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संस्कृति

जो बंदिशों और छोटे मोटे खतरों से भयभीत हो जाएं उन्हें दूसरी नौकरी तलाश लेनी चाहिए

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5 मई को पूरे विश्व में वर्ल्ड कार्टूनिस्ट डे के रूप में मनाया जाता है। हम सब जानते हैं कि आज के समय में कार्टून हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन गए हैं। हर रोज़ जब तक अख़बार के पन्नों पर उस दिन का कार्टून ना देखें तब तक दिन शुरू ही नहीं होता। व्यंग की तेज धार से सजा कार्टून अमूक हो कर भी सौ आवाज़ों से ज्यादा शोर पैदा करने की क्षमता रखता है। आये दिन घटित होने वाली घटनाओं पर जो वार बड़े बड़े आलेख नहीं कर पाते उससे कहीं ज्यादा गहरी चोट छोटा सा कार्टून कर जाता है। यही कार्टून थे जिन्होंने समय समय पर सत्ता के गलियारों में हडकंप मचा दिया। सत्ताधारियों को इन नन्हें कार्टूनों ने इस तरह से भयभीत किया कि उन्हें अपनी पॉवर का इस्तेमाल करना पड़ा। साल 1949 में छपे शंकर वीकली पत्रिका के एक कार्टून में डॉक्टर आम्बेडकर एक चाबुक लिए एक घोंघे पर बैठे हैं जबकि उनके पीछे उस समय के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी चाबुक लिए खड़े हैं। यह कार्टून जाने-माने कार्टूनिस्ट केशव शंकर पिल्लई का उकेरा हुआ है। मान जाता है कि कार्टून का मकसद संविधान लिखने की प्रक्रिया में हुई कथित देरी को दर्शाना था। यह कार्टून एनसीईआरटी की 11वीं कक्षा की पाठ्य पुस्तक के एक अध्याय में था। इस कार्टून को ले कर सांसदों ने संसद में हंगामा किया तथा इस कार्टून को पाठ्यक्रम से हटा दिया गया। दूसरी तरफ कार्टून बनाने के मामले में ही कानपूर के कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी को गिरफ्तार कर लिया गया था। हाल ही में छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार कमल शुक्ला पर एक कथित कार्टून को शेयर करने को लेकर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। वहीं राजधानी रायपुर के पत्रकार ब्यासमुनि द्विवेदी पर खनन माफियाओं द्वारा प्राणघातक हमले की खबर भी आई थी। उनकी गाड़ी को भी माफियाओं ने आग के हवाले कर दिया। ऐसे में सवाल ये उठता है कि ये छोटे छोटे कार्टून क्या सत्ता के लिए इतना बड़ा खतरा हैं कि उन कार्टूनों को हटा दिया जाता है और उन्हें बनाने वाले कार्टूनिस्टों को जेल में डाल दिया जाता है ? विश्व कार्टूनिस्ट डे पर हमने सत्योदय की तरफ से कुछ जाने माने कार्टूनिस्टों से आज के समकालीन परिदृश्य में कार्टून की दशा दिशा से जुड़े कुछ सवाल पूछे। आइये जानते हैं कि इन सवालों पर इन सभी का क्या कहना है :

निम्नलिखित चारों सवाल के जवाब सभी कार्टूनिस्टों ने अपने अपने हिसाब से दिए :

1. जैसा कि पिछले कुछ वर्षों में कई कार्टूनिस्टों की गिरफ्तारियां हुईं हैं, ऐसे में एक तरफ जहां अभिव्यक्ति की आज़ादी को ले कर देश में सवाल उठ रहे हैं तो क्या इन गिरफ्तारियों से ये माना जाए कि सत्ता इन कार्टूनों से भी डर रही है ?

2. एकेक कार्टूनिस्ट के रूप में आप कार्टूनों को समाचार पत्रों के लिए कितना महत्वपूर्ण मानते हैं ?

3. आप कार्टूनों की क्या ताकत आंकते हैं ?

4. विश्व कार्टूनिस्ट डे पर आप क्या सन्देश देना चाहेंगे ?

