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टेक्नोलॉजी

यूजर्स को मिलने जा रहा है Whatsapp का नया ऐनिमेटेड फीचर, जानिए इसके बारे में

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 नईदिल्ली:- इंस्टैंट मेसेजिंग ऐप Whatsapp अपने यूजर्स के चैट एक्सपीरियंस को बेहतर और मजेदार बनाने के लिए लगातार नए-नए फीचर रोलआउट करता रहता है। जहां इंस्टैंट मैसेजिंग एप व्हॉट्सएप ऐनिमेटेड स्टिकर को आज लॉन्च कर दिया। फिलहाल ये फीचर उपलब्ध नहीं है। कई वर्जन पर इसका टेस्ट किया जा रहा है। जिसमें एंड्रॉयड, iOS और वेब भी उपलब्ध है।

आपको बता दें कि वॉट्सऐप ने पिछले साल अक्टूबर में स्टिकर्स फीचर को लॉन्च किया था। इन्हें देखने के बाद कहा जा सकता है कि इन ऐनिमेटेड स्टिकर्स के आने से यूजर्स के चैटिंग का मजा दोगुना बढ जायेगा। अगर आप रिसीव किए ऐनिमेटेड स्टिकर को सेंड करते हैं तो यह ऐनिमेटेड फॉर्म में ही जाएगा। वॉट्सऐप अपने ऐनिमेटेड स्टिकर्स के लिए , iOS ऐप पर भी सपॉर्ट उपलब्ध कराएगा।

जानकारी के मुताबिक वॉटस्ऐप पर इस वक्त 13 प्री-इंस्टॉल्ड स्टिकर्स सेट ऑफर करता है। ऐंड्रॉयड यूजर्स अगर चाहें ‘Get More Stickers’ ऑप्शन पर टैप करके गूगल प्ले स्टोर से स्टिकर डाउनलोड कर सकते हैं। आपको बता दें कि इसी हफ्ते एक रिपोर्ट आई थी। जिसमें कहा गया था कि व्हॉट्सएप यूजर्स को स्क्रीनशॉट लेने से रोकने के लिए एक नया फीचर लाने जा रहा है। इसका मकसद एप की प्राइवेसी और सिक्योरिटी को और मजबूत करना है। जबकि स्क्रीनशॉट वाला ये फीचर यूजर्स के लिए तभी काम करेगा, जब एंड्रॉयड यूजर्स को नया फिंगरप्रिंट अथॉन्टिकेशन फीचर मिलेगा।http://www.satyodya.com

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माइक्रोसॉफ्ट ने अपने कर्मचारियों को स्लैक यूज करने से किया मना, ये है कारण

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लखनऊ। माइक्रोसॉफ्ट ने अपने कर्मचारियों को स्लैक यूज करने से किया मना कर दिया है। कंपनी का कहना है कि ये फैसला सुरक्षा चिंताओं की वजह से लिया गया है। इसके अलावा माइक्रोसॉफ्ट ने अपने कर्मचारियों को अमेजन वेब सर्विसेज (AWS) और गूगल डॉक्स का इस्तेमाल करने से भी बैन कर दिया है।

क्या है स्लैक
स्लैक का इस्तेमाल कई कंपनियों में किया जाता है। इस एप्प के साथ लोग अपने सह-कर्माचरी के साथ प्राइवेट चैट के साथ-साथ ग्रुप डिस्कशन भी कर सकते हैं। इस एप्प को फाइल शेयरिंग और ऑफिस वर्क के लिए बेस्ट माना जाता है।

कंपनी ने कर्मचारियों को इसके बजाय कंपनी के अपने सॉफ्टवेयर को इस्तेमाल करने की सलाह दी है। बता दें, सॉफ्टवेयर दिग्गज कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने हाल ही में भारत में 10 उच्च शिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानि की (एआई)- संचालित डिजिटल लैब लॉन्च कर दिया है।

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टेक्नोलॉजी

जल्द ही इंसानों के सिर पर भी होंगे सींग, जानिए मोबाइल से क्या है कनेक्शन….

