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संस्कृति

जो बंदिशों और छोटे मोटे खतरों से भयभीत हो जाएं उन्हें दूसरी नौकरी तलाश लेनी चाहिए

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5 मई को पूरे विश्व में वर्ल्ड कार्टूनिस्ट डे के रूप में मनाया जाता है। हम सब जानते हैं कि आज के समय में कार्टून हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन गए हैं। हर रोज़ जब तक अख़बार के पन्नों पर उस दिन का कार्टून ना देखें तब तक दिन शुरू ही नहीं होता। व्यंग की तेज धार से सजा कार्टून अमूक हो कर भी सौ आवाज़ों से ज्यादा शोर पैदा करने की क्षमता रखता है। आये दिन घटित होने वाली घटनाओं पर जो वार बड़े बड़े आलेख नहीं कर पाते उससे कहीं ज्यादा गहरी चोट छोटा सा कार्टून कर जाता है। यही कार्टून थे जिन्होंने समय समय पर सत्ता के गलियारों में हडकंप मचा दिया। सत्ताधारियों को इन नन्हें कार्टूनों ने इस तरह से भयभीत किया कि उन्हें अपनी पॉवर का इस्तेमाल करना पड़ा। साल 1949 में छपे शंकर वीकली पत्रिका के एक कार्टून में डॉक्टर आम्बेडकर एक चाबुक लिए एक घोंघे पर बैठे हैं जबकि उनके पीछे उस समय के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी चाबुक लिए खड़े हैं। यह कार्टून जाने-माने कार्टूनिस्ट केशव शंकर पिल्लई का उकेरा हुआ है। मान जाता है कि कार्टून का मकसद संविधान लिखने की प्रक्रिया में हुई कथित देरी को दर्शाना था। यह कार्टून एनसीईआरटी की 11वीं कक्षा की पाठ्य पुस्तक के एक अध्याय में था। इस कार्टून को ले कर सांसदों ने संसद में हंगामा किया तथा इस कार्टून को पाठ्यक्रम से हटा दिया गया। दूसरी तरफ कार्टून बनाने के मामले में ही कानपूर के कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी को गिरफ्तार कर लिया गया था। हाल ही में छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार कमल शुक्ला पर एक कथित कार्टून को शेयर करने को लेकर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। वहीं राजधानी रायपुर के पत्रकार ब्यासमुनि द्विवेदी पर खनन माफियाओं द्वारा प्राणघातक हमले की खबर भी आई थी। उनकी गाड़ी को भी माफियाओं ने आग के हवाले कर दिया। ऐसे में सवाल ये उठता है कि ये छोटे छोटे कार्टून क्या सत्ता के लिए इतना बड़ा खतरा हैं कि उन कार्टूनों को हटा दिया जाता है और उन्हें बनाने वाले कार्टूनिस्टों को जेल में डाल दिया जाता है ? विश्व कार्टूनिस्ट डे पर हमने सत्योदय की तरफ से कुछ जाने माने कार्टूनिस्टों से आज के समकालीन परिदृश्य में कार्टून की दशा दिशा से जुड़े कुछ सवाल पूछे। आइये जानते हैं कि इन सवालों पर इन सभी का क्या कहना है :

निम्नलिखित चारों सवाल के जवाब सभी कार्टूनिस्टों ने अपने अपने हिसाब से दिए :

1. जैसा कि पिछले कुछ वर्षों में कई कार्टूनिस्टों की गिरफ्तारियां हुईं हैं, ऐसे में एक तरफ जहां अभिव्यक्ति की आज़ादी को ले कर देश में सवाल उठ रहे हैं तो क्या इन गिरफ्तारियों से ये माना जाए कि सत्ता इन कार्टूनों से भी डर रही है ?

2. एकेक कार्टूनिस्ट के रूप में आप कार्टूनों को समाचार पत्रों के लिए कितना महत्वपूर्ण मानते हैं ?

3. आप कार्टूनों की क्या ताकत आंकते हैं ?

4. विश्व कार्टूनिस्ट डे पर आप क्या सन्देश देना चाहेंगे ?