सभी के जवाब कुछ इस तरह थे :

पवन टून जी (कार्टूनिस्ट – दैनिक हिंदुस्तान)

1. जैसा कि हम देख रहे हैं जिस तरह से पहले कार्टूनों का प्रकाशन चलता था या अख़बारों में पहले जितने भी कार्टूनिस्ट रखे जाते थे, वो जिस खुलेपान से काम करते थे वो खुलापन अब अख़बारों से धीरे धीरे गायब हो रहा है। इसका परिणाम यह निकला कि अब सोशल मीडिया मुख्य प्लेटफार्म बन गया और लोग वहां अपने हिसाब से अपनी अपनी बात रख रहे हैं। लेकिन खतरे जैसी कोई बात नहीं है, ये अलग बात है कि कोई भी हो उसे अपना दायरा सिमित करना पड़ता है। दायरे से बाहर जा कर कुछ भी करना या कहना थोड़ा असहनीय हो जाता है।

2. अभी की जो स्थिति है, उसमे मीडिया हाउसिस रिस्क लेने को तैयार नहीं हैं, अब ये मैं नहीं कह सकता कि इन्हें कहीं से निर्देश मिलता है या फिर ये स्वयं से ऐसा करते हैं। हमने जिन लोगों पर कार्टून बनाये उनकी तरफ से कभी समस्या नहीं रही, असल में खुद संस्थाओं को लग रहा है कि डर कर रहना चाहिए इसीलिए कार्टूनिस्टों पर ये सभी सीमाएं अपने ही संस्थानों द्वारा निर्धारित कर दी गयीं। जब कोई भी व्यक्ति खुद के मन से काम कर रहा होता है तो उसके द्वारा किया गया काम किसी ना किसी मंच द्वारा बाहर निकलता ही है, यही कारण रहा है कि अब बेहतरीन कम यदि नज़र आ रहा है तो वो ज़्यादातर सोशल मीडिया के द्वारा ही आ रहा है। ये मंच एक ऐसा मंच है जहां किसी पर किसी का कोई दवाब नहीं है।

3. देखिये कार्टूनों के लिए आपको बहुत ज्यादा शब्द देने की ज़रूरत नहीं है इसमें अपनी बात को केवल सिंबॉलिक तरीके से दिखाना होता है। कार्टून हर वर्ग के लोगों को ये समझाने में सक्षम हैं कि आपके आसपास का माहौल कैसा है, फिर चाहे कोई पढ़ा लिखा हो या फिर अनपढ़ व्यक्ति हो उसको समझाने के लिए कार्टून एक महत्वपूर्ण विधा साबित होती है।

4. मेरे हिसाब से जिस तरह से मीडिया एक बंदिश की तरफ जा रहा है ऐसा नहीं होना चाहिए और कार्टूनिस्टों को खुल कर काम करना चाहिए। पहले भी ऐसा ही होता रहा है और आज भी होना चाहिए। जो आपकी क्षमता है उसे सही तरीके से पेश करें। धन्यवाद।

काजल कुमार (कार्टूनिस्ट)

1. कार्टून पहले भी खतरे के रूप में ही देखा जाता रहा है, कार्टूनों में किसी भी व्यक्ति को भेंद देने की सबसे अधिक क्षमता है। जैसे जैसे समाज में सहनशीलता की कमी होती जा रही है वैसे वैसे कार्टूनिस्टों पर इस तरह की प्रक्रिया आम हो रही है, इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है। पहले कार्टूनों को बड़े बड़े लीडर सपोर्टिवली लेते थे मगर आज के लीडर किसी भी व्यंग को झेलने में असक्षम हैं, ऐसे में ये भी अभिव्यक्ति की आजादी पर मंडरा रहे खतरों में से एक है।

2. मैं कार्टून को सम्पादकीय से कम नहीं मानता। सम्पादकीय तो हर कोई नहीं पढ़ पता लेकिन कार्टून लगभग सभी लोग देखते हैं और यही इसकी खूबी है। तो इस हिसाब से देखें तो ये सम्पादकीय से ज्यादा प्रभावशाली होता है।

3. मूक कार्टून सबसे ज्यादा प्रभावशाली होते हैं क्योंकि ये भाषा और देशकाल की सीमाओं से परे निकल जाते हैं और ऐसे में इसके पाठक शब्द युक्त कार्टून से ज्यादा होते हैं क्योंकि भाषा युक्त कार्टून तो भाषा को समझने वालों तक ही सीमित रह जाते हैं।

4. सन्देश मात्र इतना ही है कि कार्टूनिस्टों को अपना कर्म करते रहना चाहिए। कार्टूनिस्टों पर होने वाले हमले या उनकी अभिवयक्ति पर अंकुश लगाना ये तो होता रहा है और आगे भी होता ही रहेगा। अगर इन सब से कोई डर जाता है तो उसे इस क्षेत्र में होने का अधिकार नहीं है, उसे तो फिर कहीं दस से पांच की नौकरी कर लेनी चाहिए क्योंकि ये क्षेत्र उसके लिए नहीं है जो ऐसी घटनाओं से विचलित हो जाते हैं। विरोध तो चलता रहता है इससे घबराना नहीं चाहिए।