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नई दिल्ली। मोबाइल ने हमारे जीवन को आश्चर्यजनक रूप से प्रभावित किया है। आज हर किसी के पास अपना मोबाइल फोन है जिसे वह समय अपने करीब रखना चाहता है, लोगों को मोबाइल से एक पल भी दूरी गंवारा नहीं है। मोबाइल ने बहुत कम समय में हमारे व्यवहार, सोच और काम करने का अंदाज सब बदल कर रख दिया। लेकिन अब मोबाइल हमारी शारीकि संचरना को बदलने जा रहा है। चैकिए मत! एक शो में यह दावा किया गया है। रिसर्च की मानें तो मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल करने वाले युवाओं के सिर में सींग निकल रहे हैं। सिर के स्कैन में इस बात की पुष्टि भी हो गई है।
बायोमकेनिक्स यानी कि जैव यांत्रिकी पर की गई एक नई रिसर्च में खुलासा हुआ है कि सिर को ज्यादा झुकाने के कारण युवा अपनी खोपड़ी के पीछे सींग विकसित कर रहे हैं। रिसर्च के मुताबिक मोबाइल पर घंटों वक्त बिताने वाले युवा खास कर जिनकी उम्र 18 से 30 साल के बीच है, वो इसके ज्यादा शिकार हो रहे हैं। इस रिसर्च को ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड स्थित सनशाइन कोस्ट यूनिवर्सिटी में किया गया है। रिसर्च में कहा गया है कि रीढ़ की हड्डी से वजन के शिफ्ट होकर सिर के पीछे की मांसपेशियों तक जाने से कनेक्टिंग टेंडन और लिगामेंट्स में हड्डी का विकास होता है। नतीजतन एक हुक या सींग की तरह की हड्डियां बढ़ रही हैं, जो गर्दन के ठीक ऊपर की तरह खोपड़ी से बाहर निकली हुई है।

वॉशिंगटन टाइम्स की खबर के मुताबिक, खोपड़ी के निचले हिस्से इस कांटेदार हड्डी को देखा जा सकता है। यह हड्डी किसी सींग की तरह लगती है। डॉक्टरों के मुताबिक, हमारे खोपड़ी का वजन करीब साढ़े चार किलोग्राम का होता है यानी एक तरबूज के बराबर। आमतौर पर मोबाइल का इस्तेमाल करते वक्त लोग अपने सिर को लगातार आगे पीछे की तरफ हिलाते हैं। ऐसे में गर्दन के निचले हिस्से की मांसपेशियों में खिंचाव आता है और इसी के चलते हड्डियां बाहर की तरफ निकल जाती है, जो किसी श्किसी सींग की तरह दिखती है. ऐसा सिर पर ज्यादा दबाव पड़ने से हो रहा है।

आपको बता दें कि शोधकर्ताओं का पहला पेपर जर्नल ऑफ एनाटॉमी में साल 2016 में प्रकाशित हुआ था। इसमें 216 लोगों के एक्स-रे को बतौर उदाहरण पेश किया गया था, जिनकी उम्र 18 से 30 साल के बीच थी। रिसर्च में कहा गया कि 41 फीसदी युवा वयस्कों के सिर की हड्डी में वृद्धि देखी जा सकती है, जो पहले लगाए गए अनुमान की तुलना में बहुत ज्यादा है। यह महिलाओं की तुलना में पुरुषों में अधिक है।

यह भी पढ़ें-International Yoga Day: सीएम योगी ने लोगों को बताया योगा का लाभ, किया युवाओं के साथ अभ्यास…