सभी के जवाब कुछ इस तरह थे :

पवन टून जी (कार्टूनिस्ट – दैनिक हिंदुस्तान)

1. जैसा कि हम देख रहे हैं जिस तरह से पहले कार्टूनों का प्रकाशन चलता था या अख़बारों में पहले जितने भी कार्टूनिस्ट रखे जाते थे, वो जिस खुलेपान से काम करते थे वो खुलापन अब अख़बारों से धीरे धीरे गायब हो रहा है। इसका परिणाम यह निकला कि अब सोशल मीडिया मुख्य प्लेटफार्म बन गया और लोग वहां अपने हिसाब से अपनी अपनी बात रख रहे हैं। लेकिन खतरे जैसी कोई बात नहीं है, ये अलग बात है कि कोई भी हो उसे अपना दायरा सिमित करना पड़ता है। दायरे से बाहर जा कर कुछ भी करना या कहना थोड़ा असहनीय हो जाता है।

2. अभी की जो स्थिति है, उसमे मीडिया हाउसिस रिस्क लेने को तैयार नहीं हैं, अब ये मैं नहीं कह सकता कि इन्हें कहीं से निर्देश मिलता है या फिर ये स्वयं से ऐसा करते हैं। हमने जिन लोगों पर कार्टून बनाये उनकी तरफ से कभी समस्या नहीं रही, असल में खुद संस्थाओं को लग रहा है कि डर कर रहना चाहिए इसीलिए कार्टूनिस्टों पर ये सभी सीमाएं अपने ही संस्थानों द्वारा निर्धारित कर दी गयीं। जब कोई भी व्यक्ति खुद के मन से काम कर रहा होता है तो उसके द्वारा किया गया काम किसी ना किसी मंच द्वारा बाहर निकलता ही है, यही कारण रहा है कि अब बेहतरीन कम यदि नज़र आ रहा है तो वो ज़्यादातर सोशल मीडिया के द्वारा ही आ रहा है। ये मंच एक ऐसा मंच है जहां किसी पर किसी का कोई दवाब नहीं है।

3. देखिये कार्टूनों के लिए आपको बहुत ज्यादा शब्द देने की ज़रूरत नहीं है इसमें अपनी बात को केवल सिंबॉलिक तरीके से दिखाना होता है। कार्टून हर वर्ग के लोगों को ये समझाने में सक्षम हैं कि आपके आसपास का माहौल कैसा है, फिर चाहे कोई पढ़ा लिखा हो या फिर अनपढ़ व्यक्ति हो उसको समझाने के लिए कार्टून एक महत्वपूर्ण विधा साबित होती है।

4. मेरे हिसाब से जिस तरह से मीडिया एक बंदिश की तरफ जा रहा है ऐसा नहीं होना चाहिए और कार्टूनिस्टों को खुल कर काम करना चाहिए। पहले भी ऐसा ही होता रहा है और आज भी होना चाहिए। जो आपकी क्षमता है उसे सही तरीके से पेश करें। धन्यवाद।

काजल कुमार (कार्टूनिस्ट)

1. कार्टून पहले भी खतरे के रूप में ही देखा जाता रहा है, कार्टूनों में किसी भी व्यक्ति को भेंद देने की सबसे अधिक क्षमता है। जैसे जैसे समाज में सहनशीलता की कमी होती जा रही है वैसे वैसे कार्टूनिस्टों पर इस तरह की प्रक्रिया आम हो रही है, इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है। पहले कार्टूनों को बड़े बड़े लीडर सपोर्टिवली लेते थे मगर आज के लीडर किसी भी व्यंग को झेलने में असक्षम हैं, ऐसे में ये भी अभिव्यक्ति की आजादी पर मंडरा रहे खतरों में से एक है।

2. मैं कार्टून को सम्पादकीय से कम नहीं मानता। सम्पादकीय तो हर कोई नहीं पढ़ पता लेकिन कार्टून लगभग सभी लोग देखते हैं और यही इसकी खूबी है। तो इस हिसाब से देखें तो ये सम्पादकीय से ज्यादा प्रभावशाली होता है।

