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संस्कृति

होली स्पेशल: जानिये होली से पहले मनाये जाने वाले होलाष्टक की क्या है कहानी…

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फाल्गुन शुक्लपक्ष अष्टमी 14 मार्च से फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा 21 मार्च तक होलाष्टक रहेगा। भारत में कई जगह होलाष्टक शुरू होने पर लोग एक पेड़ की शाखा काट कर उसमें रंग-बिरंगे कपड़ों के टुकड़े बांध देते हैं और उसे जमीन में गाढ़ देते हैं । इसे भक्त प्रहलाद का प्रतीक माना जाता है ।

सत्ययुग में हिरण्यकश्यप ने अपने घोर तप से ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त किया था। वरदान मिलने के बाद अहंकारी हुए हिरण्यकश्यप ने सभी देवताओं को परास्त कर दिया था। वहीं दूसरी तरफ भगवान विष्णु ने अपने भक्त की रक्षा व उद्धार के लिये अपना अंश हिरण्यकश्यप की पत्नी कयाधू के गर्भ में पहले ही स्थापित कर दिया था। स्थापित किये अंश से हिरण्यकश्यप को पुत्र के रूप में प्रह्लाद की प्राप्ति हुई थी। हिरण्यकश्यप को यह कदापि नहीं पसन्द था कि प्रह्लाद विष्णु की भक्ति में लीन रहे। हिरण्यकश्यप ने भगवान विष्णु की भक्ति में लीन होने से रोकने के लिए प्रह्लाद को फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी को बंदी बना लिया था । बंदी बनाये जाने के सात दिन बाद आठवें दिन हिरण्यकश्यप की परेशानी को देखते हुए उसकी बहन होलिका ने उनकी मदद करने की सोची| होलिका को अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था। वह प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई लेकिन पासा उल्टा पड़ गया और होलिका स्वयं अग्नि में भस्म हो गई।जिसके कुछ ही दिनों बाद नरसिंह भगवान ने हिरण्यकश्यप का वध किया। तब से लेकर अब तक भक्त की भक्ति पर आए संकट के कारण इन आठ दिनों को (फाल्गुन शुक्लपक्ष अष्टमी से फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा ) लोगों के बीच होलाष्टक के रूप में मनाया जाता है। इस होलाष्टक की अवधि में कोई भी शुभ कार्य करना उचित नहीं माना जाता है।

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संस्कृति

जाने क्या होता है अंतरराष्ट्रीय संग्राहालय दिवस

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लखनऊ । संग्राहालय हमारे राजनीतिक, धार्मिक, सांस्कृतिक व ऐतिहासिक महत्व की चीजों को सुरक्षित रखता है । हर साल 18 मई को दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय संग्राहालय दिवस मनाया जाता है । इंटरननैशनल ऑफ म्यूजियम आइकॉम की अडवाइजरी कमिटी हर साल इस कार्यक्रम के लिए एक थीम तय करती है ।

अंतरराष्ट्रीय संग्राहलय दिवस का इतिहास


1999 में इंटरननैशनल ऑफ म्यूजियम काउंसिल ऑफ म्यूजियम आइकॉम ने अंतरराष्ट्रीय संग्राहालय दिवस की शुरुआत की । 1977 से फिर 18 मई को अंतरराष्ट्रीय संग्राहालय दिवस मनाया जाने लगा । हर साल दुनिया भर के संग्राहालय अपने- अपने देशों के अंदर इसका आयोजन करते हैं । वे कार्यक्रम के दौरान संग्राहालय के महत्त्व को लेकर जागरूकता फैलाते हैं । 2009 में 90 से ज्यादा देशों के 20, 000 संग्राहालय हिस्सा लिया, 2010 में 98 देश, 2011 में 129 देशों के करीब 30,000 संग्राहालय ने हिस्सा लिया ।

