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लाइफ स्टाइल

जानें कुछ ऐसे शब्दों का फुलफार्म जिसके वजह से आपको डेली ना होना पड़े शर्मिंदा

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प्रतीकात्मक चित्र

लखनऊ । हम लोग अक्सर अपने डेली लाइफ में बहुत सारे ऐसे शब्दों का प्रयोग करते है जिसका फुलफार्म हमको पता नही होता है । जैसे Wi-Fi, gsm, cdma, jpeg, ok, pnr इन सब शब्दों को हम अकसर बोलचाल में इस्तेमाल करते हैं । लेकिन बहुत लोगों को इसका पूरा मतलब नहीं पता होता है । जिससे कई बार हम सबको शर्मिंदगी भी उठानी पड़ सकती है । इसलिए हम आपको बता रहे हैं कुछ ऐसे कॉमन Abbreviations की फुलफॉर्म के बारे में ।

ifsc
indian financial system code- (इंडियन फाइनैंशल सिस्टम कोड)

gsm
Global system for mobile communication – (ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल कम्यूनिकेशन)

i.q.
intelligence quotient – (इंटेलिजेंस कोशंट)

jpeg
joint photographic expert group- (जॉइंट फटॉग्रफिक एक्सपर्ट ग्रुप)

wi-Fi
इस का फुल फॉर्म wi-Fi – (वायरलेस फिडलिटी)

led
light emitting diode- (लाइट एमिटिंग डायोड)

trp
television rating point – (टेलिविजन रेटिंग पॉइंट)

ufo
unidentifiable flying object – (अनआइडेंटिफिएबल फ्लाइंग ऑब्जेक्ट)

Lcd
liquid crystal display- (लिक्विड क्रिस्टल डिस्पले)

rip
rest in peace- (रेस्ट इन पीस)

PNR
passenger name record- (पैसेंजर नेम रिकॉर्ड)

gif
graphic interchange format- (ग्राफिक इंटरचेंज फॉर्मेट)

pdf
portable document format- (पोर्टेबल डॉक्युमेंट फॉर्मेट)

Ok
oll korrect- (ऑल करेक्ट)

cdma
code division multiple access- (कोड डिविज मल्टीपल एक्सेस)

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अपना शहर

जनता सहयोग करे तो परवान चढ़ सकता है पॉलिथीन बैन अभियान…

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लखनऊ। पर्यावरण सुरक्षा के लिए सरकार ने कई बार कड़े उठाए है, क्योंकि पर्यावरण सुरक्षित रहेगा तभी लोगों को शुद्ध वातावरण मिलेगा और लोग स्वस्थ भी रहेंगे। लेकिन कई बार ऐसा देखा गया है कि जनता की सुरक्षा के लिए  सरकार जो कदम उठाती है, वह कभी-कभी सफल नहीं हो पाते हैं। इसी सम्बंध में लखनऊ में पर्यावरण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पॉलिथीन के इस्तेमाल पर बैन लगाया गया था। लोगों ने कुछ दिन तो सरकार के बनाए पॉलिथीन इस्तेमाल ना करने के नियम का पालन किया था, लेकिन कुछ दिनों के बाद यह नियम बिल्कुल ठप पड़ गया। आज कल तो खुलेआम पॉलिथीन की बिक्री हो रही है और इसका इस्तेमाल भी खूब किया जा रहा है।

