रहण 26 दिसंबर के दिन होगा। यह भारत के कई हिस्सों में दिखेगा। सूर्य ग्रहण देश के दक्षिणी भाग में दिखेगा। अब बात करते हैं कि सूर्य ग्रहण किस समय दिखेगा या सूर्यग्रहण का समय क्या होगा। भारतीय मानक समय अनुसार आंशिक सूर्यग्रहण सुबह 8 बजे शुरू होगा। सूर्य ग्रहण की वलयाकार अवस्था दोपहर 12 बजकर 29 मिनट पर समाप्त होगी, जबकि ग्रहण की आंशिक अवस्था दोपहर एक बजकर 36 मिनट पर समाप्त होगी।


यह भी पढ़ें:महासंयोग लेकर आ रहा साल का आखिरी सूर्य ग्रहण, जानिए आपकी राशि पर क्या होगा असर

सूर्य ग्रहण में सूतक काल
सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई देने के कारण सूतक का असर रहेगा। सूतक का समय ग्रहण के एक दिन पहले ही शुरू हो जाएगा। सूतक 25 दिसंबर की शाम 5:33 मिनट से शुरू होगा और अगले दिन सुबह 10:57 पर सूर्य ग्रहण की समाप्ति के बाद खत्म होगा। ग्रहण में सूतक का विशेष महत्व होता है। हिंदू धर्म में सूतक लगने पर कई तरह के कार्यो को नहीं किया जा सकता। सूतक के समय को अशुभ समय माना गया है।

इन जगहों पर दिखाई देगा सूर्य ग्रहण

26 दिसंबर को लगने वाला ग्रहण भारत समेत यूरोप, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, पूर्वी अफ्रीका में दिखाई देगा। 

क्या है ‘सूर्य ग्रहण’?

सूर्य की परिक्रमा पृथ्वी करती है और चन्द्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता ह। परिक्रमा के दौरान एक दूसरे के बीच में ये आते जाते रहते हैं। जब सूर्य और पृथ्वी के बीच चन्द्रमा आ जाए तो इसे सूर्य ग्रहण कहते हैं। इसका असर पृथ्वी और पृथ्वी के लोगों पर पड़ता है। आइए जानते हैं इस दौरान आपको किन बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है।http://www.satyodaya.com

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January 6, 2020, 10:52 am
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