इसी तरह एक दूसरा पेपर साल 2018 में पेश किया गया जिसमें चार टीनएजर्स को बतौर केस स्टडी लिया गया था। शोध में कहा गया कि इन टीनएजर्स के सिर पर सींग आनुवांशिक नहीं बल्कि खोपड़ी और गर्दन पर पड़ रहे दबाव की वजह से थीं। इस पेपर से महीना भर पहले प्रकाशित की गई शोध रिपोर्ट में 18 साल से लेकर 86 वर्ष तक के 1200 लोगों के एक्स-रे को शामिल किया गया था। शोधकर्ताओं ने पाया कि 33 फीसदी लोगों में सींग जैसी हड्डी के विकसित होने की बात सामने आई थी। http://www.satyodaya.com

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मोबाइल पर इंटरनेट सर्फिंग करने में भारतीय सबसे आगे

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नई दिल्ली। भारत की किसी भी सड़क-गली से गुजर जाइये आपको झुके हुए चेहरे नजर आ जाएंगे। इसलिए नहीं कि वो किसी बात से शर्मिंदा हैं बल्कि इसलिए कि वे मोबाइल पर इंटरनेट सर्फिंग में व्यस्त हैं। अब तो इस बात की पुष्टि एरिक्सन मोबिलिटी रिपोर्ट ने भी कर दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत मोबाइल पर इंटरनेट का प्रयोग करने में दुनिया में प्रथम पायदान पर है।

जून 2019 इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2018 के अंत तक प्रति माह एक फोन में 9.8 जीबी डाटा का इस्तेमाल होने लगा था। साथ ही यहां 4.6 अरब जीबी मोबाइल डाटा का यूज होता है जो 2024 तक 16 अरब जीबी हो जाएगा।

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत सहित नेपाल-भूटान में स्मार्टफोन यूजर्स की संख्या में 11 फीसदी की रफ्तार से वृद्धि हो रही है। 2024 तक इंडियन रीजन में स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वालों की संख्या 1.1 अरब तक हो जाएगी। बता दें, यहां आधे से ज्यादा आबादी मोबाइल ब्रॉडबैंड का इस्तेमाल करती है और यह संख्या 2024 तक 61 करोड़ से बढ़कर सवा अरब हो जाएगी।

ऐसा इसलिए संभव हो पाया है क्योंकि यहां लोगों को अब तेज इंटरनेट मुहैया हो गया है। जिसकी वजह से लोग लाइव वीडियो देखना ज्यादा पसंद आ रहा है। उम्मीद है कि 5 जी आने के बाद यह संख्या और तेजी से बढ़ेगी। माना जा रहा है कि अभी अगर 9.8 जीबी डाटा का कोई यूज कर रहा है तो यह 2024 तक वह 18 जीबी डाटा का इस्तेमाल करने लगेगा। इसमें सबसे ज्यादा डाटा का इस्तेमाल लोग वीडियो देखने में करेंगे। अनुमान है कि करीब 74 फीसदी डाटा लोग वीडियो में उड़ा देंगे।  

भारत में फिलहाल 5 जी की सुविधा लोगों को उपलब्ध नहीं है। लेकिन 2022 तक इसके सब्सक्रिपशन की शुरूवात हो सकती है। 2024 तक करीब 6 फीसदी लोग 5 जी को सब्सक्राइब कर लेंगे। वहीं, 82 फीसदी 4 जी यूजर्स हो जाएंगे। इस रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि 32 फीसदी इंडियन यूजर्स का कहना है कि अगर उन्हें 5 जी देने में देरी करेंगे तो वो अपना ऑपरेटर बदल देंगे।

हालांकि, भारतीयों को मोबाइल डेटा के मामले में जल्द ही अमेरिका और यूरोप जैसे देश पीछे छोड़ देंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 तक 63 फीसदी अमेरिकन 5 जी का इस्तेमाल करेंगे। वहीं, एक यूजर करीब 39 जीबी डाटा का उपभोग कर डालेगा। दूसरी तरफ यूरोप में एक व्यक्ति करीब 32 जीबी डाटा का प्रयोग कर रहा होगा। http://www.satyodaya.com

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July 1, 2019, 8:36 am
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