राम बाबू (कार्टूनिस्ट)

1. लोकतंत्र में किसी भी व्यक्ति को अपनी बात रखने का हक है। खास तौर पर वो बात जो सर्वजन के हित में लागू होती है। ये अभिव्यक्ति की आज़ादी का सवाल तो है ही लेकिन देखने वाली बात ये है कि इस लोकतंत्र में कोई बात जितनी आसानी से कह दी जाती थी अब उसमें भी मुश्किलें आरही हैं।फिर चाहे वो एक कार्टूनिस्ट हो या एक लेखक हो चाहे जो भी हो। अगर सरकार को लगता है कि ये हमारी आलोचना कर रहे हैं हमारे लिए खतरा है तो उस पर अंकुश लगा दिया जाता है। ये सब सरकार ही कर रही है सरकार का मतलब सत्ता फिर भले ही वो किसी पार्टी की हो। तो सत्ता को जब भी लगेगा कि किसी भी कार्टूनिस्ट की आवाज जनता का ज्यादा समर्थन कर रही है और उनके लिए खतरा बन रही है तो जाहिर सी बात है वो अंकुश लगाएंगे ही। असल मायने में तो ये झूठे और नकली लोकतंत्र का दौर है, लोग अपने अधिकारों के लिए सड़क तक आते हैं तो उन पर लाठीचार्ज किया जाता है। आज खतरा ज्यादा है, पहले कुछ सीमा तक संभावनाएं थीं वो भी अब कठिन हो रही हैं। ये अभिव्यक्ति की आज़ादी पर एक दम से हमला है। या यूं कहें कि जो थोड़ी सी आजादी मिली हुई थी ये उस पर हमला है।

2. एक कार्टून की किसी समाचार पत्र में उतनी ही भूमिका है जितनी कि सम्पादकीय की। कार्टून उतना ही महत्वपूर्ण हैं जितना उस समाचार पत्र का सम्पादकीय

3. कार्टून की ताकत किसी भी खबर से ज्यादा है। खबर में पूरी जानकारी दी गयी होती है लेकिन कार्टून किसी भी मुद्दे पर एक टिप्पणी दे देता है। मान लीजिये अभी भाजपा सरकार केंद्र में है, वो गाय को बहुत पवित्र मानती है, लेकिन आप देखेंगे कि अधिकतर गांवों या देहातों में पशु चिकित्सालय नहीं हैं। दिखावे के लिए गाय को पवित्र मान रहे हैं लेकिन उसके लिए कुछ खास नहीं किया जा रहा। गाय मात्र एक मुद्दा बन कर रह गयी है। अब इसी पर कोई व्यंग करते हुए कार्टून बना दे तो जाहिर सी बात है उन्हें तकलीफ होगी।

4. सभी कार्टूनिस्टों को मेरा एक सन्देश है कि एक कार्टूनिस्ट अपने अभिव्यक्ति का जैसे इस्तेमाल करता है वो लेखक या कलाकार से अलग नहीं होता, ऐसे में ये खतरा सबके लिए बराबर है। तो इसके लिए जब तक लोग संगठित नहीं होंगे तब तक बात नहीं बनेगी। अखबार के मालिक भी किसी न किसी तरह राज्य सत्ता के साथ रहते हैं तो अख़बार में काम करने की एक सीमा है। ऐसे में कार्टूनिस्टों को स्वतंत्र रूप से काम करने की आवश्यकता है तभी इस पर कुछ किया जा सकता है है।

माधव जी (कार्टूनिस्ट)

1. नहीं मुझे नहीं लगता कार्टूनों से ऐसा कुछ खतरा है। अभिव्यक्ति कभी किसी के लिए खतरा नहीं होती। देखिए हर चीज को मर्यादा में रहना चाहिए। अभिव्यक्ति का मतलब अनर्गल प्रलाप नहीं होता। अभिव्यक्ति का मतलब होता है जो जिम्मेदारी है उसको निभाएं और जब उसको निभाते हैं तो वो खतरा नहीं होता बल्कि वो जरूरत होती है। ये तो सही बात है कि कार्टूनों को अब उतनी सहजता से नहीं लिया जाता जितनी सहजता से पहले लिया जाता था। जैसे कभी जवाहर लाल नेहरू जी लिया करते थे। एक बार काफी समय से शंकर पिल्लई जी ने उनके कार्टून नहीं बनाये थे तो नेहरू जी ने उन्हें बुला कर कहा कि हमारे कार्टून क्यों नहीं बना रहे हो, हमसे क्या नाराजगी, हमारी उपेक्षा क्यों कर रहे हैं? पहले रंगा जैसे कार्टूनिस्ट सांसद में हुआ करते थे लेकिन अब वो चीज रह नहीं गयी। अब अखबारवाले भी व्यापारी हो गए हैं। पहले पत्रकारिता एक आन्दोलन होता था मगर अब बस ये पैसा कमाने का जरिया हो गया है। तो उनको ऐसा आदमी क्यों चाहिए होगा जो सही और तीखी बात कहे। आज कल किसी को सही बात नहीं अच्छी लगती, किसी को उसकी सही तस्वीर दिखा दीजिये तो वो भड़क उठेगा। और कभी कभी ऐसा भी होता है कि जो रचना कर्मी हैं वो अपनी सीमाओं से आगे भी बढ़ जाते हैं।

