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संस्कृति

Vinayak chaturthi 2020: सुख-समृद्धि और सफलता के लिए करे इस महामंत्र का जाप

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इस साल की आखिरी विनायक चतुर्थी 27 फरवरी यानी आज है। अमावस्या के बाद आने वाली चतुर्थी को ही विनायक चतुर्थी कहा जाता है। फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष में विनायक चतुर्थी मनायी जाती है। इस दिन विघ्नहर्ता श्री गणेश जी का व्रत रख कर विधि विधान से पूजा अर्चना की जाती है। इस व्रत को करने से रिद्धि-सिद्धि व समस्त सुख की प्राप्ति होती हैं। फाल्गुन मास हिन्दू कैलेंडर का आखिरी यानी 12वां मास है। इसलिए इस मास की विनायक चतुर्थी इस वर्ष की आखिरी विनायक चतुर्थी है। इस दिन गणेश जी के महामंत्र का जाप करने से व्यक्ति को जीवन में सुख-समृद्धि के साथ सफलता की प्राप्ति होती है। जीवन के सभी दुःख दर्द दूर होते है।


पूजा करने का सही मुहूर्त
27 फरवरी दिन गुरुवार को चतुर्थी तिथि का प्रारंभ सुबह 4 बजकर 11 मिनट से हो रहा है। जो 28 फरवरी दिन शुक्रवार को सुबह 6 बजकर 44 मिनट तक है।

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सुख-समृद्धि की प्राप्ति का महामंत्र
प्रातर्नमामि चतुराननवन्द्यमानमिच्छानुकूलमखिलं च वरं ददानम्।
तं तुन्दिलं द्विरसनाधिपयज्ञसूत्रं पुत्रं विलासचतुरं शिवयो: शिवाय।।
प्रातर्भजाम्यभयदं खलु भक्तशोकदावानलं गणविभुं वरकुञ्जरास्यम्।
अज्ञानकाननविनाशनहव्यवाहमुत्साहवर्धनमहं सुतमीश्वरस्य।।http://www.satyodaya.com

संस्कृति

रामनवमी: घरों में पूजा हुई लेकिन बदल गया कन्यापूजन का तरीका, जानें

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नवरात्रों में मां की उपासना करने वाले शक्ति के उपासक हर बार कन्यापूजन व हवन के बाद व्रत पारण करते हैं। मगर इस बार कोरोना वायरस संक्रमण के चलते हुए लॉकडाउन ने यह विधान भी बदल दिया। घरों में हवन तो हुए, लेकिन अधिकांश लोगों ने कन्यापूजन इस बार नहीं किया। कई ऐसे लोग हैं जो कन्यापूजन में दिया जाने वाला दान मानवसेवा और जीवसेवा के लिए प्रदान किया।

प्रशासन ने की मदद :

रामपुर जिलाधिकारी ने बताया कि इस बार बहुत से लोगों ने कंट्रोल रूम में फोन करके कन्यापूज के पैसा और खाना जरूरतमंदों को देने के लिए कहा। ऐसे लोगों के यहां टीम भेजी गई और सामान एकत्र किया गया। जिसे जरूरतमंदों को दे दिया गया।

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लोकसेवा भी देवी पूजन से कम नहीं:

लखनऊ के अमीनाबाद की रहने वाली आभाचंद्रा श्रीवास्तव कहती हैं कि इस मुश्किल समय में लोगों की सेवा ही देवीपूजन है। उनके परिवार ने इस बार कन्यापूजन की जगह जरूरतमंदों तक भोजन व अन्य सामग्री पहुंचाई जाएगी।

राहतकोष में जाएगा दान: दिलकुशा निवासी डॉ. प्रीति वर्मा ने बताया कि वह कन्यापूजन की जगह इस बार प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री राहत कोष में दान करेंगी। इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि इस कठिन समय में आसपास कोई भूखा न सोए। इस सोच से देवी भी प्रसन्न होंगी।

जीवसेवा को बनाया ध्येय :

गोमतीनगर निवासी राखी किशोर ने बताया कि लॉकडाउन के कारण सड़क पर तमाम जानवर भूखे-प्यासे घूम रहे हैं और इन्हें भी मदद की जरूरत है। वह कहती हैं कि यह मातारानी का इशारा है कि इस बार नवरात्र के 9 दिन इन सभी की सेवा में गुजरे हैं। उनका मानना है कि कन्यापूजन की जगह अगर जानवरों और जरूरतमंदों की सेवा की जाए तो यही असली पूजन होगा।http://www.satyodaya.com

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संस्कृति

चैत्र नवरात्रि: आठवें दिन होती है महागौरी की पूजा,लॉकडाउन में न करें कन्या पूजन

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दुर्गाष्टमी बुधवार को है। इस दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। कई जगह दुर्गाष्टमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व है। कन्‍या पूजन पर गुलाबी रंग के वस्‍त्र पहनना शुभ माना जाता है। मां को हलवा-पूरी और चने का भोग लगाया जाता है। इसके अलावा रामनवमी पर भी कई जगह कन्या पूजन किया जाता है।  मां की कृपा से आलौकिक सिद्धियों की प्राप्ति होती है। लेकिन भारत में कोरोना वायरस महामारी और लॉकडाउन के चलते कन्या पूजन सही नहीं है। ज्योतिषियों का कहना है कि सुबह 9 से 10 बजे तक का समय कन्या पूजन के लिए अच्छा है, लेकिन इस समय कन्या पूजन न करना ही सही है। ऐसे में आप घर में ही पूजा कर मां को हलवा पूरी का भोग लगा लें।