अंतरराष्ट्रीय संग्राहालय दिवस का क्या होता है उद्देश

इस दिन को मनाने का कारण समाज को संग्राहालय के महत्तव से अवगत करना होता है । कहतें हैं कि संग्राहालय के पास भले ही राजनीतिक शक्तियां नहीं होती है लेकिन उसके पास राजनितिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करने की संभावना होती है । शुरूआत में संग्राहालयों की भूमिका महत्त्वपूर्ण चीजों का संग्रह करना और उसको खंडरित करके रखना था । अब संग्रहलयों द्वारा बदलती दुनिया के लिए एक आकार्रइव के तौर पर उन संग्रहों का इस्तेमाल किया जाता है ।

लोग क्या करते हैं इस दिन

कई संगठन ऐसे हैं जो इस दिन संग्राहालयों का मुफ्त ट्रिप आयोजित करतें हैं । लोग अपने दोस्त, परिवार और रिश्तेदारों के साथ भी संग्राहालयों का दौरा करते हैं ।

कौन है इंटरननैशनल काउंसिल ऑफ म्यूजियम आइकॉम

ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्त्व की चीजों को संजोकर रखने वाला यह मुख्य संगठन है । दुनिया भर में इनकी 31 अंतरराष्ट्रीय कमेटियां हैं । सभी कमेटियां संग्रहालय से जुड़े अलग- अलग मैदानों में विशिष्टता रखती हैं । यह संगठन प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरहरों की रक्षा औए उनके प्रचार- प्रसार को प्रतिबद्ध है । कमेटियों के जिम्मे व्यापक पैमाने पर अनुसंधान का काम है । इसके अलावा यह संगठन अहम् चीजों की अवैध तस्करी को रोकने के लिए भी काम करता है । और आपातकालीन की स्थिति में संग्रहालयों को मद्द भी मुहैया कराता है ।

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क्या होता है संग्रहालय का महत्त्व


हमारे सांस्कृतिक दरोहर को सुरक्षित रखने और उनके प्रचार- प्रसार में संग्रहालय अहम् भूमिका निभाता है । हमारे ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्त्व की चीजों और सामग्रियों को संग्रहालय इकठ्ठा करता है । और उनको सुरक्षित रखता है । इसमें कोई शक नही है कि संग्रहालय प्राचीन कलाकृतियों, नक्काशियों , मूर्तिकला अन्य चीज, इतिहास आदि का भंडारगृह है
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संस्कृति

दुख, दरिद्रता और पापों से मुक्ति देकर ज्ञान, ऊर्जा और सुख-समृद्धि की ओर ले जाती है बुद्ध पूर्णिमा…

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बुद्ध पूर्णिमा एक बड़ा त्योहार है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वैशाख माह को पवित्र माह माना जाता है। वैशाख शुक्ल पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा या पीपल पूर्णिमा कहा जाता है जिसे हिन्दू और बौद्ध दोनों धर्म के अनुयायी बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं। कहते हैं कि इसी दिन बौद्ध धर्म के संस्थापक महात्मा बुद्ध ने जन्म लिया था। वहीं बुद्ध को श्री हरि विष्णु का 9वां अवतार माना जाता है, इसलिए हिन्दुओं के लिए भी इस पूर्णिमा का विशेष महत्व है। गौतम बुद्ध के जन्मोत्सव के कारण बुद्ध पूर्णिमा को बुद्ध जयंती और ‘वेसाक’ उत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन उनको बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई थी और यही उनका निर्वाण दिवस भी है। माना जाता है कि इस तिथि पर जल और वातावरण में विशेष ऊर्जा आ जाती है। इस दिन चंद्रमा पूर्णिमा तिथि पर पृथ्वी और जल तत्व को पूर्ण रूप से प्रभावित करता है। चन्द्रमा इस तिथि के स्वामी होते हैं, अतः इस दिन हर तरह की मानसिक समस्याओं से मुक्ति मिल सकती है।

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कैसे मनाते हैं बौद्ध धर्म के लोग बुद्ध पूर्णिमा?

