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अर्थात-यथार्थ

मौनी और सुरभि के बाद नागिन के रोल में नजर आएंगी निया शर्मा, देखें फोटोज..

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नागिन

फाइल फोटो

मुंबई कलर्स का फेमस शो नागिन एक बार वापसी करने जा रहा है इस बार इस शो को लेकर फैंस में काफी उत्साह देखने को मिल रही है इस बार शो नागिन 4 में कौन-कौन एक्टर और एक्ट्रेस होंगे इसको लेकर लम्बे वक्त से चर्चा चल रही है वहीं यह भी कयास लगाए जा रहे थे कि शो में क्या मौनी रॉय, अनीता हसनंदानी और सुरभि ज्योति होंगी? लेकिन एकता कपूर ने बताया कि इस शो में पॉपुलर एक्ट्रेस निया शर्मा होंगी।

आपको बता दें नागिन 4 की एक्ट्रेस निया शर्मा की पिछले दिनों एक तस्वीर सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुई,जिसे निया फैंस ने कहा कि ये तो उनका नागिन लुक है। वहीं अब एक और फोटो सोशल मीडिया पर निया की सामने आई है जिसमें निया पैरों से नागिन अवतार धारण किए नजर आ रही हैंhttps://www.instagram.com/p/B4AWMY6BFMp/

निया की यह फोटो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है। फैंस निया की इस तस्वीर पर कह रहे हैं कि उन्हें इस शो में विलेन बनाया गया है

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निया शर्मा टीवी इंडस्ट्री की सबसे हॉट और सेक्सी एक्ट्रेस में शुमार हैं निया अपने बोल्ड अंदाज की वजह से काफी सुर्ख़ियों में रहती हैं वह टीवी शो और वेब सीरीज में भी नजर आ चुकी हैं ऐसे में फैंस उनसे काफी सारे एक्सपेरिमेंट्स की उम्मीद कर रहे हैं।

वहीं इन तस्वीरों के वायरल होने के बाद निया के फैंस कह रहे हैं कि उनकी यह तस्वीरें हालांकि कुछ एडिटेड भी हो सकती हैं निया के फैंस ये भी कह रहे हैं कि कुछ भी हो लेकिन वह नागिन के किरदार में खूब जमेगीं। बता दें, निया की इससे पहले एक और तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी थी। इसमें वह नागिन लुक में दिखाई दी थीं।https://www.instagram.com/p/B4hC02CBYmd/

वायरल फोटो के कैप्शन में लिखा था, ‘ नागमणि को बचाना होगा और उसे सिर्फ तुम बचा सकती हो वादा करो। फोटो में निया सफेद और सुनहरे रंग की ड्रेस पहने हुए नजर आ रही हैं।http://www.satyodaya.com

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डाक विभाग की पहल: अब महज 30 रुपये में मिलेगा 250 मिलीलीटर शुद्ध गंगाजल

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लखनऊ। कोरोना महामारी के बीच भगवान शंकर का अभिषेक करने के इच्छुक लोगों को घर बैठे ही डाक विभाग गंगोत्री का गंगाजल उपलब्ध कराएगा। शहर के प्रधान डाकघर सहित चयनित डाकघरों से महज 30 रूपये में 250 मिलीलीटर शुद्ध गंगाजल खरीदा जा सकेगा। इसके लिए लखनऊ जीपीओ, चौक समेत सभी प्रधान डाकघरों में विशेष प्रबंध किए गए हैं।

यह जानकारी लखनऊ मुख्यालय परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं कृष्ण कुमार यादव ने दी है। उन्होंने कहा कि सावन माह में बाबा भोलेनाथ के अभिषेक या अन्य अनुष्ठान हेतु गंगाजल लाने के लिए अब गंगोत्री, ऋषिकेश, हरिद्वार या इलाहाबाद और बनारस के गंगा तट जाने की जरुरत नहीं है, बल्कि अब गंगा जल डाकघरों के माध्यम से उपलब्ध होगा। गंगा जल की जरूरत है तो प्रधान और अन्य चयनित डाकघरों के काउंटर पर जाना होगा और निर्धारित कीमत पर शुद्ध गंगाजल उपलब्ध करा दिया जाएगा।

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डाक निदेशक ने कहा कि गंगाजल बिक्री से लाभ कमाने का मकसद नहीं है, बल्कि डाक विभाग ने गंगाजल के प्रति लोगों की असीम आस्था एवं विश्वास की पवित्र भावना का सम्मान करते हुए गंगोत्री से संग्रहित गंगाजल को उन तक पहुंचाने का प्रयास किया है, जिससे कि लोग लाभान्वित हो सकें। लखनऊ जीपीओ के चीफ पोस्टमास्टर आरएन यादव ने बताया कि जीपीओ में गंगाजल बिक्री के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं।

वहीं डाकघर से गंगाजल खरीदने वाली आराधना त्रिवेदी ने बताया कि यह पहल श्रद्धालुओं के लिए वरदान है और दाम भी किफायती हैं। कोरोना महामारी के दौर में अपने ही नजदीकी डाकघर में गंगाजल की उपलब्धता शिवभक्तों के लिए मुहमांगी मुराद जैसी है।http://www.satyodaya.com

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सावन का महीना: भगवान शिव के लिए ऐसे रखें उपवास, बरतें ये सावधानियां