3. मूक कार्टून सबसे ज्यादा प्रभावशाली होते हैं क्योंकि ये भाषा और देशकाल की सीमाओं से परे निकल जाते हैं और ऐसे में इसके पाठक शब्द युक्त कार्टून से ज्यादा होते हैं क्योंकि भाषा युक्त कार्टून तो भाषा को समझने वालों तक ही सीमित रह जाते हैं।

4. सन्देश मात्र इतना ही है कि कार्टूनिस्टों को अपना कर्म करते रहना चाहिए। कार्टूनिस्टों पर होने वाले हमले या उनकी अभिवयक्ति पर अंकुश लगाना ये तो होता रहा है और आगे भी होता ही रहेगा। अगर इन सब से कोई डर जाता है तो उसे इस क्षेत्र में होने का अधिकार नहीं है, उसे तो फिर कहीं दस से पांच की नौकरी कर लेनी चाहिए क्योंकि ये क्षेत्र उसके लिए नहीं है जो ऐसी घटनाओं से विचलित हो जाते हैं। विरोध तो चलता रहता है इससे घबराना नहीं चाहिए।

राम बाबू (कार्टूनिस्ट)

1. लोकतंत्र में किसी भी व्यक्ति को अपनी बात रखने का हक है। खास तौर पर वो बात जो सर्वजन के हित में लागू होती है। ये अभिव्यक्ति की आज़ादी का सवाल तो है ही लेकिन देखने वाली बात ये है कि इस लोकतंत्र में कोई बात जितनी आसानी से कह दी जाती थी अब उसमें भी मुश्किलें आरही हैं।फिर चाहे वो एक कार्टूनिस्ट हो या एक लेखक हो चाहे जो भी हो। अगर सरकार को लगता है कि ये हमारी आलोचना कर रहे हैं हमारे लिए खतरा है तो उस पर अंकुश लगा दिया जाता है। ये सब सरकार ही कर रही है सरकार का मतलब सत्ता फिर भले ही वो किसी पार्टी की हो। तो सत्ता को जब भी लगेगा कि किसी भी कार्टूनिस्ट की आवाज जनता का ज्यादा समर्थन कर रही है और उनके लिए खतरा बन रही है तो जाहिर सी बात है वो अंकुश लगाएंगे ही। असल मायने में तो ये झूठे और नकली लोकतंत्र का दौर है, लोग अपने अधिकारों के लिए सड़क तक आते हैं तो उन पर लाठीचार्ज किया जाता है। आज खतरा ज्यादा है, पहले कुछ सीमा तक संभावनाएं थीं वो भी अब कठिन हो रही हैं। ये अभिव्यक्ति की आज़ादी पर एक दम से हमला है। या यूं कहें कि जो थोड़ी सी आजादी मिली हुई थी ये उस पर हमला है।

2. एक कार्टून की किसी समाचार पत्र में उतनी ही भूमिका है जितनी कि सम्पादकीय की। कार्टून उतना ही महत्वपूर्ण हैं जितना उस समाचार पत्र का सम्पादकीय

3. कार्टून की ताकत किसी भी खबर से ज्यादा है। खबर में पूरी जानकारी दी गयी होती है लेकिन कार्टून किसी भी मुद्दे पर एक टिप्पणी दे देता है। मान लीजिये अभी भाजपा सरकार केंद्र में है, वो गाय को बहुत पवित्र मानती है, लेकिन आप देखेंगे कि अधिकतर गांवों या देहातों में पशु चिकित्सालय नहीं हैं। दिखावे के लिए गाय को पवित्र मान रहे हैं लेकिन उसके लिए कुछ खास नहीं किया जा रहा। गाय मात्र एक मुद्दा बन कर रह गयी है। अब इसी पर कोई व्यंग करते हुए कार्टून बना दे तो जाहिर सी बात है उन्हें तकलीफ होगी।