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कन्याओं की जगह मां के नौ रुपों की प्रार्थना कर उन्ही को कन्या पूजन कर लें। देवी महागौरी अमोघ फलदायिनी हैं और इनकी पूजा से भक्तों के पूर्वसंचित पाप भी नष्ट हो जाते हैं। महागौरी का पूजन-अर्चन, उपासना-आराधना कल्याणकारी है। इनकी कृपा से भक्तों को अलौकिक सिद्धियां भी प्राप्त होती हैं। कहते हैं कि जो स्त्री मां की पूजा भक्ति भाव सहित करती है उसके सुहाग की रक्षा स्वयं देवी महागौरी करती हैं।

महागौरी को लगाएं नारियल का भोग : माता महागौरी को नारियल का भोग अत्यधिक प्रिय है। यही वजह है कि माता रानी को नारियल का भोग लगाया जाता है। नारियल का भोग लगाने से घर में सुख एवं समृद्धि का आगमन होता है।

व्रत कथा : पौराणिक कथाओं के अनुसार महागौरी ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसी कारण से इनका शरीर काला पड़ गया लेकिन तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने इनके शरीर को गंगा के पवित्र जल से धोकर कांतिमय बना दिया। उनका रूप गौर वर्ण का हो गया, इसीलिए यह महागौरी कहलाईं।

सिंह को बनाया अपना वाहन : एक और मान्यता के अनुसार एक भूखा सिंह भोजन की तलाश में वहां पहुंचा जहां देवी उमा तपस्या कर रहीं थीं। देवी को देखकर सिंह की भूख बढ़ गई, लेकिन वह देवी के तपस्या से उठने की प्रतीक्षा करते हुए वहीं बैठ गया। इस प्रतीक्षा में वह काफी कमजोर हो गया। देवी जब तप से उठीं तो सिंह की दशा देखकर उन्हें उस पर बहुत दया आ गई। उन्होंने उसे भी अपना वाहन बना लिया क्योंकि वह उनकी तपस्या पूरी होने की प्रतीक्षा में स्वयं भी तप कर बैठा।http://www.satyodaya.com

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देश

चैत्र नवरात्रि 2020: चौथे दिन होगी कूष्मांडा देवी की पूजा,शुभ मुहूर्त

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लखनऊ। मां दुर्गा के चौथे स्वरूप का नाम कूष्माण्डा है। अपनी मंद मुस्कान द्वारा अंड अर्थात ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इन्हें कूष्माण्डा देवी के नाम से अभिहित किया गया है। अत: यही सृष्टि की आदि स्वरूपा और आदि शक्ति हैं। इनका निवास सूर्यलोक में है। इन्हीं के तेज और प्रकाश से दसों दिशाएं प्रकाशित हो रही हैं।

ये अष्टभुजा देवी के नाम से भी विख्यात हैं। संस्कृत भाषा में कूष्माण्ड कुम्हडे़ को कहते हैं। बलियों में कुम्हड़े की बलि इन्हें सर्वाधिक प्रिय है। मां कूष्माण्डा की उपासना से भक्तों के समस्त रोग-शोक विनष्ट हो जाते हैं। मां कूष्माण्डा अत्यल्प सेवा और भक्ति से प्रसन्न होने वाली हैं। नवरात्र पूजन की चौथे दिन कूष्माण्डा देवी के स्वरूप की उपासना की जाती है। इस दिन साधक का मन अनाहत चक्र में स्थित होता है।

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मां कूष्मांडा पूजा मंत्र-
करोतु सा नः शुभहेतुरीश्वरी
शुभानि भद्राण्यभिहन्दु चापदः।

लॉकडाउन में ऐसे हो रही पूजाः
चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन आज यानी शनिवार को है। नवरात्र के चतुर्थी तिथि को मां दुर्गा के कूष्मांडा स्वरूप की पूजा होती है। माता कूष्मांडा भक्तों को रोग, शोक और विनाश से मुक्त कर आयु, यश, बल और बुद्धि प्रदान करती हैं। चैत नवरात्र पर बंद मंदिरों के अंदर मां की उपासना हो रही है। कुछ भक्त आने घरों में कलश स्थापित कर मां की अराधना कर रहे हैं। शहर के शक्ति मंदिर, खड़ेश्वरी मंदिर सहित प्रत्येक मुहल्ले के देवी मंदिरों में घट स्थापित की गई है। लेकिल लॉकडाउन के कारण भक्तों को प्रवेश बंद रखा गया है। अंदर पुरोहित मां के स्वरूपों की पूजा आरती और भोग अर्पण कर रहे हैं। शुक्रवार को मां के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा की गई।

शक्ति मंदिर जरूरतमंदों को कराएगा भोजन
कारोना से आई विपदा को देखते हुए धनबाद (झारखंड) में शक्ति मंदिर कमेटी ने निर्णय लिया है कि शनिवार से प्रत्येक दिन जब तक लॉकडाउन है जरूरतमंदों के लिये एक सौ पैकेट भोजन की व्यवस्था की जाएगी। यह जानकारी देते हुए मंदिर कमेटी के सुरेंद्र अरोड़ा ने कहा कि बैंक मोड़ थाने के सहयोग से जरूरतमंद लोगों तक वो पैकट पहुंचाये जाएंगे। पैकेट में एक दिन खिचड़ी आचार और एक दिन पूड़ी व आलू की सब्जी होगी। इस कार्य के लिए मंदिर कमेटी के अध्यक्ष एसपी सोंधी, उपाध्यक्ष राजीव सचदेव, सचिव अरुण भंडारी, संयुक्त सचिव सुरेंद्र अरोड़ा, कोषाध्यक्ष विपिन अरोड़ा, साकेत साहनी, सुरेन्द्र ठक्कर, अशोक भसीन, ब्रजेश मिश्रा, जेडी, गौरव अरोड़ा सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।http://www.satyodaya.com

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April 2, 2020, 11:57 am
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