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कल से सावन की शुरूआत होने वाली है जो कि 6 अगस्त को खत्म होगा। इन दिनों कई लोग व्रत रखेंगे लेकिन क्या आपको पता है कि सावन का व्रत के दौरान आपको किन बातों को लेकर सावधानी बरतनी चाहिये।

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#SAWAN


 जैसे की हम सब जानते हैं कि सावन का महीना भगवान शिव का प्रिय होता है। माना जाता है कि इस महीने में भगवान शिव की आराधना करने वाले भक्तों को भगवान शिव का खास आशीर्वाद मिलता है। शास्त्रों में सोमवार का दिन भगवान शिव की आराधना के लिए होता है। सोमवार के दिन व्रत रखने से भोले शंकर अपने भक्तों पर विशेष कृपा करते हैं। ऐसे में अगर सावन के महीने में एक साथ कई सोमवार का दिन आए तो उस दिन भोले भंडारी की सबसे ज्यादा अपनी कृपा बरसाते हैं। इस बार कुल पांच सावन सोमवार का दिन रहेगा।

सावन के महीने में व्रत रखने वाले लोगों को दूध का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि सावन में भगवान शिव को दूध चढ़ता है। इसलिए व्रत रखने वाले के लिए दूध का सेवन वर्जित है।

 सावन में बैंगन का सेवन अशुद्ध माना जाता है इसलिए शिव भक्तों को इसका सेवन नहीं करना चाहिए।

– सावन के महीने में पूजा करते समय कभी भी तुलसी और केतकी के फूलों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

– भगवान शिव की पूजा करते समय शिवलिंग पर हल्दी और कुमकुम नहीं लगाना चाहिए और ना ही नारियल के पानी से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए।

– शिवलिंग का जलाभिषेक करते समय कांस्य और पीतल के बर्तनों का इस्तेमाल करना चाहिए.http://www.satyodaya.com

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#InternationalYogaDay पर विशेष : आसन से शासन तक…

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लखनऊ। प्रथमदृष्टा यह देखने में आता है कि इस देश का योग से नाभिनाल का संबध है। हमारे यहां का सिस्टम इतना तगड़ा है कि कई योग तो बिना किए ही अर्थात स्वतः हो जाते हैं और कइयों को करने की कोई विशेष जरूरत ही नहीं पड़ती। जैसे किसी शरीफ से अगर पुलिस वाले ने अपने ‘ही’ अंदाज में (यहां ही पर विशेष जोर दें) कुछ पूछ लिया तो उसे ‘पवनामुक्तासन’ करने की आवश्यकता महसूस नहीं होती। रोजमर्रा के अपने काम कराने आम शहरी जब सरकारी विभाग जाता है, तो वहां उसे ‘ताड़ासन’ ही कराया जाता है। (बिना लक्ष्मी के ताड़ा ही जाएगा!)

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हम सब का यह रोज का अनुभव है कि हमें अपने छोटे से छोटे काम के चक्कर में ‘चक्रासन’ करना पड़ता है। इस सिलसिले में एक विज्ञापन याद आता है जिसमें एक बेचारे को अपना एक काम कराने के लिए ‘चक्रासन’ करते-करते चप्पल तक घिस गई थी। योग भले ही हमारी पुरातन परंपरा का हिस्सा रही हो मगर आजादी के बाद योग का महत्व हमारे आधुनिक जीवनशैली से जबरदस्त ढंग से पैबस्त हैै। आप इसे संजोग माने या नियति, मगर है यह कडुवा सच।

जनता बड़ी मुरादों से सरकार चुनती है, तो बदले में सरकार उसे ‘दंडासन’ करवाती है। जो नेता विपक्ष में रह कर जनता के लिए ‘सिंहासन’ करते हुए गला फाड़तेे हैं, वहीं फिर सत्ता मिलते ही ‘भुंजगआसन’ करने लग जाते हैं। यहां शासन मिलतेे ही जनता के लिए दिन-रात ‘शीर्षासन’ का दावा करने वाली सरकार ‘सुखआसन’ करने लगती है।

सरकार पर जरा-सा जोखिम आया नहीं कि सरकार विभिन्न राजननीतिक दलों के साथ ‘सेतबंधुआसन’ करने में देर नहीं करती। जैसे कश्मीर में चार साल तक करते हुए देखा या बिहार में हम देख रहे हैं। यहां ऐसे ही होता है हमारे जनप्रतिनिधियों के हितों पर जरा सी भी खरोंच आती है तो सारे के सारे ‘सर्वांगासन’ करने लग जाते हैं। जबकि पेट्रोल-डीजल से लेकर सब्जियों के बढ़ते भाव जब-तब जनता से ‘क्रोंचासन’ या ‘वज्रासन’ कराती रहती है।

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नेताओं के भाषण सुनते-सुनते जनता कब ‘कर्णपीड़ासन’ करने लगी उसे पता ही नहीं चला। ‘मेरे देश की धरती सोना उगले,उगले मोती’ वाली धरा पर ‘हलासन’ करने वाला किसान ‘प्राणमुक्तासान’ करने को विवश होता है, क्योंकि यहां आसन नहीं शासन महत्वपूर्ण है और इसके लिए हमारे नेता कोई भी ‘सिद्धासन’ करने को तैयार रहते हैं। समझ में नहीं आता है कि ऐसे सत्ताधारियों को प्रणाम कहे या ‘प्रााणायाम’। (नोट- उपर्युक्त सारे आसन वास्तविक हैं।)

अनूप मणि त्रिपाठी

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