4. सभी कार्टूनिस्टों को मेरा एक सन्देश है कि एक कार्टूनिस्ट अपने अभिव्यक्ति का जैसे इस्तेमाल करता है वो लेखक या कलाकार से अलग नहीं होता, ऐसे में ये खतरा सबके लिए बराबर है। तो इसके लिए जब तक लोग संगठित नहीं होंगे तब तक बात नहीं बनेगी। अखबार के मालिक भी किसी न किसी तरह राज्य सत्ता के साथ रहते हैं तो अख़बार में काम करने की एक सीमा है। ऐसे में कार्टूनिस्टों को स्वतंत्र रूप से काम करने की आवश्यकता है तभी इस पर कुछ किया जा सकता है है।

माधव जी (कार्टूनिस्ट)

1. नहीं मुझे नहीं लगता कार्टूनों से ऐसा कुछ खतरा है। अभिव्यक्ति कभी किसी के लिए खतरा नहीं होती। देखिए हर चीज को मर्यादा में रहना चाहिए। अभिव्यक्ति का मतलब अनर्गल प्रलाप नहीं होता। अभिव्यक्ति का मतलब होता है जो जिम्मेदारी है उसको निभाएं और जब उसको निभाते हैं तो वो खतरा नहीं होता बल्कि वो जरूरत होती है। ये तो सही बात है कि कार्टूनों को अब उतनी सहजता से नहीं लिया जाता जितनी सहजता से पहले लिया जाता था। जैसे कभी जवाहर लाल नेहरू जी लिया करते थे। एक बार काफी समय से शंकर पिल्लई जी ने उनके कार्टून नहीं बनाये थे तो नेहरू जी ने उन्हें बुला कर कहा कि हमारे कार्टून क्यों नहीं बना रहे हो, हमसे क्या नाराजगी, हमारी उपेक्षा क्यों कर रहे हैं? पहले रंगा जैसे कार्टूनिस्ट सांसद में हुआ करते थे लेकिन अब वो चीज रह नहीं गयी। अब अखबारवाले भी व्यापारी हो गए हैं। पहले पत्रकारिता एक आन्दोलन होता था मगर अब बस ये पैसा कमाने का जरिया हो गया है। तो उनको ऐसा आदमी क्यों चाहिए होगा जो सही और तीखी बात कहे। आज कल किसी को सही बात नहीं अच्छी लगती, किसी को उसकी सही तस्वीर दिखा दीजिये तो वो भड़क उठेगा। और कभी कभी ऐसा भी होता है कि जो रचना कर्मी हैं वो अपनी सीमाओं से आगे भी बढ़ जाते हैं।

2. कार्टून समाचार पत्रों का बहुत महत्वपूर्ण अंग है। कार्टून एक स्वतन्त्र अभिव्यक्ति का साधन है। वो तीखी प्रतिक्रिया देता है। वो आपको कुरेदता है। किसी मुद्दे को पढने से ज्यादा उसे आँखों से देखना ज्यादा प्रभावी होता है।

3. कार्टून बहुत प्रभावशाली हैं। ख़बरों में पूरी जानकारी देनी पड़ती है उसे पढना पड़ता है तब जा कर लोग समझ पाते हैं किन्तु कार्टून में कुछ भी ना लिखा हो फिर भी वो अपनी पूरी बात कह देता है।

राजेन्द्र धोड़पकर (कार्टूनिस्ट)

1. सत्ता के लिए कार्टून हमेशा खतरा था। क्योंकि व्यंग अपने आप में सबसे बड़ा हथियार है फिर भला वो किसी भी विधा में हो। ऐसे में ये हमेशा से सत्ता के लिए खतरा रहा है, सत्ता जैसे ही निरंकुश होती है तो कार्टूनिस्टों पर हमला करती है, और ये पहले भी होता रहा है। इसीलिए आप देखिये पिछले कई वर्षों में अख़बारों में कार्टून प्रकाशित होना बहुत कम हो गए हैं। क्योंकि अखबार भी ये नहीं चाहती कि ऐसा कुछ किया जाए जिससे खतरा बढ़े। अख़बार में अगर कार्टून होगा तो वो व्यंग जरूर करेगा और वो सत्ता के खिलाफ जायेगा। तो आमतौर पर माहौल बहुत अच्छा नहीं है मगर दूसरे नजरिये से देखा जाये तो ये बात अच्छी है कि आम लोग कार्टूनों के प्रति रिस्पांसिव हैं। ऐसे में समाज के लिए खतरा तो उठाना पड़ता है।