2. कार्टून समाचार पत्रों का बहुत महत्वपूर्ण अंग है। कार्टून एक स्वतन्त्र अभिव्यक्ति का साधन है। वो तीखी प्रतिक्रिया देता है। वो आपको कुरेदता है। किसी मुद्दे को पढने से ज्यादा उसे आँखों से देखना ज्यादा प्रभावी होता है।

3. कार्टून बहुत प्रभावशाली हैं। ख़बरों में पूरी जानकारी देनी पड़ती है उसे पढना पड़ता है तब जा कर लोग समझ पाते हैं किन्तु कार्टून में कुछ भी ना लिखा हो फिर भी वो अपनी पूरी बात कह देता है।

राजेन्द्र धोड़पकर (कार्टूनिस्ट)

1. सत्ता के लिए कार्टून हमेशा खतरा था। क्योंकि व्यंग अपने आप में सबसे बड़ा हथियार है फिर भला वो किसी भी विधा में हो। ऐसे में ये हमेशा से सत्ता के लिए खतरा रहा है, सत्ता जैसे ही निरंकुश होती है तो कार्टूनिस्टों पर हमला करती है, और ये पहले भी होता रहा है। इसीलिए आप देखिये पिछले कई वर्षों में अख़बारों में कार्टून प्रकाशित होना बहुत कम हो गए हैं। क्योंकि अखबार भी ये नहीं चाहती कि ऐसा कुछ किया जाए जिससे खतरा बढ़े। अख़बार में अगर कार्टून होगा तो वो व्यंग जरूर करेगा और वो सत्ता के खिलाफ जायेगा। तो आमतौर पर माहौल बहुत अच्छा नहीं है मगर दूसरे नजरिये से देखा जाये तो ये बात अच्छी है कि आम लोग कार्टूनों के प्रति रिस्पांसिव हैं। ऐसे में समाज के लिए खतरा तो उठाना पड़ता है।

2. अख़बार में कार्टून बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। ऐसा मैंने बहुत से लोगों से सुना है कि हम अख़बार में सबसे पहले कार्टून देखते हैं। तो जिन अख़बारों में कार्टून होता है लोग उसे सबसे पहले देखते हैं, क्योंकि वो कार्टून जनता की बात कहता है। और वो एक ऐसी अभिव्यक्ति है जिस पर अंकुश कम से कम होता है। मैंने पहले ही कहा कि कार्टून अख़बारों में पहले के मुकाबले कम आ रहे हैं, ये इतना महत्वपूर्ण हैं कि कईयों को लगता है कि इतनी महत्वपूर्ण चीज अख़बार में होनी ही नहीं चाहिए।

3. कार्टून इसी लिए ताकतवर होता है क्योंकि वो छोटा है, तुरंत देखा जा सकता है और विजुअल की ताकत ज्यादा होती ही है। एक लेख में सिर्फ शब्द होते हैं लेकिन कार्टून में हमारे पास शब्द और विजुवल दोनों होते हैं जिससे वो ज्यादा ताकतवर हो जाता है। व्यंग की अपनी ताकत बहुत बड़ी होती है, वो किसी भी रूप में हो मारक होता है।

4. सन्देश यही है कि लोग कार्टून देखें, उन पर प्रतिक्रिया दें। और कार्टून ऐसे बनें जो समाज को ज्यादा उदार, स्वतंत्र और समझदार बनायें।

आबिद सुरती (वरिष्ठ कार्टूनिस्ट )

1. जो ये पोलिटिक्स चला हुआ है आज के दौर का, ये बहुत खतरनाक है। इनके खिलाफ जरा सा भी कुछ हो तो ये विचलित हो जाते हैं, फिर चाहे वो कार्टून में हो, चाहे वो पोलिटिक्स में हो या कुछ भी ऐसा जो सिस्टम के खिलाफ आवाज उठाते हैं इन सब के लिए अब खतरा पैदा होगया है।