भगवान बुद्ध ही बौद्ध धर्म के संस्थापक हैं। यह बुद्ध अनुयायियों के लिए बहुत बड़ा त्यौहार है। इस दिन अनेक प्रकार के समारोह आयोजित किए गए हैं। अलग-अलग देशों में वहां के रीति- रिवाजों और संस्कृति के अनुसार कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। श्रीलंका के लोग इस दिन को ‘वेसाक’ उत्सव के रूप में मनाते हैं इस दिन बौद्ध घरों में दीपक जलाए जाते हैं और फूलों से घरों को सजाया जाता है। दुनियाभर से बौद्ध धर्म के अनुयायी बोधगया आते हैं और प्रार्थनाएं करते हैं। इस दिन बौद्ध धर्म के धर्मग्रंथों का निरंतर पाठ किया जाता है। बोधिवृक्ष की पूजा की जाती है। उसकी शाखाओं पर हार और रंगीन पताकाएं सजाई जाती हैं। जड़ों में दूध और सुगंधित पानी डाला जाता है। वृक्ष के आसपास दीपक जलाए जाते हैं।


बुद्ध पूर्णिमा का विशेष महत्व –

इस दिन को दैवीयता का दिन माना जाता है।  इसी दिन भगवान बुद्ध का जन्म भी हुआ था।  इस दिन ध्यान दान और स्नान विशेष लाभकारी होता है। इस दिन ब्रह्म देव ने काले और सफ़ेद तिलों का निर्माण भी किया था। अतः इस दिन तिलों का प्रयोग जरूर करना चाहिए।

बुद्ध पूर्णिमा से जुड़ी मान्यताएं

1- माना जाता है कि वैशाख की पूर्णिमा को ही भगवान विष्णु ने अपने 9वे अवतार के रूप में जन्म लिया था।

2- मान्यता है कि भगवान कृष्ण के बचपन के दोस्त सुदामा वैशाख पूर्णिमा के दिन ही उनसे मिलने पहुंचे थे।

 3- इसी दौरान जब दोनों दोस्त साथ बैठे तब कृष्ण ने सुदामा को सत्यविनायक व्रत का विधान बताया था। सुदामा ने इस व्रत को विधिवत किया और उनकी गरीबी नष्ट हो गई।

 4- इस दिन धर्मराज की पूजा करने की भी मान्यता है। कहते हैं कि सत्यविनायक व्रत से धर्मराज खुश होते हैं. माना जाता है कि धर्मराज मृत्यु के देवता हैं इसलिए उनके प्रसन्न् होने से अकाल मौत का डर कम हो जाता है।

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सुखी जीवन के लिए बुद्ध के सूत्र

वैशाख पूर्णिमा भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़ी तीन अहम बातों – बुद्ध का जन्म,  बुद्ध को ज्ञान प्राप्ति एवं बुद्ध का निर्वाण के कारण भी विशेष तिथि मानी जाती है। गौतम बुद्ध ने चार सूत्र दिए उन्हें ‘चार आर्य सत्य’ के नाम से जाना जाता है। पहला दुःख है, दूसरा दुःख का कारण, तीसरा दुःख का निदान और चौथा मार्ग वह है, जिससे दुःख का निवारण होता है। भगवान बुद्ध का अष्टांगिक मार्ग वह माध्यम है, जो दुःख के निदान का मार्ग बताता है। उनका यह अष्टांगिक मार्ग ज्ञान, संकल्प, वचन, कर्म, आजीव, व्यायाम, स्मृति और समाधि के सन्दर्भ में सम्यकता से साक्षात्कार कराता है।

दु:खों के कारण बुद्ध ने बताया ये वजह

गौतम बुद्ध ने मनुष्य के बहुत से दु:खों का कारण उसके स्वयं का अज्ञान और मिथ्या दृष्टि बताया है। महात्मा बुद्ध ने पहली बार सारनाथ में प्रवचन दिया था। उनका प्रथम उपदेश ‘धर्मचक्र प्रवर्तन’ के नाम से जाना जाता है, जो उन्होंने आषाढ़ पूर्णिमा के दिन पांच भिक्षुओं को दिया था।