2. अख़बार में कार्टून बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। ऐसा मैंने बहुत से लोगों से सुना है कि हम अख़बार में सबसे पहले कार्टून देखते हैं। तो जिन अख़बारों में कार्टून होता है लोग उसे सबसे पहले देखते हैं, क्योंकि वो कार्टून जनता की बात कहता है। और वो एक ऐसी अभिव्यक्ति है जिस पर अंकुश कम से कम होता है। मैंने पहले ही कहा कि कार्टून अख़बारों में पहले के मुकाबले कम आ रहे हैं, ये इतना महत्वपूर्ण हैं कि कईयों को लगता है कि इतनी महत्वपूर्ण चीज अख़बार में होनी ही नहीं चाहिए।

3. कार्टून इसी लिए ताकतवर होता है क्योंकि वो छोटा है, तुरंत देखा जा सकता है और विजुअल की ताकत ज्यादा होती ही है। एक लेख में सिर्फ शब्द होते हैं लेकिन कार्टून में हमारे पास शब्द और विजुवल दोनों होते हैं जिससे वो ज्यादा ताकतवर हो जाता है। व्यंग की अपनी ताकत बहुत बड़ी होती है, वो किसी भी रूप में हो मारक होता है।

4. सन्देश यही है कि लोग कार्टून देखें, उन पर प्रतिक्रिया दें। और कार्टून ऐसे बनें जो समाज को ज्यादा उदार, स्वतंत्र और समझदार बनायें।

आबिद सुरती (वरिष्ठ कार्टूनिस्ट )

1. जो ये पोलिटिक्स चला हुआ है आज के दौर का, ये बहुत खतरनाक है। इनके खिलाफ जरा सा भी कुछ हो तो ये विचलित हो जाते हैं, फिर चाहे वो कार्टून में हो, चाहे वो पोलिटिक्स में हो या कुछ भी ऐसा जो सिस्टम के खिलाफ आवाज उठाते हैं इन सब के लिए अब खतरा पैदा होगया है।

2. वैसे तो कार्टून अख़बार का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है लेकिन सवाल ये है कि अख़बार कंट्रोल कौन करता है ? अख़बार कंट्रोल मैनेजमेंट करता है और अधिकतर मैनेजमेंट बिक चुके हैं। अभी बीच में एक लिस्ट भी छपी थी जिसमे बताया था कि इण्डिया के कितने मीडिया हॉउस बिक चुके हैं। और उसमे बड़े बड़े नाम थे। मेरा कहना ये है कि ये जो लोग बिक चुके हैं ये वही करेंगे जैसा ऊपर से आदेश आएगा। वो कार्टून का कॉलम ही हटा दें कि ना रहे बांस ना बजे बांसुरी। ये हालत केवल इण्डिया में नहीं पूरे विश्व में है। मैंने एक लेख लिखा था कि कार्टूनिस्ट की हालत दुनिया में क्या है। हमारे इण्डिया में तो है ही कि सिस्टम के खिलाफ आपने कोई भी टेढ़ी बात कह दी तो आप पर शिकंजा कस दिया जाएगा। मिसाल के तौर पर 2011 में इंदौर के स्थानीय सांध्य दैनिक प्रभात किरण में कार्टूनिस्ट हरीश यादव ने मोदी द्वारा इमाम की टोपी ठुकराए जाने की घटना पर आधारित कार्टून बनाया और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। मैंने अपने आलेख में दुनिया भर के कार्टूनिस्टों की दुर्दशा के बारे में लिखा था। कोई कार्टूनिस्ट अस्पताल में पड़ा है, किसी की बीवी ये शिकायत कर रही है कि उसके पति दफ्तर गए और अभी तक घर नहीं लौटे, किसी का हाथ टूटा हुआ है किसी का सर फूटा हुआ है।