2. वैसे तो कार्टून अख़बार का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है लेकिन सवाल ये है कि अख़बार कंट्रोल कौन करता है ? अख़बार कंट्रोल मैनेजमेंट करता है और अधिकतर मैनेजमेंट बिक चुके हैं। अभी बीच में एक लिस्ट भी छपी थी जिसमे बताया था कि इण्डिया के कितने मीडिया हॉउस बिक चुके हैं। और उसमे बड़े बड़े नाम थे। मेरा कहना ये है कि ये जो लोग बिक चुके हैं ये वही करेंगे जैसा ऊपर से आदेश आएगा। वो कार्टून का कॉलम ही हटा दें कि ना रहे बांस ना बजे बांसुरी। ये हालत केवल इण्डिया में नहीं पूरे विश्व में है। मैंने एक लेख लिखा था कि कार्टूनिस्ट की हालत दुनिया में क्या है। हमारे इण्डिया में तो है ही कि सिस्टम के खिलाफ आपने कोई भी टेढ़ी बात कह दी तो आप पर शिकंजा कस दिया जाएगा। मिसाल के तौर पर 2011 में इंदौर के स्थानीय सांध्य दैनिक प्रभात किरण में कार्टूनिस्ट हरीश यादव ने मोदी द्वारा इमाम की टोपी ठुकराए जाने की घटना पर आधारित कार्टून बनाया और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। मैंने अपने आलेख में दुनिया भर के कार्टूनिस्टों की दुर्दशा के बारे में लिखा था। कोई कार्टूनिस्ट अस्पताल में पड़ा है, किसी की बीवी ये शिकायत कर रही है कि उसके पति दफ्तर गए और अभी तक घर नहीं लौटे, किसी का हाथ टूटा हुआ है किसी का सर फूटा हुआ है।

3. कार्टून भले ही छोटा सा होता है मगर चोट बड़ी करता है। एक जुमले में वो सारी बातें कह देता है जो उसे कहनी हैं, उसके साथ जो चित्र होता है वो उसकी बात कहने में सहायता करता है। नेहरू जी का भी वो दौर था जब उन्होंने शंकर पिल्लई को कहा था कि आप हमारे कार्टून बनाते रहिए जिससे हमें मार्गदर्शन मिलता रहे। वो दौर अलग था, लोगों में समझ थी। दूसरी तरफ कार्टूनिस्टों को भी समझना चाहिए कि कहां गलती हो रही है। पहले के कार्टूनिस्ट किसी पार्टी की विचारधारा से जुड़े हुए नहीं थे। उनकी नज़रों में सब एक जैसे थे जैसे एक पिता की नजरों में उसके सारे बच्चे सामान होते हैं और पिता अपने बच्चों को सही रास्ता दिखता है, कभी मीठे बोल से तो कभी छड़ी से। ये नजरिया कार्टूनिस्टों का उस दौर में था और इस दौर में क्या हुआ कि कोई कार्टूनिस्ट भाजपा से जुड़ गया तो कोई किसी अन्य पार्टी से। ऐसे में वो अपनी पार्टी की विचारधारा पर काम करेगा। ऐसे में वो देखेगा नहीं कि दूसरी पार्टी ने अच्छा किया या नहीं। तो ऐसे किसी विशेष विचारधारा वाले कार्टूनिस्ट पर किसी तरह का कोई अंकुश लगता है तो इसमें कोई अफ़सोस की बात नहीं है।

4. यही कहना चाहूंगा कि कार्टून की जो विधा है वो बड़ी पवित्र है जैसे शंकर पिल्लई से ले कर आर के लक्ष्मण तक ये पवित्रता बनी रही। इनके बीच और भी बहुत से कार्टूनिस्ट थे जिन्होंने बहुत अच्छा काम किया। लेकिन अब कार्टूनिस्टों में अपने काम को लेकर ईमानदारी बहुत कम देखने को मिलती है, ऐसे में किसी भी पार्टी पर कोई कार्टून बनाने पर हल्ला होगा क्योंकि वो जानते हैं कि ये कार्टून उनके विरोधियों के कहने पर बनाया गया है। दूसरी ओर सत्ताधारियों के सहने की क्षमता भी बहुत कम हो गयी है। जैसे कि ममता बैनर्जी पर किसी ने कार्टून बनाया था, उस कार्टून को जब ममता बैनर्जी का पीए उसके पास ले कर पहुंचा तो वो इतना गुस्सा हुई कि सबसे पहले उसने अपने पीए को ही बर्खास्त कर दिया। आखिर में सभी कार्टूनिस्टों के लिए इतना ही कहूँगा कि वे अपने काम के प्रति ईमानदार और प्रतिबद्ध रहें। ना लेफ्ट में रहें ना ना राईट में जाएं, बस सेंटर में रहें तब जा कर बात बनेगी।