भेदभाव रहित होकर हर वर्ग के लोगों ने महात्मा बुद्ध की शरण ली और उनके उपदेशों का अनुसरण किया। कुछ ही दिनों में पूरे भारत में ‘बुद्धं शरणं गच्छामि, धम्मं शरणं गच्छामि, संघ शरणम् गच्छामि’ का जयघोष गूंजने लगा। उन्होंने कहा कि केवल मांस खाने वाला ही अपवित्र नहीं होता बल्कि क्रोध, व्यभिचार, छल, कपट, ईर्ष्या और दूसरों की निंदा भी इंसान को अपवित्र बनाती है। मन की शुद्धता के लिए पवित्र जीवन बिताना जरूरी है।

-बुद्ध पूर्णिमा के दिन ना करे ये काम

बुद्ध पूर्णिमा के दिन मांस का सेवन ना करें।

 इस दिन घर में कलह करने से बचना चाहिए।

इस दिन किसी को अपशब्द कहने से बचें।

 इस दिन झूठ नहीं बोलना चाहिए।

बुद्ध पूर्णिमा के दिन कुशीनगर में लगता है विशाल मेला

बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर कुशीनगर के महापरिनिर्वाण मंदिर में एक महीने तक चलने वाले विशाल मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें देश विदेश के लाखों बौद्ध अनुयायी यहां पहुंचते हैं। वहीं आज के दिन बोधगया में जिस बोधिवृक्ष के नीचे भगवान बुद्ध को बुद्धत्व की प्राप्ति हुई थी इस वृक्ष की जड़ों में दूध और सुगंधित पानी का सिंचन करके पूजा की जाती है। इसी दिन भगवान बुद्ध की जयंती और निर्वाण दिवस भी बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है।

स्नान का विशेष महत्व

बुद्ध पूर्णिमा के दिन मंदिर में जाकर पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। आज के दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि आज के दिन गंगा स्नान करने से सभी पापो से मुक्ति मिल जाती है। http://www.satyodaya.com  

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लाइफ स्टाइल

जानें कुछ ऐसे शब्दों का फुलफार्म जिसके वजह से आपको डेली ना होना पड़े शर्मिंदा

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लखनऊ । हम लोग अक्सर अपने डेली लाइफ में बहुत सारे ऐसे शब्दों का प्रयोग करते है जिसका फुलफार्म हमको पता नही होता है । जैसे Wi-Fi, gsm, cdma, jpeg, ok, pnr इन सब शब्दों को हम अकसर बोलचाल में इस्तेमाल करते हैं । लेकिन बहुत लोगों को इसका पूरा मतलब नहीं पता होता है । जिससे कई बार हम सबको शर्मिंदगी भी उठानी पड़ सकती है । इसलिए हम आपको बता रहे हैं कुछ ऐसे कॉमन Abbreviations की फुलफॉर्म के बारे में ।

ifsc
indian financial system code- (इंडियन फाइनैंशल सिस्टम कोड)

gsm
Global system for mobile communication – (ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल कम्यूनिकेशन)

i.q.
intelligence quotient – (इंटेलिजेंस कोशंट)

jpeg
joint photographic expert group- (जॉइंट फटॉग्रफिक एक्सपर्ट ग्रुप)

wi-Fi
इस का फुल फॉर्म wi-Fi – (वायरलेस फिडलिटी)

led
light emitting diode- (लाइट एमिटिंग डायोड)

trp
television rating point – (टेलिविजन रेटिंग पॉइंट)

ufo
unidentifiable flying object – (अनआइडेंटिफिएबल फ्लाइंग ऑब्जेक्ट)

Lcd
liquid crystal display- (लिक्विड क्रिस्टल डिस्पले)

rip
rest in peace- (रेस्ट इन पीस)

PNR
passenger name record- (पैसेंजर नेम रिकॉर्ड)

gif
graphic interchange format- (ग्राफिक इंटरचेंज फॉर्मेट)

pdf
portable document format- (पोर्टेबल डॉक्युमेंट फॉर्मेट)

Ok
oll korrect- (ऑल करेक्ट)

cdma
code division multiple access- (कोड डिविज मल्टीपल एक्सेस)

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