ये भी पढ़े: नोटा की तरफ बढ़ता जनता का रुझान, इस बार भी न बिगाड़ दे चुनाव परिणाम…

पॉलिथीन के इस्तेमाल पर नगर आयुक्त के म्युनिसिपल कमिश्नर डॉक्टर इंद्र मनी त्रिपाठी ने बताया कि पॉलिथीन का उपयोग करने में जनता का प्रतिशत ही सबसे ज्यादा है। यदि जनता जागरूक हो जाए और लोग अपने घर से किसी भी सामान को लेने के लिए कोई थैला या कैरी बैग लेकर निकले तो पॉलिथीन की समस्या जड़ से खत्म हो सकती है और इससे पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा। इंद्र मनी त्रिपाठी ने आगे बताते हुए कहा कि पॉलिथीन रोक के लिए पूरे 17 डिपार्टमेंट को बनाए गए थे, जिसके साथ ही नगर निगम भी इस मुहीम में शामिल था। इसके साथ ही बताया कि हम लोगों नगर निगम को अब तक लगभग साढ़े तेरह लाख रूपये पेनाल्टी के रूप में दिया और अभी कई पॉलिथीन जब्त भी की है। कुछ मशीनरी चुनाव में लगने के कारण इस मुहीम में थोड़ा धीमी प्रक्रिया रही । जिसके बाद अब हम लोगों ने दोबारा से पॉलिथीन रोक स्कीम पर काम शुरू कर दिया है, जिसमें रोजाना पचास हजार से लेकर डेढ़ रूपये की लाख पॉलिथीन जब्त करके ला रहें हैं ।

इसी क्रम में आगे बताते हुए कहा कि हम सभी को मिलकर लोगों के बीच यह क्रांति लानी होगी कि पॉलिथीन हम सभी लोगों के लिए जहर है, और इसका उपयोग पूर्ण रूप से बंद कर देना चाहिए। पॉलिथीन हमारे लिए एक प्रकार से बहुत ही ज्यादा हानिकारक है, जो कूड़े करकट आदि से उड़ कर घरों में गन्दगी फैलाती है और नाली व नालों में फंसकर उसे चोक कर देती है, इससे भी कई तरह की समस्या उत्पन्न हो जाती हैं। इसी क्रम में आगे बताया कि जिस तरह ज्यादा डिमांड होने से सप्लाई बढ़ती है, उसी तरह से पॉलिथीन रोक के लिए समाज में  परिवर्तन होना बहुत जरूरी है। पॉलिथीन रोक अभियान की गति धीमी जरूर पड़ी है, लेकिन इसके लिए जनता में जागरूकता होना बहुत ही ज्यादा आवश्यक है।

आपको बता दें कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने 15 जुलाई 2018 से प्रदेश में पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए थे और साथ ही कहा था कि उत्तर प्रदेश में अब 50 माइक्रॉन से कम की पॉलिथीन का इस्तेमाल नहीं हो सकेगा। पॉलिथीन का इस्तेमाल करते हुए पकड़े जाने पर दंडनीय अपराध भी भुगतना पड़ सकता है। वहीं पॉलिथीन पर बैन लगाने वाला यूपी देश का 19वां राज्य है।

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अपना शहर

मायानगरी गए बिना ही मॉडलिंग की दुनिया में लखनऊ के युवा दिखा रहे हैं अपनी प्रतिभा…

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स्थानीय युवाओं से ही लोग करा रहें मॉडलिंग और अपने ब्रांड का प्रमोशन

करीब डेढ़ दशक पहले जब आनंदी वॉटर पार्क के मालिक पकंज अग्रवाल ने अपना काम शुरू किया था, तो अपने पार्क के प्रमोशन के लिए मुम्बई और दिल्ली जैसे शहरों के मॉडल बुलाए थे। जिससे कि वह अपने ब्रांड का प्रमोशन कर सकें। अब एक बार फिर वह आनंदी मैजिक वर्ल्ड के नाम से कानपुर रोड बन्नी के पास अपना नया एडवेंचर लेकर आए हैं। इस बार भी कुछ होर्डिंग और प्रमोशन के लिए उनको मॉडल की जरूरत पड़ी। हालांकि इस डेढ़ दशक में एक नया परिवर्तन देखने को मिला है। पकंज अग्रवाल को अपने काम के लिए सभी मॉडल लखनऊ और पड़ोसी शहर कानपुर में ही मिल गए। अपने शहर के युवाओं को प्रमोट करने के लिए पंकज गुप्ता, विशाल गुप्ता और राहुल गुप्ता ने फैसला लिया कि वह अपना सारा काम इन्हीं युवाओं से करायेंगे। 