धीरज झा

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देश

शताब्दी में पहली बार आएगा नववर्ष 2020 का ऐसा कैलेंडर

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लखनऊ: हमारे सुंदर सपनों एवं भावी संकल्पों को संजोये हुए नववर्ष हमेशा एक नए कलेवर के कैलेंडर के रूप में हमारे सम्मुख आता है। तारीखों एवं दिनों के नवीन संयोगो को समाहित किए हुआ यह नया बहुप्रतीक्षित कैलेंडर अपने आप में कई विशेषताओं से युक्त होता है। इसकी यही विशेषताएं हमारी जिज्ञासा को बढ़ाती हैं कि किस तारीख को कौन सा दिन पड़ेगा। यूं तो कैलेंडर वर्ष दर वर्ष आते-जाते रहते हैं। लेकिन कैलेंडर के आने-जाने का अपना एक नियम भी होता है। नववर्ष 2020 एक लीप वर्ष है, जिससे इस नववर्ष के कैलेंडर की विशेषताएं और भी बढ़ गई हैं।

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अपनी इन्हीं विशेषताओं को संजोये हुए नववर्ष 2020 का कैलेंडर इस शताब्दी में पहली बार आया है। इससे पूर्व यह कैलेंडर 28 वर्ष पहले पिछली शताब्दी में वर्ष 1992 में आया था। इस शताब्दी में भी यह कैलेंडर पुनः 28 वर्षों बाद 2048 व 2076 में फिर से आएगा। इस तरह इस शताब्दी में इस कैलेंडर के दोहराने की प्रक्रिया कुल तीन बार ही आएगी। विगत शताब्दी में यह कैलेंडर वर्ष 1908, 1936, 1964 व 1992 में भी कुल चार बार आया था। एक शताब्दी में किसी सामान्य वर्ष के कैलेंडर के दोहराने की प्रक्रिया अधिकतम ग्यारह बार ही आती है। जबकि एक लिपि वर्ष के कैलेंडर के दोहराने की यह प्रक्रिया एक शताब्दी में तीन या चार बार ही आती है। किन्तु, लीप वर्ष के कैलेंडर की दोहराने की प्रक्रिया एक शताब्दी में 28 वर्षों बाद ही आती है। किसी कैलेंडर के दोहराने की प्रक्रिया पूर्णतया गणितीय नियमो पर आधारित होती है।


नववर्ष 2020 के कैलेंडर पर आधारित ऐसे ज्ञानवर्धक व रोचक तथ्यों को लखनऊ पब्लिक स्कूल, लखीमपुर खीरी के गणित अध्यापक श्री अतुल सक्सेना ने अपनी स्वनिर्मित सैकड़ों वर्षों के लिए अंक-कोड कैलेंडर की तालिका के विश्लेषण के आधार पर प्रस्तुत किया है। किसी भी वर्ष के कैलेंडर को मुँह- जुबानी भी याद रखा जा सकता है। नववर्ष 2020 के लिए अंक-कोड 256240251361 है। यह अंक क्रमशः जनवरी से दिसंबर तक के सभी बारह महीनों के लिए बारह कोड हैं। किसी तारीख में उसके माह का कोड जोड़कर 7 से भाग करने पर जो अंक आता है, वही अंक उस दिन कोड होता है। शून्य से छः तक के अंक क्रमशः दिन रविवार से शनिवार तक को दर्शाते है। जैसे 26 जनवरी 2020 का दिन जानने के लिए 26 में जनवरी के माह अंक कोड 2 को जोड़ने पर आए योगफल 28 को 7 से भाग करते हैं, तो भागफल 4 और शेषफल ‘शून्य’ आता है। शेषफल ‘शून्य’ का अंक ‘रविवार’ का दिन होने का बोध कराता है। इसी प्रकार 2 जून 2020 का दिन ज्ञात करने के लिए 2 अंक में जून का माह-कोड 0 जोड़ने पर प्राप्त योगफल 2 को 7 से भाग करने पर भागफल 0 और शेषफल 2 आएगा। शेषफल 2 का अंक दिन ‘मंगलवार’ का होना बताता है।http://www.satyodaya.com