3. कार्टून भले ही छोटा सा होता है मगर चोट बड़ी करता है। एक जुमले में वो सारी बातें कह देता है जो उसे कहनी हैं, उसके साथ जो चित्र होता है वो उसकी बात कहने में सहायता करता है। नेहरू जी का भी वो दौर था जब उन्होंने शंकर पिल्लई को कहा था कि आप हमारे कार्टून बनाते रहिए जिससे हमें मार्गदर्शन मिलता रहे। वो दौर अलग था, लोगों में समझ थी। दूसरी तरफ कार्टूनिस्टों को भी समझना चाहिए कि कहां गलती हो रही है। पहले के कार्टूनिस्ट किसी पार्टी की विचारधारा से जुड़े हुए नहीं थे। उनकी नज़रों में सब एक जैसे थे जैसे एक पिता की नजरों में उसके सारे बच्चे सामान होते हैं और पिता अपने बच्चों को सही रास्ता दिखता है, कभी मीठे बोल से तो कभी छड़ी से। ये नजरिया कार्टूनिस्टों का उस दौर में था और इस दौर में क्या हुआ कि कोई कार्टूनिस्ट भाजपा से जुड़ गया तो कोई किसी अन्य पार्टी से। ऐसे में वो अपनी पार्टी की विचारधारा पर काम करेगा। ऐसे में वो देखेगा नहीं कि दूसरी पार्टी ने अच्छा किया या नहीं। तो ऐसे किसी विशेष विचारधारा वाले कार्टूनिस्ट पर किसी तरह का कोई अंकुश लगता है तो इसमें कोई अफ़सोस की बात नहीं है।

4. यही कहना चाहूंगा कि कार्टून की जो विधा है वो बड़ी पवित्र है जैसे शंकर पिल्लई से ले कर आर के लक्ष्मण तक ये पवित्रता बनी रही। इनके बीच और भी बहुत से कार्टूनिस्ट थे जिन्होंने बहुत अच्छा काम किया। लेकिन अब कार्टूनिस्टों में अपने काम को लेकर ईमानदारी बहुत कम देखने को मिलती है, ऐसे में किसी भी पार्टी पर कोई कार्टून बनाने पर हल्ला होगा क्योंकि वो जानते हैं कि ये कार्टून उनके विरोधियों के कहने पर बनाया गया है। दूसरी ओर सत्ताधारियों के सहने की क्षमता भी बहुत कम हो गयी है। जैसे कि ममता बैनर्जी पर किसी ने कार्टून बनाया था, उस कार्टून को जब ममता बैनर्जी का पीए उसके पास ले कर पहुंचा तो वो इतना गुस्सा हुई कि सबसे पहले उसने अपने पीए को ही बर्खास्त कर दिया। आखिर में सभी कार्टूनिस्टों के लिए इतना ही कहूँगा कि वे अपने काम के प्रति ईमानदार और प्रतिबद्ध रहें। ना लेफ्ट में रहें ना ना राईट में जाएं, बस सेंटर में रहें तब जा कर बात बनेगी।

धीरज झा

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पूजा पाठ में इन चार रंगों के विशेष महत्व जानते हैं आप?

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पूजा-पाठ में चार रंगों का विशेष महत्व माना गया है. धार्मिक मान्यता है कि इन चार रंगों का उपयोग करने से परेशानियों से मुक्ति मिलती है. ये चार रंग है- पीला, लाल, हरा, सफेद. जानें इन रंगों के धार्मिक महत्व के बारे में.

सफेद रंग को पवित्रता और शांति का प्रतीक माना जाता है. मां सरस्वती का प्रिय रंग भी सफेद ही है. मां सरस्वती सदैव सफेद वस्त्र धारण करती हैं. धार्मिक मान्याता है मां सरस्वती के उपवास के दिन सफेद कपड़े पहनने चाहिए. इससे मां सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

#Importenceofcolour

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लाल रंग का प्रयोग हर शुभ काम में होता है. माता लक्ष्मी, मां दुर्गा लाल वस्त्र धारण करती हैं. लाल रंग को सौभाग्य-समृद्धि और नए जीवन का प्रतीक माना जाता है. हालांकि लाल रंग का प्रयोग घर में सावधानी से करना चाहिए क्योंकि लाल रंग उत्साह का प्रतीक होता है.