आनंदी ड्रीम वर्ल्ड की तरह ही शहर में आए दिन प्रमोशन और मॉडलिंग के नए-नए कार्यक्रम होते रहते हैं। शहर में होने वाले मॉडलिंग या फैशन शोज में कभी-कभी  दिल्ली,  मुम्बई,  कलकता और चंडीगढ़ के युवा मॉडलों के चेहरे होते थें, लेकिन आज यह सभी कार्यक्रम लखनऊ और कानपुर के युवाओं के सहारे हो रहें हैं। पिछले तीन से चार सालों में इन युवाओं ने सभी बड़े शहरों के मॉडल्स को पीछे छोड़ दिया है। बुलंदियों को छूने वाले यह युवा पीछे मुड़कर भी देखना पसंद नहीं करते हैं। हालांकि बाकी लोगों की तरह वह भी मायानगरी का सपना जरूर देखते हैं, लेकिन वहां जाने से पहले वह इतना नाम कमा लेना चाहते हैं कि किसी तरह का कोई स्ट्रगल उन्हें न करना पड़े। दोनों शहरों के कुछ ऐसे ही उभरते कलाकारों को लेकर सत्योदय रिपोर्टर नंदिनी कुंवर ने अपनी रिपोर्ट तैयार की है।
 


मीनू दीक्षित 

राजाजीपुरम लखनऊ में रहने वाली और कॉमर्स से मास्टर डिग्री लेने वाली मीनू दीक्षित न सिर्फ पढ़ाई में अव्वल है, बल्कि महज कुछ साल के करियर में शहर के प्रमुख मॉडलों में शुमार हो चुकी हैं। filpkard और amazon जैसे बड़े अन्तर्राष्ट्रीय कम्पनियों के लिए शूट करने वाली मीनू के पास ढेरों काम हैं। लखनऊ जैसे शहर में आज मीनू अपने शूट के लिए हजारों रुपये चार्ज करती हैं। वे बताती है कि जब एक शहर में आपका नाम हो जाए तो दूसरी जगह भी काम करना आसान हो जाता है। इसलिए अभी वह लखनऊ में काम कर रही हैं।  


शिखर 

मिस्टर कानपुर समेत कई बड़े मॉडलिंग कांटेस्ट जीत चुके शिखर किसी परिचय के मोहताज नहीं है। हालांकि पिछले कुछ महीनों तक परिवारिक समस्याओं की वजह से उनको मॉडलिंग से दूरी बनानी पड़ी थी, लेकिन आज वह फिर से सक्रिय हैं। अभी दिल्ली में हुए एक बड़े ब्रांड की प्रतियोगिता में उनको पूरे देश से आए पांच हजार लड़कों में टॉप 50 में चुना गया था। शिखर के पास मुम्बई के कई कम्पनियों के ऑफर भी है। जिसके लिए वह अक्सर वहां भी जाते है। हालांकि अभी पूरी तरह वहां शिफ्ट होने से बचते है। दलील है कि अभी फैमिली बिजेनस में भी कुछ समय देना पड़ता है। वहां से छूटने के बाद वह फिल्म इंडस्ट्री और बाकी जगह के बारे में भी विचार करेंगे। 


रिया सिंह राजपूत 

छोटा पैकेज बड़ा धमाका यह लाइन लखनऊ की रिया के लिए ही है। क्लास 11 से ही इन्होंने मॉडलिंग शुरू कर दी थी। मिस यूपी समेत कई ब्यूटी प्रतियोगिताओं में वह अपना जौहर दिखा चुकी हैं। आज शहर के कई बड़े  कपड़े,  ज्वैलरी,  होटल,  रेस्त्रा , डिस्को को यह प्रमोट करती है,  जिसके लिए इनको अच्छा  मेहनताना भी मिलता है। मॉडलिंग के साथ अपनी पढ़ाई को भी वह उतना ही महत्व देती है,  जिसकी वजह से वह कई बड़े ऑफर ठुकरा भी देती है। रिया बताती है कि जून में  उनका पेपर है,  जिसकी वजह से उनको एक दर्जन से ज्यादा मॉडलिंग ऑफर और प्रमोशन के ऑफर ठुकराने पड़े  हालांकि उनको उसका मलाल नहीं है। 