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आपका दिन शुभ हो

सूर्य ग्रहण: जानिए किन राशियों के लिए खास है आज का दिन

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आज चंद्रमा का संचार दिन रात धनु राशि में हो रहा है। वहीं आज सुबह 8 बजे से 1 बजकर 36 मिनट तक ग्रहण भी लग रहा है। ग्रहण के दौरान 6 ग्रह धनु राशि में होंगे। इसका आपकी राशि पर क्या असर होगा, देखें क्या कहते हैं आपके सितारे…

मेष: आज आपकी धार्मिक प्रवृत्ति बढ़ेगी। समाज में मान-प्रतिष्ठा बढ़ेगी। विरोधी परास्त होंगे, यात्रा लाभकारी रहेगी। परिजनों तथा मित्रों के साथ समारोह में उपस्थित रह सकते हैं। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। नए कार्य करने की प्रेरणा मिलेगी और आप उन्हें प्रारंभ कर पाएंगे। मित्रों की तरफ से शुभ समाचार मिलेंगे। भाग्य 70% साथ देगा।

वृषभ: आज का दिन मिश्रित फलदायी होगा। आज परिश्रम अधिक और लाभ कम रहेगा। कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं। यात्रा न करें और वाहन सावधानी पूर्वक चलाएं। कार्यक्षेत्र में वाद-विवाद के कारण तनाव हो सकता है। परिजनों के साथ बैठकर महत्वपूर्ण चर्चा करेंगे। विद्यार्थियों को लाभ प्राप्त होगा। भाग्य 60% साथ देगा।

मिथुन: अगर कोई नया रोजगार शुरू करने की सोच रहे हैं तो अवश्य करें, सफलता मिलेगी। अविवाहितों के विवाह की बात आगे बढ़ेगी। पराक्रम में वृद्धि होगी। नए मित्र भी बनेंगे। व्यापार-व्यवसाय और कार्यक्षेत्र में लाभ के योग बन रहे हैं। उच्चस्तरीय एवं सहयोगी व्यक्तियों से मुलाकात लाभकारी रहेगी। भाग्य 72% साथ देगा।

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कर्क: आज संघर्ष के बाद सफलता अवश्य मिलेगी। कोई नया ऑर्डर अथवा कॉन्ट्रैक्ट मिलने की संभावना है। शत्रु बलहीन रहेंगे। उच्च अधिकारियों की शुभ दृष्टि आपका उत्साह बढ़ाएगी। नौकरीपेशा लोगों को पदाधिकारियों तथा सरकार की तरफ से सहयोग मिलेगा। भाई-बहनों के साथ आनंदपूर्वक समय व्यतीत होगा। भाग्य 80% साथ देगा।

सिंह: कारोबार सामान्य रहेगा। मनोरंजन कार्य पर खर्च हो सकता है। आज आपको अपनी प्रतिभा का लाभ मिलेगा और आपकी पहचान बनेगी। नई योजनाएं लाभ देंगी। बिगड़े कार्य बनने लगेंगे और धर्म-कर्म में रुचि बढ़ेगी। मान-प्रतिष्ठा का लाभ मिलेगा। मित्रों के साथ आप खुशहाल रहेंगे। भाई-बंधुओं से मेलजोल बना रहेगा। भाग्य 72% साथ देगा।

कन्या: आज का दिन मध्यम फलदायी होगा। आज कोई नया कार्य न करें। जोखिमपूर्ण निवेश करने से बचें। पूरे दिन किसी से वाद-विवाद में न पड़ें। क्रोध पर नियंत्रण रखें। किसी रमणीय स्थल पर पर्यटन का आयोजन होगा। परिजनों के लिए खर्च करने का प्रसंग उपस्थित हो सकता है। भाग्य 65% साथ देगा।

तुला: आज पराक्रम में वृद्धि होगी। आपका मनोबल बढ़ेगा और कारोबार में बेहतरी आएगी। नए संपर्क बनेंगे और लाभकारी रहेंगे। भाइयों के बीच प्रेम और सहयोग बढ़ेगा। नए कार्यों में सफलता प्राप्त होने की संभावना है। पारिवारिक जीवन के विषयों को लेकर चिंतित हो सकते हैं। कहीं से धन लाभ हो सकता है। भाग्य 75% साथ देगा।

वृश्चिक: आज का दिन मिश्रित फलदायी होगा। लेन-देन के कार्यों में सावधान रहें। धन निवेश करते समय विशेष सावधानी बरतें। आज किसी को उधार न दें, क्योंकि आज दिए हुए धन के वापस आने की आशंका कम है। महत्‍वपूर्ण दस्तावेजों को आज बाहर निकालने से बचना चाहिए। भाग्य 59% साथ देगा।