पीला रंग बृहस्पति देव का प्रिय रंग है. इस रंग का उपयोग पूजा में बहुत शुभ माना जाता है. पीले रंग को भगवान विष्णु और सौन्दर्य का प्रतीक भी माना गया है. जिसका गुरु कमजोर हो उसे गुरुवार के दिन पीले वस्त्र, पीली वस्तुओं का सेवन करना चाहिए. इससे गुरु बलशाली होता है.


हरे रंग को सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है. इसके प्रयोग से धनी की कमी नहीं होती है. पूजा में हरे आम के पत्तों, पान के पत्तों, केले का पत्तों का प्रयोग किया जाता है. मां लक्ष्मी को भी हरा रंग प्रिय है.http://www.satyodaya.com

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कृष्ण जन्माष्टमी आज, बन रहा कार्य सफलता का विशेष योग, जाने,शुभ मुहूर्त व महत्व

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Krishna Janmashtami 2020: कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास में अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इस बार पंचांग के अनुसार अष्टमी की तिथि 11 अगस्त यानि आज सुबह 9 बजकर 6 मिनट से आरंभ हो रही है। अष्टमी की तिथि 12 अगस्त को सुबह 11 बजकर 16 मिनट पर समाप्त हो रही है। 11 अगस्त को भरणी और 12 अगस्त को कृतिका नक्षत्र है। इसके बाद रोहिणी नक्षत्र आता है जो 13 अगस्त को रहेगा। इसीलिए कुछ स्थानों पर इस दिन भी जन्माष्टमी का पर्व मनाया जा रहा है। इस बार जन्माष्टमी 11 , 12 दोनों दिन मनाई जाएंगी। वहीं नंदलाल के गांव ब्रज में 11 अगस्त को धूमधाम से जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जा जाएगा।

जानें कल क्यों रहेगा जन्माष्टमी मनाना शुभ

देश के कई राज्यों मे आज जन्माष्टमी मनाई जा रही है. वहीं कल 12 अगस्त को सूर्योदय तिथि अष्टमी है. आज 9 बजे के बाद अष्टमी तिथि शुरू हुई है. ऐसे में शास्त्री के अनुसार 11 अगस्त से 12 अगस्त को श्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा. क्योंकि 11 अगस्त को मेष राशि भरणी नक्षत्र गत चंद्रमा व मंगलवार रहेगा. लेकिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि वृष राशि बुधवार रोहिणी नक्षत्र मंत हुआ था. 12 अगस्त को वृष राशि चंद्रमा कृतिका नक्षत्र के चतुर्थ चरण में रहेंगे रोहिणी नक्षत्र के नजदीक चंद्रमा होंगे, इसलिए 12 अगस्त को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाना शुभ रहेगा.

जन्माष्टमी की तिथि और शुभ मुहूर्त

जन्माोष्टरमी की तिथि: 11 अगस्तु और 12 अगस्तश।
अष्टामी तिथि प्रारंभ: 11 अगस्तत 2020 को सुबह 09 बजकर 06 मिनट से।
अष्टामी तिथि समाप्तभ: 12 अगस्त 2020 को सुबह 05 बजकर 22 मिनट तक।
रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ: 13 अगस्तग 2020 की सुबह 03 बजकर 27 मिनट से।
रोहिणी नक्षत्र समाप्तभ: 14 अगस्तत 2020 को सुबह 05 बजकर 22 मिनट तक।

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जन्माष्टमी का महत्व

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का देशभर में विशेष महत्व है। यह हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। भगवान श्रीकृष्ण को हरि विष्णु का आठवां अवतार माना जाता है। देश के सभी राज्यों में इस त्योहार को अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। इस दिन बच्चों से लेकर बूढ़ों तक सभी अपने आराध्य के जन्म की खुशी में दिन भर व्रत रखते हैं और कृष्ण की महिमा का गुणगान करते हैं। वहीं मंदिरों में झांकियां निकाली जाती हैं।