भूमिका 

लखनऊ में भूमिका मौजूदा दौर की  सबसे कम उम्र की उभरती हुई मॉडल में एक हैं। फैशन शो के अलावा वह कई वीडियो सोंग में भी काम कर चुकी हैं। मॉडलिंग के अलावा डांस और एक्टिंग  का शौक रखने  वाली भूमिका के पास भी काफी काम आता है। मॉडलिंग के साथ वह लोगों को फिटनेस ट्रेनिंग भी देती है। दोस्तों के साथ हर समय मौज मस्ती करने वाली  भूमिका काम के समय उतना ही सक्रिय रहती है। बतौर मॉडल और एक्टर भूमिका चाहती है कि उनका काम लोग लंबे समय तक याद करें। 


इलिशा सिंह 

अगर हम यह कहे कि सबसे ज्यादा काम का अनुभव और अलग – अलग सेक्टर में काम करने का अनुभव इलिशा के पास है तो गलत नहीं होगा। बचपन से ही एक बड़ी मॉडल और एक्टर बनने का सपना देख रही इलिशा के कई वीडियो यूट्यूब पर लाखों बार देखे गए है। आज वह शहर की कई बड़े ब्यूटी पॉर्लर और ब्रांड को प्रमोट करती है। इसके साथ ही उनके पास बीस से ज्यादा शॉट  मूवी में काम करने का अनुभव भी प्राप्त है। पूरे काम और मॉडलिंग के साथ एक्टिंग के प्रति इस जोश में उनके पापा का हर समय सहयोग रहता है। इलिशा मॉडलिंग और एक्टिंग के अलावा एडिटिंग का काम भी सीख रही हैं,  जिससे कि वह अपने काम में परफेक्ट हो सकें ।


तुषार

लखनऊ के तुषार ने महज एक साल के  करियर में  वह मुकाम हासिल कर लिया है, जिसके लिए बाकी लोगों को कई साल लग जाते है। एक्टिंग के साथ डांस के शौकीन तुषार अभी ग्रेजुएशन के छात्र है। दोस्तों की सलाह पर शौक से शुरू हुआ मॉडलिंग का काम आज उनका जुनून बन गया है। यही वजह है कि आज उनके पास लखनऊ के कई बड़े प्रोजेक्ट के काम पड़े हुए है। यहां तक की कई सरकारी एजेंसियों ने अपने प्रोजेक्ट के लिए तुषार से सम्पर्क किया है। घर से बहुत ज्यादा सपोर्ट न होने के बाद भी आज  वह लगातार कामयाबी के शिखर पर पहुंचते जा रहे हैं। लखनऊ में उसके  पास दस से ज्यादा प्रोजेक्ट है। 


आरुषि

खूबसूरती के साथ टैलेंट भी हो यह बहुत कम लोगों में देखने को मिलता है, लेकिन लखनऊ आलमबाग की आयुषी के पास यह दोनों है। बोल्ड शूट हो या पारम्परिक परिधान दोनों में ही आरुषि का जवाब नहीं है। मॉडलिंग के साथ वह अपना फैमिली बिजनेस भी देखती हैं। उनके पास मौजूदा समय में शहर के कई बड़े ज्वैलरी हाउसेस के  शूट के काम है। शहर की मीडिया और अखबारों में पेज थ्री के पन्नों में वह अपने काम की वजह से अक्सर नजर आती हैं। होली हो या दीपावली त्योहार के प्रमोशन के लिए भी कई बड़े दुकानदान और कारोबारी अपने साथ आरुषि  को जोड़ते है।  काम के साथ अपने नेचर की वजह से वह आज काफी लोकप्रिय है।