धनु: आज प्रयास अथवा स्वयं कोशिश करने से प्रत्येक कार्य में सफलता मिलेगी। व्यापार-व्यवसाय में उन्नति के अवसर दिखाई दे रहे हैं। सभी का सहयोग मिलेगा। कार्यों में सफलता आज अवश्य प्राप्त होगी। कलाकार एवं कारीगरों को उनकी कला का प्रदर्शन करने का अवसर मिलेगा। भाग्य 81% साथ देगा।

मकर: आज का दिन मध्यम फलदायी होगा। खर्च की अधिकता रहेगी। किसी न किसी कारण से अनावश्यक खर्च हो सकता है। व्यर्थ की यात्रा भी हो सकती है। दैनिक कार्य में विघ्न आ सकते हैं। स्त्री मित्रों के पीछे धन खर्च हो सकता है। विद्यार्थियों के लिए दिन अच्छा रहेगा। भाग्य 60% साथ देगा।

कुंभ: आज आपकी आमदनी में बढ़ोतरी होगी। धन लाभ होगा। जोखिमपूर्ण निवेश करें तो लाभ अवश्य मिलेगा। ईश्वर की प्रार्थना तथा जप करने से राहत महसूस होगी। साथियों से सुख एवं आनंद की प्राप्ति होगी। मित्रों व स्वजनों से मुलाकात हो सकती है। किसी महत्वपूर्ण काम में सफलता मिलेगी। आर्थिक लाभ एवं भाग्यवृद्धि के योग हैं। भाग्य 78% साथ देगा।

मीन: आज आपका सितारा अनुकूल है। लाभ होगा और सफलता प्राप्त होगी। कामकाज में आ रहीं बाधाएं दूर होंगी। गृहस्थ जीवन में मधुरता बनी रहेगी। कार्यालय तथा व्यावसायिक स्थल पर आपकी प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। प्रमोशन के योग हैं। गृहस्थ जीवन में आनंद प्राप्त होगा। मित्रों के साथ मुलाकात होगी। भाग्य 70% साथ देगा।– (ज्योतिषाचार्यः आशुतोष वाष्डेय)http://www.satyodaya.com

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संस्कृति

26 दिसंबर को लगेगा साल का आखिरी सूर्य ग्रहण, जानें सूतक का समय

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साल का तीसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण 26 दिसंबर 2019 को लगेगा। जब भी ग्रहण की बात होती है। तो पूछा जाता है कि ग्रहण कब है, तो आपको बता दें कि साल 2019 का अंतिम सूर्य ग्रहण 26 दिसंबर के दिन होगा। यह भारत के कई हिस्सों में दिखेगा। सूर्य ग्रहण देश के दक्षिणी भाग में दिखेगा। अब बात करते हैं कि सूर्य ग्रहण किस समय दिखेगा या सूर्यग्रहण का समय क्या होगा। भारतीय मानक समय अनुसार आंशिक सूर्यग्रहण सुबह 8 बजे शुरू होगा। सूर्य ग्रहण की वलयाकार अवस्था दोपहर 12 बजकर 29 मिनट पर समाप्त होगी, जबकि ग्रहण की आंशिक अवस्था दोपहर एक बजकर 36 मिनट पर समाप्त होगी।


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सूर्य ग्रहण में सूतक काल
सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई देने के कारण सूतक का असर रहेगा। सूतक का समय ग्रहण के एक दिन पहले ही शुरू हो जाएगा। सूतक 25 दिसंबर की शाम 5:33 मिनट से शुरू होगा और अगले दिन सुबह 10:57 पर सूर्य ग्रहण की समाप्ति के बाद खत्म होगा। ग्रहण में सूतक का विशेष महत्व होता है। हिंदू धर्म में सूतक लगने पर कई तरह के कार्यो को नहीं किया जा सकता। सूतक के समय को अशुभ समय माना गया है।

इन जगहों पर दिखाई देगा सूर्य ग्रहण

26 दिसंबर को लगने वाला ग्रहण भारत समेत यूरोप, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, पूर्वी अफ्रीका में दिखाई देगा। 

क्या है ‘सूर्य ग्रहण’?

सूर्य की परिक्रमा पृथ्वी करती है और चन्द्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता ह। परिक्रमा के दौरान एक दूसरे के बीच में ये आते जाते रहते हैं। जब सूर्य और पृथ्वी के बीच चन्द्रमा आ जाए तो इसे सूर्य ग्रहण कहते हैं। इसका असर पृथ्वी और पृथ्वी के लोगों पर पड़ता है। आइए जानते हैं इस दौरान आपको किन बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है।http://www.satyodaya.com

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January 5, 2020, 5:52 pm
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