माखन मिश्री का कान्हा को लगाएं भोग

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण को मक्खन और मिश्री बहुत प्रिय है। इसलिए आज के दिन पूजा के दौरान कान्हा को माखन मिश्री का भोग जरूर लगाएं। इस साल जन्माष्टमी पर कृतिका नक्षत्र रहेगा। इस दिन चंद्रमा मेष राशि में और सूर्य कर्क राशि में विद्यमान रहेंगे। फलस्वरूप वृद्धि योग प्रबल है। यह धनवर्षा के लिहाज से सर्वोत्तम माना गया है। जन्माष्टमी पर बन रहा वृद्धि योग कई राशियों के लिए लाभकारी साबित होगा। मान्यता है, कि वृद्धि योग में पूजा करने से फल दोगुना प्राप्त होता है। वृद्धि योग में किए गए कार्यों में सफलता हासिल होती है।

रोहिणी नक्षत्र में हुआ था भगवान श्रीकृष्ण का जन्म

जन्माष्टमी के दिन लोग भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उपवास रखने के साथ ही भजन-कीर्तन और विधि-विधान से पूजा करते हैं। ज्योतिषियों के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण के जन्म अष्टमी तिथि के रोहिणी नक्षत्र में रात 12 बजे हुआ था। इसलिए इसी नक्षत्र और तिथि में जन्माष्टमी मनाई जाती है। इस बार रोहिणी नक्षत्र 13 अगस्त की सुबह 03 बजकर 27 मिनट पर शुरू हो रहा है।http://satyodaya.com

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संकष्टी चतुर्थी आज इस विधि से करें विघ्न हरता की पूजा, होगी हर मनोकामना पूरी

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Sankashti Chaturthi 2020: आज 7 अगस्त शुक्रवार को संकष्टी चतुर्थी है। भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा। संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश की आराधना की जाती है। शास्त्रों में संकष्टी चतुर्थी का व्रत बहुत ही शुभ और फलदायी होता है।
धार्मिक मान्यताओ के अनुसार, कि भगवान गणेश की पूजा करने से सभी तरह के कार्यों को पूरा करने में जरूर सफलता मिलती है। ऐसा कहा जाता है, कि संकष्टी के दिन गणपति की पूजा-आराधना करने से समस्त प्रकार की बाधाएं दूर हो जाती हैं। शास्त्रों में भगवान गणेश जी को विघ्नहर्ता के नाम से भी जाना जाता है। वे अपने भक्तों की सारी विपदाओं को दूर करते हैं और उनकी मनोकामनाएं को पूर्ण करते हैं। चन्द्र दर्शन भी चतुर्थी के दिन बहुत शुभ माना जाता है।

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संकष्टी चतुर्थी का शुभ मुहूर्त:
भाद्रपद मास की संकष्टी चतुर्थी 07 अगस्त दिन शुक्रवार को पड़ रही है। इस दिन गणेश जी की पूजा की जाती है। चतुर्थी प्रत्येक हिंदी मास में दो बार पड़ती है, एक कृष्ण पक्ष और दूसरा शुक्ल पक्ष में।

संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि
संकष्टी चतुर्थी के दिन सबसे पहले सुबह उठें और स्नान करें। इसके बाद इस दिन लाल रंग के कपड़े पहनकर पूजा करनी चाहिए। भगवान गणेश की पूजा करते समय अपना मुंह पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें। सकंष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश को स्वच्छ आसन पर विराजित करें। भगवान गणेश की प्रतिमा के आगे धूप-दीप प्रज्जवलित करें। ॐ गणेशाय नमः या ॐ गं गणपते नमः का जाप करें। पूजा के बाद भगवान को लड्डू या तिल से बने मिष्ठान का भोग लगाएं। शाम को व्रत कथा पढ़कर चांद देखकर अपना व्रत खोलें। व्रत पूरा करने के बाद दान करें। बुद्धि के देवता भगवान गणेश की पूजा किसी भी शुभ कार्य में सबसे पहले की जाती है। प्रतिदिन जाप करने से आर्थिक, सामाजिक और पारिवारिक परेशानियों से छुटकारा मिलता है।http://satyodaya.com

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August 15, 2020, 4:34 am
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