गर्विता मन्धान 

मॉडलिंग के पेशे में जो मुकाम लोग चार से पांच सालों में नहीं हासिल कर पाते हैं, कानपुर की गर्विता ने महज चार से पांच माह के कैरियर में अपनी अलग पहचान बना ली है। पढ़ाई में अव्वल रहने वाली गर्विता टीचिंग का भी शौक रखती हैं। इस वजह से वह छोटे बच्चों के साथ जुड़ी रहती हैं। उनकी खूबसूरती और लुक की वजह से उनके पास आज काम चल के आता है। काम के प्रति ईमानदार गर्विता खुद स्वीकार करती है, कि इंडस्ट्री में नए होने की वजह से  उनको अभी बहुत कुछ सीखना है। हालांकि अनुभव कम होने के बावजूद उनके पास कानपुर और लखनऊ के कई बड़े प्रॉजेक्ट से ऑफर आ चुके हैं। 


गरिमा तिवारी 

कहा जाता है कि शादी के बाद मॉडलिंग के दरवाजे बंद हो जाते है, लेकिन लखनऊ की गरिमा तिवारी इसको झूठलाती नजर आती है। पेशे से टैक्सटाइल डिजाइनर गरिमा पिछले दो साल से मॉडलिंग कर रही हैं। वह मौजूदा समय में  शहर में  महिलाओं का सबसे चर्चित कार्यक्रम मल्लिकाए – अवध की ब्रॉड एंबेसडर हैं। महज दो साल में ही इस कामयाबी के लिए वह अपने पति से मिले सहयोग को सबसे प्रमुख मानती है। आम तौर पर यह देखा जाता है कि पतियों का सहयोग नहीं होता लेकिन गरिमा अपने आप को इसको लिए काफी भाग्यशाली मानती हैं। 


अनामिका यादव 

यूं तो यह माना जाता है कि आप साइंस के स्टूडेंट हो तो मॉडलिंग और बाकी काम के लिए आपके पास समय ही नहीं है। लेकिन कानपुर की अनामिका न सिर्फ साइंस की छात्रा बल्कि मॉडलिंग में भी काफी नाम कमा रही हैं। कहने के लिए तो इनके  पास अभी महज दो शो में ही रैप वॉक करने का अनुभव है, लेकिन उनका आत्मविश्वास गजब का है। चेहरे पर हर समय मनमोहक हंसी रखने वाली अनामिका के पास भी बहुत सारे ऑफर हैं। हालांकि वह अभी अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहती है। इसकी वजह से मॉडलिंग को अभी बहुत सीरियसली नहीं ले रही हैं, लेकिन उसके बावजूद भी उनके पास लगातार काम के ऑफर आ रहे हैं।  


जारा शेख 

लिस्ट में भले ही जारा का जिक्र सबसे अंत में  हो रहा हो, लेकिन वह अपने काम की वजह से आज सबसे ऊपर है। कोलकाता में जन्मीं और लखनऊ में पली- बढ़ी जारा मॉडलिंग के साथ पढ़ाई भी करती है। अपने टैलेंट के बल पर आज के उनके पास न सिर्फ लखनऊ से काम आता है, बल्कि दिल्ली जैसे शहर से कई बड़े ऑफर आते हैं। जारा वेडिंग ड्रेस के लिए कई शूट दे चुकी हैं। इसके अलावा जारा शहर में होने वाले कई बड़े फैशन इवेंट की शो स्टॅापर बने भी दिख जाती हैं। आज उनके पास  ऑनलाइन की कई बड़ी कम्पनियों के काम पड़े हैं। इसके अलावा वे कारोबारी भी जो अपने ब्रांड को सोशल मीडिया पर प्रमोट करते है, उनके लिए भी जारा लोगों की पहली पसंद है। ट्रैडिशनल परिधान हो या वेर्स्टन  हर तरह के  ड्रेस में वह उतनी ही खूबसूरत लगती है।http://www.satyodaya.com

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लाइफ स्टाइल

अजीनोमोटो एक मीठा जहर, जानिएं क्यो है हानिकारक…

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आज-कल लोगों को फास्ट फूड व पैक्ड कुछ ज्यादा ही पसंद आ रहा है। बच्चे ज्यादातर चाइनीज फूड खाना पसंद करते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि इस फूड में इस्तेमाल होने वाले मशाले कितने हानिकारक होते है। स्वाद में खट्टा, मीठा,तीखा,कड़वा को छोड़ कर एक पांचवे स्वाद का निजाद हुआ। जिसका स्वाद सबसे अलग होता है जो खाने का जायका ही बदल देता है जिस कारण सबको यह स्वाद बहुत पसंद आता हैं। खाने के स्वाद को बढ़ाने वाला यह मशाला अजीनोमोटो है जो खाने में मीठे जहर का काम करता है। बहुत से लोगों का पंसंदीदा फूड चाइनीज होता है। यहां हम भारतीय चाइनीज खाने की बात कर रहे हैं। चाइनीज व्यंजनों में अपने अलग ही मसाले और समाग्री का इस्तेमाल होता है. रेस्तरां और होटलों के चाइनीज फूड को घर पर एकदम वैसा नहीं बनाया जा सकता, भले ही आप वैसी ही सामग्री प्रयोग क्यों न करें। आप कितनी भी बार घर पर क्यों न बना लें, लेकिन रेस्तरां जैसा स्वाद घर पर नहीं पाया जा सकता। क्या आपने कभी सोचा है ऐसा क्यों? अकसर लोग खुद में ही कमी निकालकर शांत बैठ जाते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। लेकिन अगर आप इसमें सिर्फ अजीनोमोटो ड़ालेंगे तो यकीनन डिश का स्वाद बदल जाएगा और डिश में रेस्तरां जैसा स्वाद भी आएगा। हम में से बहुत से लोग अजीनोमोटो तो जानते हैं, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि इसका असली नाम एमएसजी (मोनोयोडियम ग्लूटामेट) है। पहली बार जापानी कंपनी ने ही बताया था कि एमएसजी को अजीनोमोटो कहा जाता है, जिसका मतलब होता है ‘एसंस ऑफ टेस्ट’ (स्वाद का सार) कंपनी ने इसके नाम के अनुसार ही इसे इस्तेमाल किया। अकसर यह दुनियाभर में चर्चा का विषय बना रहता है, भले ही कई बार कोई गलत कारण ही क्यों न हो।

बहुत साल पहले, एक जापानी व्यक्ति किकुनै इकेडा ने अपनी पत्नी द्वारा बनाए टेस्टी सूप के बाउल में से कुछ नया ढूंढा। उनकी पत्नी अकसर केल्प नामक समुद्री घास से एक लोकप्रिय जापानी स्टॉक ‘दाशी’ बनाया करती थी। केल्प का टेस्ट काफी अलग था, इसलिए इकेडा उसे मीठे, नमकीन, खट्ठा या कड़वे स्वाद में समझ नहीं कर पा रहा था उसके ऊपर इसका इतना प्रभाव पड़ा कि धीरे-धीरे उसने दो बातों का नेतृत्व किया। पहला पांचवे फ्लेवर उमामी और दूसरा मोनोसोडियम ग्लूटामोट का विकास। कई सालों के अध्ययन के बाद इकेडा ने जाना कि उमामी स्वाद का रसायनिक आधार एक यौगिक है, जिसे सोडियम ग्लूटामेट कहते हैं। यह ग्लूटामिक एसिड से प्राप्त होता है। यह कई सामग्री और मसालों में पाया जाता है। ग्लूटामिक एसिड युक्त प्रोटीन को पकाकर और उबालकर तोड़ा जाता है, तब जाकर यह ग्लूटामेट बनता है। इसके बाद इकेडा बड़े पैमाने पर होने वाले उत्पादन की जगह गया, जहां उसने इस यौगिक को आम आदमी के बीच में उपल्बध किया, ताकि लोग अपनी डिश को ज्यादा टेस्टी बनाने में इसका इस्तेमाल कर सकें। तब से अजीनोमोटो प्रचलन में आ गया। पारंपरिक व्यंजनों में प्राकृतिक सामग्री इस्तेमाल करने के लिए कहा जाता है, लेकिन उसमें उमामी फ्लेवर लाने में काफी टाइम और राशि खर्च करनी पड़ती है,  वहीं ग्लूटामेट नमक जल्दी, आसान, सुविधाजनक और एकदम से फ्लेवर लाने वाला बूस्टर है।

एमएसजी से बढ़ता है स्वाद

एमएसजी यानी मोनोसोडियम ग्लूटामेट कैसे खाने को स्वादिष्ट और टेस्टी बनाता है? यह सवाल लगभग सभी को परेशान कर रहा होगा, तो आपको बता दें कि ग्लूटामेट की प्राकृतिक स्वाद बढ़ाने वाली क्षमता खाने में बहुत ही अलग होती है, लेकिन आपको यह जानकर बहुत आश्चर्य होगा कि टमाटर, चीज़, सोयबीन और सूखे मशरूम में यह प्रचूर मात्रा में पाया जाता है।

हानिकारक है अजीनोमोटो

19 वीं शताब्दी में मोनोसोडियम ग्लूटामेट मिलने के बाद दुनियाभर में एमएसजी मिलने की खबर फैल गई। इसके बाद जब लोगों ने इसे चखना शुरू किया, तो उनके लिए यह काफी नहीं था।

अचानक से एमएसजी हर जगह दिखाई देने लगा जैसे  प्रोसेस्ड मीट, डिब्बे वाले खाद्य पदार्थों जैसे टूना सूप, सालाद, स्नैक्स, आइसक्रीम, च्विंग गम, रेडी-टू-इट उत्पाद, बच्चों के खाने आदि सब में एमएसजी ने अपनी जगह बना ली. जब एमएसजी खाने से लोग बीमार पड़ने लगे, तो एक चाइनीज रेस्तरां ने चाइनीज व्यंजनों में इसका इस्तेमाल बंद कर दिया। एमएसजी खाने के बाद लोगों में एक जैसे ही लक्षण दिखाई देने लगे। शुरुआत में सिर दर्द, मुंह पर लाली, पसीना, सुन्न होना, चेहरे पर दबाव, छाती पर दर्द, उलटी और कमजोरी जैसी समस्याओं का सामना लोगों को करना पड़ा। कुछ अध्ययन से पता लगा कि इसके सेवन से बच्चों के दिमाग और आंख पर भी असर पड़ता है। और आखिरकार इससे होने वाली बीमारियों की वजह से एमएसजी वाले खाद्य पदार्थों को जांच लिस्ट में रखा जाता है। इसके विवाद कभी कम नहीं हो सकते, क्योंकि खाद्य कंपनियों का आरोप है कि कोई उचित वैज्ञानिक तथ्य नहीं है, जो इन सभी आरोपों का समर्थन कर सके।

चाइनीज फूड के बारे में जब कुछ लोगों से बात किया तो पता चला उन्हे इसके बारे में कुछ जानकारी ही नही हैं। उन्होंने कहा कि खाने में चाइनीज फूड स्वादिस्ट लगता है इस लिए खाते है पता ही नही था कि इसमें पड़ने वाला मशाला जहर का काम करता है।

अंजलि ने बताया मुझे चाइनीज फूड बहुत पसंद है और मै डेली शाम को खाती हूं लेकिन वहीं डिश जब हम घर पर बनाते है तब वह इतना स्वादिष्ट क्यो नहीं होता है। आज पता चला रेस्तरां के खाने में और घर के खाने का स्वाद इतना अलग क्यो होता है। इस जहर को खाना हम लोग पसंद करते है ये हमारे लिए बेहद दुर्भाग्य की बात है।

यह भी पढ़ें -गलत रखरखाव कर सकता है, दवाइयों की गुणवत्ता को कम…

दरअसल सबको चाइनीज डिश खाना पसंद है लेकिन इस डिश में पड़ने वाले जहर के बारे में कुछ पता ही नही है। कितना हानिकारक है ये अजीनोमोटो जो हमारे सेहत के लिए एक मिठा जहर का काम करता है।  http://www.satyodaya .com

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